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धरातल पर उतरेगा आईएमएस, रेलवे की जमीन लेगा एनएचएआई
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देश के पहले इंटर मोडल स्टेशन (आईएमएस) को काशी स्टेशन के पास धरातल पर उतारने की कवायद शुरू की गई है। परियोजना के लिए आवश्यक 40 एकड़ जमीन के लिए एनएचएआई रेलवे से जमीन हस्तांतरित करेगा। नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड के सीईओ प्रकाश गौर ने सोमवार को परियोजना स्थल का निरीक्षण किया और मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल के साथ बैठक की। इसमें नवंबर से आईएमएस के लिए काम शुरू करने की सहमति बनी। इससे पहले डीपीआर की समीक्षा के साथ परियोजना में आड़े आ रही समस्याओं को दूर किया जाएगा।
काशी स्टेशन के पास प्रस्तावित आईएमएस में एक छत के नीचे जल, नभ और थल की यात्री सुविधाओं दिए जाने का प्रस्ताव है। मगर, जमीन पर अतिक्रमण सहित अन्य बाधाओं के चलते इस पर सहमति नहीं बन रही थी। अब नेशनल हाईवे अथारिटी ने काशी स्टेशन के आसपास की 40 एकड़ जमीन चिह्नित कर उसका डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाया है। इसमें स्टेशन पर ही फाइव स्टार होटल के साथ अर्बन हॉट और सभी यात्री सुविधाएं होंगी। करीब तीन हजार करोड़ रुपये की यह परियोजना अब तक वाराणसी की सबसे बड़ी परियोजना होगी। परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद यहां बस, ट्रेन और वाटर ट्रांसपोर्ट की सुविधा होगी। कैंट स्थित रोडवेज बस स्टेशन भी यहीं शिफ्ट होने का प्रस्ताव है। काशी स्टेशन पर प्लेटफॉर्म बढ़ाए जाएंगे और ट्रेनों का आवागमन भी बढ़ेगा।
बाधाएं दूर करने के बाद ही शिलान्यास
कमिश्नरी सभागार में हुई बैठक में बताया गया कि परियोजना के सभी पहलुओं की रिपोर्ट तैयार की गई है। फिजिबिलिटी रिपोर्ट में कई बाधाओं का जिक्र है और उन्हें दूर करने के बाद ही शिलान्यास कराया जाएगा। मंडलायुक्त ने बताया कि जिलाधिकारी ने एक जांच समिति गठित कर रिपोर्ट तैयार की है। उसी आधार पर जमीन अधिग्रहण से लेकर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई शुरू कराई जाएगी।
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नवंबर में पूरा होगा खिड़किया घाट का पहला चरण
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने सोमवार को खिड़किया घाट परियोजना की समीक्षा की। उन्होंने नवंबर तक परियोजना का पहला चरण पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि दिसंबर से दूसरे चरण की तैयारी शुरू करनी है।
भारत और बांग्लादेश के बीच जल्द शुरू होगी जलयान सेवा
गंगा में क्रूज व मालवाहक जहाज के चैनल होंगे अलग-अलग
कमांडेंट ने जलपोत का लिया जायजा, जल्द शुरू होगी गंगा में ड्रेजिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। गंगा में क्रूज और मालवाहक जहाज के चैनल अलग-अलग होंगे। गंगा में बनने वाले चैनल के निरीक्षण के लिए अत्याधुनिक मशीनों को लगाने के साथ ही विशेष टीम हर 60 दिन पर चैनल की स्थिति की जानकारी रखेगी। जहाज और उस पर रखे उत्पाद के आधार पर चैनल की गहराई तय की जाएगी। इसके साथ ही भारत और बांग्लादेश के बीच भी जल्द ही जलयान सेवा शुरू करने की दिशा में कार्य चल रहा है।
मुख्य जलीय सर्वेक्षक कमांडर महेंद्र कुमार ने सोमवार को रामनगर के राल्हूपुर में स्थित बंदरगाह के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को पटना और गाजीपुर के साथ संपर्क में रहते हुए जलमार्ग पर नजर रखने को कहा। इस दौरान उन्होंने गंगा के जलस्तर का मापन किया। उन्होंने भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ गंगा में गर्मी के मौसम में जलस्तर के घटाव पर चर्चा की। कमांडेंट ने बताया कि व्यापारिक गतिविधियों और पर्यटन को बढ़ाने के लिए रो-रो जलयान चलाया जा रहा है। इससे कम लागत में यात्रियों का माल पहुंचाया जा सकेगा। उन्हें आर्थिक मुनाफा भी होगा। वहीं, सड़क पर ट्रैफिक समस्या, दुर्घटना और प्रदूषण से भी राहत मिलेगी। इसका प्रयोग कोलकाता, पटना और हल्दिया टर्मिनल के लिए किया जा रहा है। भविष्य में भारत और बांग्लादेश के बीच भी जलपोत चलाया जाएगा। इसके लिए बांग्लादेश की टीम भी आ चुकी है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि पटना में ड्रेजिंग शुरू होने के बाद जल्द ही बनारस में ड्रेजिंग आरंभ होगी। कमांडर ने जलपोत का जायजा लिया और वह पटना रवाना हो गए।
