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एक्शन प्लान तैयार, अगले तीन साल में बदल जाएगी आईएमएस बीएचयू की सूरत
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 05 Aug 2018 01:33 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
महामना के सपने को साकार करने के उद्देश्य से बीएचयू आईएमएस को एम्स जैसा बनाने की इस पहल अनुबंध की औपचारिकता पूरी होने के बाद शुरू हो गई है। मानव संसाधन मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से इस सुविधा को लेकर जो एक्शन प्लान तैयार किया गया है, उस पर अगर गौर करें तो आईएमएस की सूरत ही बदल जाएगी।
यहां केवल चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्स, सुविधाएं ही नहीं बढ़ेंगी बल्कि कई ऐसे ग्रांट भी बढ़ेंगे जो एम्स की तुलना में आधे से भी बहुत कम हैं। इसके अलावा गुणवत्तायुक्त शिक्षा, रिसर्च-इनोवेशन को भी बढ़ावा मिलेगा। जिसका तात्कालिक लाभ यहां छात्रों, शिक्षकों को मिलेगा लेकिन सबसे अधिक लाभ इलाज कराने वाले मरीजों को मिलेगा।
बीएचयू के साथ ही आईएमएस के लिए चार अगस्त का दिन ऐतिहासिक हो गया। संस्थान के खुलने के बाद उपलब्ध संसाधनों में अब तक तो किसी तरह काम चला लेकिन जिस तरह का प्लान तैयार किया गया है और कमियां खोजकर बाहर निकाली गई, उसके पूरा होते ही यह संस्थान और भी संस्थानों के लिए मिसाल बन जाएगी।
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इसमें 27 नए विभाग खुलने, जांच के उपकरण आने, भर्तियों, बेड बढ़ाने आदि को लेकर तीन साल का एक्शन प्लान बनाया गया है। इसके अलावा सात साल का स्ट्रेटजिक प्लान और 15 साल का विजन प्लान बनाया गया है। इसके आधार पर ही शिक्षा और शोध का खाका तैयार होगा।
शोध और इनोवेशन के बारे में समय-समय पर वीडियो, टेली कांफ्रेंसिंग, एम्स में अत्याधुनिक सुविधाओं के बारे में भी अदान-प्रदान होता रहेगा। वर्तमान में एम्स की तुलना में आईएमएस में उपलब्ध संसाधनों पर नजर डाला जाए तो बहुत कम है। जैसे-तैसे काम चल रहा था और यही वजह है कि यहां बेड, चिकित्सक, धनराशि आदि की कमी से मरीजों को जूझना पड़ता है।
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यहां केवल चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्स, सुविधाएं ही नहीं बढ़ेंगी बल्कि कई ऐसे ग्रांट भी बढ़ेंगे जो एम्स की तुलना में आधे से भी बहुत कम हैं। इसके अलावा गुणवत्तायुक्त शिक्षा, रिसर्च-इनोवेशन को भी बढ़ावा मिलेगा। जिसका तात्कालिक लाभ यहां छात्रों, शिक्षकों को मिलेगा लेकिन सबसे अधिक लाभ इलाज कराने वाले मरीजों को मिलेगा।
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बीएचयू के साथ ही आईएमएस के लिए चार अगस्त का दिन ऐतिहासिक हो गया। संस्थान के खुलने के बाद उपलब्ध संसाधनों में अब तक तो किसी तरह काम चला लेकिन जिस तरह का प्लान तैयार किया गया है और कमियां खोजकर बाहर निकाली गई, उसके पूरा होते ही यह संस्थान और भी संस्थानों के लिए मिसाल बन जाएगी।
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इसमें 27 नए विभाग खुलने, जांच के उपकरण आने, भर्तियों, बेड बढ़ाने आदि को लेकर तीन साल का एक्शन प्लान बनाया गया है। इसके अलावा सात साल का स्ट्रेटजिक प्लान और 15 साल का विजन प्लान बनाया गया है। इसके आधार पर ही शिक्षा और शोध का खाका तैयार होगा।
शोध और इनोवेशन के बारे में समय-समय पर वीडियो, टेली कांफ्रेंसिंग, एम्स में अत्याधुनिक सुविधाओं के बारे में भी अदान-प्रदान होता रहेगा। वर्तमान में एम्स की तुलना में आईएमएस में उपलब्ध संसाधनों पर नजर डाला जाए तो बहुत कम है। जैसे-तैसे काम चल रहा था और यही वजह है कि यहां बेड, चिकित्सक, धनराशि आदि की कमी से मरीजों को जूझना पड़ता है।
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आईएमएस और एम्स में संसाधन का आंकड़ा
एम्स
कार्यक्रम के बाद केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने ट्वीट कर इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि बीएचयू की टीम तीन साल में एक्शन प्लान, सात साल में रणनीतिक प्लान और 15 साल में विजन प्लान के जरिए गुणवत्ता शिक्षा, शोध और पहल से देश का नेतृत्व करेगी। इस अनुबंध से शिक्षा और शोध में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने लिखा कि इससे विश्वस्तरीय मेडिकल संस्थान तैयार होगा। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी दो ट्विट से इस समारोह की जानकारी दी।
आईएमएस और एम्स में संसाधन का आंकड़ा
एम्स के पास आईएमएस के पास अंतर
कैपिटल ग्रांट(16-17) 1288 करोड़ कुछ नहीं 1288 करोड़
वेतन, अन्य मद 602 करोड़ 14 करोड़ 588 करोड़
बेड 2362 1899 463 बेड
खर्च 20 लाख प्रति बेड 02 लाख प्रति बेड 18 लाख प्रति बेड
(प्रति वर्ष ) (प्रति वर्ष) (प्रति वर्ष)
चिकित्सक 882 318 584
सीनियर रेजीडेंट 863 217 646
जूनियर रेजीडेंट 427 204 223
टेकनीकिल स्टॉफ 454 120 334
नॉन टेकनीकल 324 66 258
नर्सिंग स्टाफ 5622 1157 4565
पैरामेडिकल स्टाफ 2120 134 1986
आईएमएस और एम्स में संसाधन का आंकड़ा
एम्स के पास आईएमएस के पास अंतर
कैपिटल ग्रांट(16-17) 1288 करोड़ कुछ नहीं 1288 करोड़
वेतन, अन्य मद 602 करोड़ 14 करोड़ 588 करोड़
बेड 2362 1899 463 बेड
खर्च 20 लाख प्रति बेड 02 लाख प्रति बेड 18 लाख प्रति बेड
(प्रति वर्ष ) (प्रति वर्ष) (प्रति वर्ष)
चिकित्सक 882 318 584
सीनियर रेजीडेंट 863 217 646
जूनियर रेजीडेंट 427 204 223
टेकनीकिल स्टॉफ 454 120 334
नॉन टेकनीकल 324 66 258
नर्सिंग स्टाफ 5622 1157 4565
पैरामेडिकल स्टाफ 2120 134 1986