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BHU कोवैक्सीन शोध केस: पांच साल में नौ और पांच महीने में पब्लिश करा लिए चार रिसर्च पेपर; पढ़ें- पूरा मामला

Thu, 23 May 2024 11:11 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Thu, 23 May 2024 11:11 AM IST
सार

बीएचयू में कोवैक्सिन पर हुए शोध में गड़बड़ी के बाद से परत-दर-परत नए मामले सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में एक मामला ये भी सामने आया कि जीरियाट्रिक विभाग के अध्यक्ष व उनकी पत्नी ने पांच साल में नौ और पांच महीने में चार रिसर्च पेपर पब्लिश करा लिए। 

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IMS BHU Covaxin research case Nine research papers published in five years and four in five months
IMS BHU - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आईएमएस बीएचयू में कोवैक्सीन पर हुए शोध पर उठे सवाल के साथ उसमें कई नई अहम चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इसी मामले में एक नई बात सामने ये आई है कि आईएमएस के जीरियाट्रिक विभाग के अध्यक्ष प्रो. शंखशुभ्र चक्रवर्ती और फार्माकोलॉजी विभाग की डॉ. उपिंदर कौर दोनों पति-पत्नी हैं। दोनों ने एक दो नहीं बल्कि कोरोना और कोविड वैक्सीन पर पिछले पांच साल में नौ रिसर्च पेपर का प्रकाशन कराया है। जबकि पांच महीने में चार रिसर्च पेपर पब्लिश करा लिए।

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2020 में जब कोरोना ने भारत में दस्तक दी, उसके कुछ महीने बाद ही कोरोना वैक्सीन पर प्रो. एसएस चक्रवर्ती ने अपना आधा अधूरा शोध उसी साल जून और सितंबर में पब्लिश करा लिया। जबकि साल 2021 में जुलाई, अगस्त, सितंबर और नवंबर में भी रिसर्च पेपर पब्लिश कराए। यानी पब्लिकेशन की संख्या बढ़ाने के लिए उन्होंने पांच महीने में लगातार चार पेपर पब्लिश करा लिए। इसके साथ ही जुलाई 2022, जनवरी 2023 और जनवरी 2024 में भी जो पेपर प्रकाशित हुए हैं, उसमें प्रो. चक्रवर्ती और डॉ. कौर दोनों के नाम शामिल हैं।

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कोवैक्सीन के दुष्प्रभाव पर प्रकाशित शोध के मामले में आईएमएस की ओर से गठित जांच कमेटी में अलग-अलग पब्लिकेशन को शामिल किया गया है। सभी रिसर्च पेपर में दोनों के नाम शामिल हैं। तीन में आईसीएमआर, बीएचयू इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस और दो में हरियाणा स्थित महर्षि मार्कण्डेयश्वर यूनिवर्सिटी (डीम्ड) जैसे शैक्षणिक संस्थान का भी सहयोग मिला है।

कोवैक्सीन पर दुष्प्रभाव वाले शोध की आईएमएस के स्तर पर गठित जांच कमेटी अपनी जांच कर रही है। प्रथम दृष्टया तथ्यों की कमी, मरीजों से टेलीफोन पर बात कर जानकारी लेने, बिना आईसीएमआर की स्वीकृति के नाम जोड़ने और आईएमएस की एथिकल कमेटी से अप्रूवल न लेने का मामला सामने आया है।

नया मामला यह है कि प्रो. चक्रवर्ती ने जो शोध किया है, उसमें अन्य सदस्यों के साथ ही डॉ. उपिंदर कौर को शामिल किया है और डॉ. उपिंदर उनकी पत्नी हैं। खास बात यह है कि साल 2020 में दो और 2021 में सर्वधिक चार रिसर्च पेपर का प्रकाशन कराया गया। इस बारे में पूछे जाने पर प्रो. चक्रवर्ती का कहना है कि वह और उनकी पत्नी डॉ. उपिंदर ने नियम के अनुसार शोध किया है। सभी गाइडलाइन का पालन किया गया है।

आईएमएस निदेशक के सामने मानी गलती, मिली चेतावनी

जांच के बीच ही प्रो. एसएस चक्रवर्ती बाहर चले गए थे। मंगलवार को वह वाराणसी लौटे। बुधवार को आईएमएस निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने प्रो. चक्रवर्ती और उनकी पत्नी डॉ. उपिंदर कौर दोनों को तलब किया। निदेशक ने बताया कि दोनों ने शोध पर उठ रहे सवाल के बाबत चल रही जांच में तथ्यों की कमी समेत अन्य खामियों पर अपनी गलती मानी है। इस दौरान आईएमएस के डीन रिसर्च प्रो. गोपाल नाथ भी मौजूद रहे। दोनों को चेतावनी दी गई है कि भविष्य में कोई भी शोध करें तो उसके बारे में पहले निर्धारित कमेटी को विस्तार से बताना होगा। इसके बाद स्वीकृति मिलने पर ही शोध कार्य आगे बढ़ाएं।

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