वाराणसीः औषधि विभाग की कार्रवाई के विरोध में आईएमए ब्लड बैंक बंद, खून तस्करी मामले में पड़ा था छापा
आईएमए अधिकारियों का कहना है कि आरोपी कर्मचारी को शक के आधार पर 16 जुलाई को बर्खास्त किया जा चुका है। इसके बाद आईएमए भी पर बिना कागजातों के ब्लड बेचे जाने का आरोप लगाना गलत है।
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चंदौली के बबुरी मोड़ के पास चार दिन पहले खून की तस्करी करने वाले एक व्यक्ति के पकड़े जाने और तस्करी में आईएमए में कार्यरत कर्मचारी का नाम सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बृहस्पतिवार को जहां औषधि विभाग की टीम ने आईएमए (वाराणसी शाखा) पर छापा मारकर यहां से बिना कागजातों के ब्लड बेचे जाने की रिपोर्ट दी थी। वहीं औषधि विभाग की इस कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए आईएमए पदाधिकारियों ने अगले आदेश तक ब्लड बैंक को बंद कर दिया है।
इस वजह से शुक्रवार को ब्लड लेने आए मरीजों के परिजनों को निराश लौटना पड़ा। आईएमए अध्यक्ष डॉक्टर मनीषा सिंह, सचिव डॉक्टर आरएन सिंह का कहना है कि आनंद नाम के जिस कर्मचारी का नाम इस मामले में आ रहा है, उसे पहले ही 16 जुलाई को शक के आधार पर बर्खास्त किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि बृहस्पतिवार को जांच करने आई टीम को मौके पर पूरा रिकॉर्ड भी दिखाया गया। इसके बाद भी आईएमए पर बिना कागजातों के ब्लड बेचे जाने का आरोप लगाना गलत है। इस बारे में औषधि विभाग के उच्च अधिकारियों को भी जानकारी दी जा चुकी है। आईएमए की ओर से जांच में भी पूरा सहयोग किया जा रहा है।
फिलहाल अगले आदेश तक ब्लड बैंक से मरीजों को ब्लड देना बंद किया गया है। जब तक औषधि विभाग की ओर से कार्रवाई पूरी नहीं की जाती है तब तक मरीजों को ब्लड नहीं दिया जाएगा। इधर, वाराणसी के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन ब्लड बैंक के बाहर बैठे रहे कि उन्हें किसी तरह ब्लड मिल सके।
मामले में औषधि निरीक्षक सौरभ दुबे ने कहा कि आईएमए में जांच के मामले में नियमानुसार रिपोर्ट की गई है। अगर आईएमए ने पहले ही संबंधित कर्मचारी को निकाल दिया था तो फिर ब्लड बैंक से कैसे ब्लड का बैग निकला। फिलहाल आईएमए को पूरे मामले में जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। हमने जो किया वो सही किया।