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काशी स्टेशन के पास प्रस्तावित आईएमएस में एक छत के नीचे जल, नभ और थल की यात्री सुविधाओं दिए जाने का प्रस्ताव है। मगर, जमीन पर अतिक्रमण सहित अन्य बाधाओं के चलते इस पर सहमति नहीं बन रही थी। अब नेशनल हाईवे अथारिटी ने काशी स्टेशन के आसपास की 40 एकड़ जमीन चिह्नित कर उसका डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाया है। इसमें स्टेशन पर ही फाइव स्टार होटल के साथ अर्बन हॉट और सभी यात्री सुविधाएं होंगी। करीब तीन हजार करोड़ रुपये की यह परियोजना अब तक वाराणसी की सबसे बड़ी परियोजना होगी। परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद यहां बस, ट्रेन और वाटर ट्रांसपोर्ट की सुविधा होगी। कैंट स्थित रोडवेज बस स्टेशन भी यहीं शिफ्ट होने का प्रस्ताव है। काशी स्टेशन पर प्लेटफॉर्म बढ़ाए जाएंगे और ट्रेनों का आवागमन भी बढ़ेगा।
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बाधाएं दूर करने के बाद ही शिलान्यास
कमिश्नरी सभागार में हुई बैठक में बताया गया कि परियोजना के सभी पहलुओं की रिपोर्ट तैयार की गई है। फिजिबिलिटी रिपोर्ट में कई बाधाओं का जिक्र है और उन्हें दूर करने के बाद ही शिलान्यास कराया जाएगा। मंडलायुक्त ने बताया कि जिलाधिकारी ने एक जांच समिति गठित कर रिपोर्ट तैयार की है। उसी आधार पर जमीन अधिग्रहण से लेकर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई शुरू कराई जाएगी।
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नवंबर में पूरा होगा खिड़किया घाट का पहला चरण
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने सोमवार को खिड़किया घाट परियोजना की समीक्षा की। उन्होंने नवंबर तक परियोजना का पहला चरण पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि दिसंबर से दूसरे चरण की तैयारी शुरू करनी है।
भारत और बांग्लादेश के बीच जल्द शुरू होगी जलयान सेवा
गंगा में क्रूज व मालवाहक जहाज के चैनल होंगे अलग-अलग
कमांडेंट ने जलपोत का लिया जायजा, जल्द शुरू होगी गंगा में ड्रेजिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। गंगा में क्रूज और मालवाहक जहाज के चैनल अलग-अलग होंगे। गंगा में बनने वाले चैनल के निरीक्षण के लिए अत्याधुनिक मशीनों को लगाने के साथ ही विशेष टीम हर 60 दिन पर चैनल की स्थिति की जानकारी रखेगी। जहाज और उस पर रखे उत्पाद के आधार पर चैनल की गहराई तय की जाएगी। इसके साथ ही भारत और बांग्लादेश के बीच भी जल्द ही जलयान सेवा शुरू करने की दिशा में कार्य चल रहा है।
मुख्य जलीय सर्वेक्षक कमांडर महेंद्र कुमार ने सोमवार को रामनगर के राल्हूपुर में स्थित बंदरगाह के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को पटना और गाजीपुर के साथ संपर्क में रहते हुए जलमार्ग पर नजर रखने को कहा। इस दौरान उन्होंने गंगा के जलस्तर का मापन किया। उन्होंने भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ गंगा में गर्मी के मौसम में जलस्तर के घटाव पर चर्चा की। कमांडेंट ने बताया कि व्यापारिक गतिविधियों और पर्यटन को बढ़ाने के लिए रो-रो जलयान चलाया जा रहा है। इससे कम लागत में यात्रियों का माल पहुंचाया जा सकेगा। उन्हें आर्थिक मुनाफा भी होगा। वहीं, सड़क पर ट्रैफिक समस्या, दुर्घटना और प्रदूषण से भी राहत मिलेगी। इसका प्रयोग कोलकाता, पटना और हल्दिया टर्मिनल के लिए किया जा रहा है। भविष्य में भारत और बांग्लादेश के बीच भी जलपोत चलाया जाएगा। इसके लिए बांग्लादेश की टीम भी आ चुकी है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि पटना में ड्रेजिंग शुरू होने के बाद जल्द ही बनारस में ड्रेजिंग आरंभ होगी। कमांडर ने जलपोत का जायजा लिया और वह पटना रवाना हो गए।