फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Improved seeds of paddy will be ready in bright light

सतरंगी रोशनी में तैयार होंगे धान के उन्नत बीज

Wed, 29 Sep 2021 01:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 29 Sep 2021 01:27 AM IST
विज्ञापन
Improved seeds of paddy will be ready in bright light
अगले दो माह बाद चांदपुर के भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) में धान की उन्नत प्रजाति के किस्मों पर शोध सतरंगी रोशनी में होंगे। इसके लिए इरी में तीन करोड़ रुपये की लागत से बीते सात माह में आधुनिक स्पीड ब्रीडिंग प्रयोगशाला का निर्माण किया गया है, जो नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) की तकनीक से प्रेरित है। इस तकनीक का उपयोग अमेरिका के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में सब्जी उगाने के लिए किया था।
विज्ञापन

वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्नत और नई किस्म की प्रजातियों पर जो शोध 12 साल में हो पाता था, उसमें अब सिर्फ छह साल लगेंगे। इसका सीधा फायदा भारत समेत दक्षिण एशिया के कई देशों को होगा। प्रयोगशाला का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। बिजली और पानी सप्लाई को लेकर कुछ तकनीकी काम बाकी है। जिसे अगले महीने तक पूरा कर लिया जाएगा। खास बात यह है कि प्रयोगशाला का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर सकते हैं। इरी के एक वैज्ञानिक ने बताया कि धान की प्रजातियों के क्रास के बाद उन्नत किस्म और पोषक युक्त बीज के परीक्षण के लिए अब तक साल में एक से दो बार ही अनुकूल मौसम मिलता था। स्पीड ब्रीडिंग प्रयोगशाला बनने से पूरे साउथ एशिया के मौसम के अनुकूल धान के बीजों पर साल में छह बार शोध किया जा सकेगा।
विज्ञापन

17 हजार प्रजातियां रोपीं जाएंगी
प्रयोगशाला में बने दो बड़े और छह छोटे चेंबरों में क्रास की गई 17 हजार धान की प्रजातियों को रोपा जाएगा। जिनका विकास प्राकृतिक नहीं बल्कि कृत्रिम रूप से तैयार रोशनी, हवा, पानी से किया जाएगा। साधारण तौर पर पौधों के विकास में जिस तरह से सूरज की रोशनी में एक साथ सात रंग (लाल, हरा, नीला, पीला, बैगनी, आसमानी और नारंगी) खुली हवा, उमस, बारिश और बोरिंग के पानी का योगदान होता है। इसके विपरीत प्रयोगशाला में स्वीडन और जापान से लगाई गई एक से डेढ़ लाख रुपये की स्पेक्ट्रम लाइट (सतरंगी लाइट) के माध्यम से पौधों का विकास किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

वर्जन
दुनिया भर में धान की कई प्रजातियों पर शोध चल रहा है। 50 प्रतिशत में तो इरी शोध कर रहा है। चावल को शुगर फ्री करने, प्रोटीन, जिंक, आयरन जैसे पोषक तत्वों में वृद्धि का शोध चल रहा है। इसे गति देने के लिए स्पीड ब्रीडिंग प्रयोगशाला को तैयार किया गया। निर्माण हो चुका है। फिनिशिंग चल रही है। अगले माह प्रधानमंत्री मोदी उद्घाटन कर सकते हैं।
- डॉ. सुधांशु सिंह, निदेशक, इरी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed