PG की सीट बढ़ाने की मांग: धरने पर अड़े हैं BHU आयुर्वेद संकाय के छात्र, अब दीवारों पर चस्पा किए पोस्टर
पीजी की सीट बढ़ाने की मांग को लेकर आयुर्वेद संकाय बीएचयू के छात्र बीते सात दिन से धरना दे रहे हैं। गुरुवार को छात्रों ने दीवारों पर पोस्टर चस्पा कर अपनी नाराजगी जाहिर की।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आईएमएस बीएचयू में अपनी मांगों के न पूरा होने के विरोध में एक बार फिर से छात्र पोस्टर चस्पा करने लगे हैं। पीजी (स्नातकोत्तर) में सीट वृद्धि की मांग को लेकर कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठे आयुर्वेद संकाय के छात्रों ने दीवारों पर पोस्टर चस्पा कर अपनी नाराजगी जाहिर की। इसमें विश्वविद्यालय प्रशासन पर मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही रैली निकालकर नारेबाजी भी की।
आयुर्वेद संकाय में पीजी सीट वृद्धि की छात्रों की मांग पर विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच रार बढ़ती जा रही है। कुलपति आवास के सामने सड़क जाम कर छात्रों के धरना देने की वजह से मालवीय भवन से एलडी गेस्ट हाउस जाने वाली सड़क पर आवागमन भी ठप है।
मांगें पूरी न होने तक जारी रहेगा आंदोलन
गुरुवार को छात्रों ने आईएमएस बीएचयू सहित परिसर में अलग-अलग जगहों पर पोस्टर चस्पा कर अपनी मांग पूरी न होने पर नाराजगी जाहिर की। हाथ में बैनर और पोस्टर लेकर रैली निकाली। रैली कुलपति आवास से निकलकर आईएमएस गेट, केएन उड्डुप्पा, मधुबन, महिला महाविद्यालय होते हुए कुलपति आवास पर आकर समाप्त हुआ। छात्रों ने चेतावनी दी मांगें पूरी न होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
दीक्षांत समारोह से पहले विरोध में उतरे छात्र
बीएचयू में 10 दिसंबर को होने वाले 102वें दीक्षांत समारोह से पहले छात्रों का विरोध शुरू हो गया है। गुरुवार को केंद्रीय कार्यालय पर छात्र कुलपति से मिलने पहुंचे। जब कुलपति से नहीं मिल पाए तो विरोध में छात्रों ने बाहर प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाया।
प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से दीक्षांत को लेकर पिछले महीने छह सितंबर को जारी आदेश में 2019-20 और 2020-21 में पास होने वाले छात्र-छात्राओं को दीक्षांत समारोह में उपाधि नही देने की बात सामने आई है। इसमें 2021-22 वाले छात्रों को समारोह में मेडल, डिग्री दोनों देने का जिक्र है। इसको लेकर छात्रों ने जमकर नारेबाजी भी की। उनका कहना था कि दीक्षांत समारोह में उपाधि पाना सभी छात्र का सपना होता है लेकिन विश्वविद्यालय ने भेदभाव किया है।