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Exclusive: आईआईटी बीएचयू देश पहला तकनीकी संस्थान, जहां हिंदी में भी थीसिस का सारांश
Wed, 26 Feb 2025 04:45 PM IST
प्रगति चंद
हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला, वाराणसी।
हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Wed, 26 Feb 2025 04:45 PM IST
सार
आईआईटी बीएचयू देश पहला तकनीकी संस्थान होगा, जहां हिंदी में भी पीएचडी थीसिस का सारांश होगा। संस्थान में सीनेट की बैठक में राजभाषा प्रकोष्ठ का ये प्रस्ताव पास हो गया है। अब रिसर्च स्कॉलर्स हिंदी में शोध सार लिखेंगे।
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IIT BHU
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आईआईटी बीएचयू में अब पीएचडी थीसिस का सारांश (एब्सट्रैक्ट) हिंदी में भी प्रस्तुत किया जा सकेगा। ऐसी व्यवस्था लाने वाला आईआईटी बीएचयू का देश पहला तकनीकी संस्थान बन गया है। छात्रों को विकल्प दिया गया है कि वे चाहें तो हिंदी या इंग्लिश दोनों में से किसी भी भाषा में अपने शोध का सारांश प्रस्तुत कर सकते हैं। ये व्यवस्था इसी सत्र से लागू हो गई है।
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आईआईटी बीएचयू के कई विभागों के पीएचडी धारकों ने हिंदी में शोध सार लिखने में रुचि दिखाई है। इंजीनियरिंग और तकनीक की भाषा इंग्लिश ही होती है, ये अनिवार्यता अब नहीं होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इंग्लिश के साथ हिंदी में भी किसी रिसर्च का सार प्रस्तुत करने की बात कही गई है। ऐसे में आईआईटी बीएचयू ने देश में इसकी पहल की है। वहीं, आईआईटी बीएचयू एकमात्र ऐसा संस्थान भी है जहां पर कार्यालय का 80 फीसदी काम हिंदी में किया जा रहा है।
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सितंबर 2024 में आईआईटी बीएचयू के डायरेक्टर प्रो. अमित पात्रा के निर्देशन में हुई सीनेट की बैठक में राजभाषा प्रकोष्ठ के इस प्रस्ताव को पारित किया गया था। सभी सदस्यों ने इस पर पूर्ण सहमति जताई और अब विभागों को भी सर्कुलर जारी कर दिया गया है। पत्र में इसका उल्लेख किया गया है कि जो छात्र हिंदी में सारांश लिखने के इच्छुक हों, वे आगे आ सकते हैं।
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आम आदमी भी समझ सकेगा आईआईटी का कठिन शोध
एक पीएचडी छात्र का कहना है कि पिछले 3 से 5 साल तक यहां पर एआई, क्वांटम और गैलेक्सी समेत कई टॉपिक पर रिसर्च किए गए हैं। हिंदी में इनका सारांश लिखना बड़ी चुनौती होगी, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो ये काफी सहज होगा। इंजीनियरिंग के कठिन से कठिन शब्दावलियों और परिभाषाओं को आम आदमी भी समझ सकेगा।
एक पीएचडी छात्र का कहना है कि पिछले 3 से 5 साल तक यहां पर एआई, क्वांटम और गैलेक्सी समेत कई टॉपिक पर रिसर्च किए गए हैं। हिंदी में इनका सारांश लिखना बड़ी चुनौती होगी, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो ये काफी सहज होगा। इंजीनियरिंग के कठिन से कठिन शब्दावलियों और परिभाषाओं को आम आदमी भी समझ सकेगा।
हिंदी में भी चलती हैं बीटेक पहले साल की कक्षाएं
वर्ष 2021 में शिक्षा मंत्रालय की ओर से आईआईटी बीएचयू में बीटेक पाठ्यक्रम के हिंदी में पठन-पाठन कराने की व्यवस्था लागू की गई थी। बीटेक पहले साल में हिंदी के लेक्चर लेने का फैसला करने वाला आईआईटी बीएचयू देश का पहला संस्थान बना था। कई विभागों के लैब मैनुअल अंग्रेजी के साथ ही हिंदी में बनाए गए हैं। मंत्रालय स्तर पर इंजीनियरिंग की किताबों का अनुवाद चल रहा है। एआईसीटीई और एनसीईआरटी की ओर से हिंदी सिलेबस तैयार किया जा रहा है। इसके बाद ये सिलेबस संस्थानों को भेजे जाएंगे।
वर्ष 2021 में शिक्षा मंत्रालय की ओर से आईआईटी बीएचयू में बीटेक पाठ्यक्रम के हिंदी में पठन-पाठन कराने की व्यवस्था लागू की गई थी। बीटेक पहले साल में हिंदी के लेक्चर लेने का फैसला करने वाला आईआईटी बीएचयू देश का पहला संस्थान बना था। कई विभागों के लैब मैनुअल अंग्रेजी के साथ ही हिंदी में बनाए गए हैं। मंत्रालय स्तर पर इंजीनियरिंग की किताबों का अनुवाद चल रहा है। एआईसीटीई और एनसीईआरटी की ओर से हिंदी सिलेबस तैयार किया जा रहा है। इसके बाद ये सिलेबस संस्थानों को भेजे जाएंगे।