IIT BHU: PhD छठे वर्ष के छात्रों को मिलेगा 20 हजार का स्टायपेंड, लैब ड्यूटी, बीटेक, एमटेक में देंगे ट्रेनिंग
आईआईटी बीएचयू में स्टायपेंड की व्यवस्था देकर छात्रों को प्रोत्साहित किया जाएगा।आवश्यकतानुसार, छात्रों का अस्थायी चयन करना होगा। इसके लिए प्रबंधन सारी तैयारियां कर चुका है।
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IIT BHU: आईआईटी बीएचयू में अर्न टू लर्न स्कीम चलाई गई है। इसके तहत छठे वर्ष में पीएचडी कर रहे छात्रों को 20 हजार महीने की स्टायपेंड की व्यवस्था है। ये सीनियर रिसर्च स्कॉलर्स न्यू एडमिशन लिए पीएचडी छात्रों के लिए लैब ड्यूटी और बीटेक और एमटेक छात्रों को ट्रेनिंग देते हैं।
जब भी कोई छात्र पीएचडी में जॉइन करता है तो उसको मंत्रालय की ओर से एक असिस्टेंटशिप मिलती है, लेकिन पांच साल के बाद ये बंद हो जाता है। आईआईटी-बीएचयू की ओर से सेल्फ फंड से इसकी शुरुआत की गई है। इसके तहत जिन छात्रों की पांच साल में पीएचडी पूरी नहीं हो पा रही है तो उन छात्रों को ये असिस्टेंटशिप दी जाएगी।
ये व्यवस्था एक साल या फिर पीएचडी थीसिस सबमिट होने तक लागू रहेगी। इसमें से जो भी जल्दी पूरा हो। इसको पाने के लिए छात्रों को अपना थीसिस प्लान भी दिखाना होगा। बिना काम दिखाए ये फायदा नहीं मिलेगा। इसमें बताना होगा कि रिसर्च थीसिस में क्या-क्या काम हो चुका उसे दिखाना होगा और कितना काम करना अभी बाकी उसकी भी डिटेल देनी है। लैब में ड्यूटी देते हुए छात्रों को सिखाते हैं।
एंपॉवर्ड कमेटी लेगी अंतिम फैसला
आईआईटी-बीएचयू के विभागों, स्कूलों और केंद्रों को हर सेमेस्टर से पहले डीन अकादमिक मामलों (डीओएए) को अपनी जरूरतें प्रस्तुत करनी होंगी। इसके बाद संभावित छात्रों से आवेदन आमंत्रित किया जाएगा। आवश्यकतानुसार, छात्रों का अस्थायी चयन करना होगा। इसकी अंतिम मंजूरी संस्थान की एक एंपॉवर्ड कमेटी द्वारा दी जाएगी। आईआईटी-बीएचयू उन छात्रों को इस स्कीम का फायदा नहीं देगा, जो पहले से ही किसी प्रोजेक्ट में कार्यरत हैं।