UP: पूर्वांचल की नदियों को बचाने के लिए तकनीक सुझाएगा IIT BHU, ऐसे काम करेगा 3डी मॉडलिंग और यूएवी
IIT BHU: आगामी 30 अक्तूबर को आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 30 से ज्यादा नदियों पर चर्चा होगी। इनके संरक्षण पर बातचीत की जाएगी। छोटी नदियों में उभरते प्रदूषकों की मॉनिटरिंग पर भी सुझाव दिए जाएंगे।
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Varanasi News: आईआईटी बीएचयू पूर्वांचल की नदियों को सुरक्षित रखने के लिए तकनीक सुझाएगा। आईआईटी बीएचयू में 30 अक्तूबर से पूर्वांचल की 30 से ज्यादा छोटी नदियों के संरक्षण लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू होगा नदी स्वास्थ्य: पुनर्स्थापन के लिए मूल्यांकन की थीम पर होने वाला यह सम्मेलन का चौथा संस्करण है।
इसमें तीन दिनों तक आईआईटी बीएचयू पूर्वांचल की नदियों को संरक्षित करने के लिए तकनीक पर बात होगी। 3डी मॉडलिंग और यूएवी आधारित तकनीक को भी लागू किया जाएगा। वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट, डेटा कलेक्शन और मॉनिटरिंग के लिए उन्नत उपकरण और तकनीकों का प्रयोग, छोटी नदियों के पुनरुद्धार के लिए भूजल प्रबंधन, डिसीजन सपोर्ट सिस्टम, छोटी नदियों में उभरते प्रदूषकों की मॉनिटरिंग और उनके उपचार की चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी।
तकनीक पर होगा काम
साथ ही डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, इटली सहित कई यूरोपीय और अमेरिकी देशों से आने वाले जल वैज्ञानिक अपने अपने देशों की नदियों के संरक्षण की तकनीक को साझा करेंगे। इस सम्मेलन की रिपोर्ट को सरकारी नीति, कार्यक्रमों आदि में भी रखे जाएंगे। सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से ये कार्यक्रम कराया जाएगा।
इसके अलावा जल की गुणवत्ता को चेक करने के लिए रियल टाइम ट्रैकिंग, प्रदूषण या आवास ढहने से बचाने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणालियां और शहरी जल निकासी के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्मार्ट आईओटी आधारित निगरानी प्रणालियां विकसित की जाएंगी।
नदियों के जैविक संकेतक की पहचान कर उनकी जैव-निगरानी की जाएगी। इस कार्यक्रम के लिए विभाग से संयोजक प्रो. पीके सिंह, डॉ. अनुराग ओहरी और डॉ. शिशिर गौर समेत कई वैज्ञानिक तैयारियों को अंतिम रूप दे चुके हैं। इसमें नदियों के संरक्षण से जुड़े कई स्टॉल लगेंगे जहां पर तकनीक की प्रदर्शनी होगी।