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बनारस में 20 मई तक कम हो जाएगी संक्रमण की रफ्तार

Tue, 04 May 2021 01:19 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 04 May 2021 01:19 AM IST
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In Banaras, the pace of infection will reduce by May 20
कानपुर/वाराणसी। बनारस में 20 मई तक कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम हो जाएगी। यह दावा आईआईटी कानपुर के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर पद्मश्री मणींद्र अग्रवाल ने गणितीय विश्लेषण के आधार पर किया है। उत्तर प्रदेश समेत अलग-अलग राज्यों में संक्रमण की स्थिति के अध्ययन के बाद उन्होंने जो डाटा तैयार किया है, उसमें वाराणसी, कानपुर के साथ-साथ प्रयागराज और लखनऊ में भी आने वाले दिनों में संक्रमण में कमी के संकेत मिल रहे हैं। प्रोफेसर अग्रवाल ने बताया कि कानपुर में भी 28 अप्रैल तक पीक आना था पर 30 अप्रैल को आया। उनका कहना है कि पिछले साल के संक्रमण की स्थिति और दूसरी लहर में संक्रमण के आधार पर ही इसका विश्लेषण निकाला गया है। प्रोफेसर अग्रवाल के अध्ययन के मुताबिक वाराणसी, प्रयागराज लखनऊ में भी 28 अप्रैल को ही कोरोना संक्रमण का पीक आकर बीत गया है। ऐसे में 20 मई के बाद अब राहत मिलने की उम्मीद है।
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विश्लेषण के आधार पर निकला यह दावा
लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी - 28 अप्रैल को पीक आ चुका है। 20 मई के बाद कोरोना से राहत मिलने की उम्मीद है।
कानपुर - 30 अप्रैल को पीक आ चुका है। 20 मई के बाद से कोरोना से राहत मिलने की उम्मीद है।
नोएडा - 8 से 12 मई के बीच कोरोना का पीक आएगा। इसके बाद धीरे-धीरे उतार आएगा।
-मुंबई - 20 से 22 अप्रैल के बीच पीक आ चुका है। धीरे-धीरे उतार आ रहा है।
एक जून के आसपास कोरोना से राहत मिलने की उम्मीद है।
पटना - 24 से 26 अप्रैल के बीच पीक आ चुका है। धीरे-धीरे उतार आ रहा है। एक
जून के आसपास कोरोना से राहत मिलने की उम्मीद है।
चेन्नई - 25 से 30 मई के बीच कोरोना का पीक आने की उम्मीद है। इसके बाद
धीरे-धीरे उतार आएगा।
कोलकाता - 12 मई के आसपास कोरोना का पीक आने की उम्मीद है। इसके बाद
धीरे-धीरे उतार आएगा।
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इस आधार पर किया संक्रमण का विश्लेषण
प्रो. अग्रवाल ने पिछले साल संक्रमण के फैलाव और प्रतिरोधक क्षमता का विश्लेषण जनसंख्या के आधार पर किया है। उन्होंने बताया कि विश्लेषण में संबंधित शहरों की जनसंख्या, जांच में मिले संक्रमित मरीजों और कितने दिन में कितने लोगों तक वायरस पहुंच रहा है, इन तथ्यों का समावेश किया गया है।
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इस आधार पर उनका दावा है कि पिछले साल मार्च में तीन दिन में एक व्यक्ति
संक्रमित हो रहा था। जबकि, इस साल मार्च में संक्रमण का फैलाव तेज रहा और
दो दिन में एक व्यक्ति संक्रमित हुआ। जनवरी-2021 के मुकाबले यह दोगुना था।
जनवरी में चार दिन में एक संक्रमित मिल रहा था। पिछले माह अप्रैल में
संक्रमण का फैलाव मार्च से भी तेज रहा। इसी माह संक्रमण अपने पीक पर
पहुंचा। ऐसा इसलिए हुआ कि तेजी से फैलते संक्रमण को देखकर भी लोग सचेत नहीं
हुए और बिना डरे एक-दूसरे से मिलते रहे।
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