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यूनिक होगा पूर्वांचल एक्सप्रेस वे, मॉडल तैयार कर रहा आईआईटी बीएचयू
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 14 Apr 2017 10:52 AM IST
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एक्सप्रेस वे
- फोटो : demo
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राजधानी लखनऊ से बलिया को जोड़ने वाले प्रस्तावित पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का मॉडल आईआईटी बीएचयू तैयार कर रहा है। आठ लेन वाले इस एक्सप्रेस-वे से पूर्वांचल के कई जिले जुड़ेंगे। इसका प्राथमिक मॉडल तैयार करने के लिए इंडस्ट्रियल एंड अथॉरिटी ने आईआईटी बीएचयू से भी सहयोग मांगा है।
आधारभूत ढांचे के अलावा यातायात अभियांत्रिकी के नजरिए से आईआईटी अपना सुझाव प्रस्तावित करेगा।
लखनऊ, आजमगढ़ से बलिया को जोड़ने वाला पूर्वांचल एक्सप्रेस वे करीब 343 किलोमीटर प्रस्तावित है।
लखनऊ से बलिया तक के इस एक्सप्रेस वे में बाराबंकी, सुल्तानपुर, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर को जोड़ा जाना है। इसका मॉडल डिजाइन तैयार करने के लिए आईआईटी बीएचयू से संपर्क किया गया है।
सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. बृंद कुमार ने बताया कि एक्सप्रेस वे कहां किस पुल, नदी, नाले से गुजरेगा, कहां कहां ओवरब्रिज बनेंगे, एंट्री प्वाइंट के लिहाज से एक्सप्रेस वे में कहां, कितना मैटेरियल इस्तेमाल करना है, इसका प्रस्तावित खाका तैयार करने को कहा गया है।
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प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिया गया है। इसमें अभी समय लगेगा।
गौरतलब है कि बाबतपुर एयरपोर्ट में मौजूदा समय में हो रहा रन-वे की डिजाइनिंग भी आईआईटी बीएचयू के सिविल इंजीनियरिंग द्वारा की गई है। रन-वे बनाने में इस्तेमाल किया जाना वाला मैटेरियल आईआईटी द्वारा ही प्रस्तावित किया गया है।
इसके अलावा लखनऊ एयरपोर्ट के रनवे की डिजाइन तैयार करने का काम भी आईआईटी बीएचयू को दिया गया है। वहीं एयरफोर्स ने अपने आठ एयरपोर्ट बनाने का जिम्मा भी आईआईटी के सिविल इंजीनियरिंग को दिया गया है।
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आधारभूत ढांचे के अलावा यातायात अभियांत्रिकी के नजरिए से आईआईटी अपना सुझाव प्रस्तावित करेगा।
लखनऊ, आजमगढ़ से बलिया को जोड़ने वाला पूर्वांचल एक्सप्रेस वे करीब 343 किलोमीटर प्रस्तावित है।
लखनऊ से बलिया तक के इस एक्सप्रेस वे में बाराबंकी, सुल्तानपुर, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर को जोड़ा जाना है। इसका मॉडल डिजाइन तैयार करने के लिए आईआईटी बीएचयू से संपर्क किया गया है।
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सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. बृंद कुमार ने बताया कि एक्सप्रेस वे कहां किस पुल, नदी, नाले से गुजरेगा, कहां कहां ओवरब्रिज बनेंगे, एंट्री प्वाइंट के लिहाज से एक्सप्रेस वे में कहां, कितना मैटेरियल इस्तेमाल करना है, इसका प्रस्तावित खाका तैयार करने को कहा गया है।
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प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिया गया है। इसमें अभी समय लगेगा।
गौरतलब है कि बाबतपुर एयरपोर्ट में मौजूदा समय में हो रहा रन-वे की डिजाइनिंग भी आईआईटी बीएचयू के सिविल इंजीनियरिंग द्वारा की गई है। रन-वे बनाने में इस्तेमाल किया जाना वाला मैटेरियल आईआईटी द्वारा ही प्रस्तावित किया गया है।
इसके अलावा लखनऊ एयरपोर्ट के रनवे की डिजाइन तैयार करने का काम भी आईआईटी बीएचयू को दिया गया है। वहीं एयरफोर्स ने अपने आठ एयरपोर्ट बनाने का जिम्मा भी आईआईटी के सिविल इंजीनियरिंग को दिया गया है।
पूर्वांचल भर से आते हैं सैंपल
आईआईटी बीएचयू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. बृंद कुमार ने बताया कि पूर्वांचल भर से उनके पास सड़कों के नमूने परीक्षण के लिए आते हैं। ज्यादातर नमूनों में पाया गया है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता परक मैटेरियल का इस्तेमाल नहीं किया गया है। निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई है।
बताया कि नमूनों के परीक्षण में दो सप्ताह का वक्त लगता है। नमूने आने के बाद करीब 20-25 दिनों में उसकी रिपोर्ट भेज दी जाती है।
बताया कि नमूनों के परीक्षण में दो सप्ताह का वक्त लगता है। नमूने आने के बाद करीब 20-25 दिनों में उसकी रिपोर्ट भेज दी जाती है।