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Education: आईआईटी के एलुमनाई बच्चों को पढ़ा रहे संस्कारों का पाठ, पूजन की विधियों की भी दे रहे शिक्षा

Sat, 08 Jun 2024 07:14 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 08 Jun 2024 07:14 PM IST
सार

Varanasi News: इस्काॅन मंदिर में पूरे साल संस्कार की कक्षाएं चलती हैं। मुरारी गुप्त दास ने बताया कि हर रविवार को इसकी कक्षा संचालित होती है। इसमें भी पांच से 15 साल के बच्चों को सिखाया जाता है, ताकि उनको सनातन से जोड़ा जा सके।

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IIT-BHU alumni teaching children about values and methods of worship
इस्कॉन मंदिर में लगे संस्कार शिविर में प्रशिक्षण लेते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इस्कॉन मंदिर में बच्चों में संस्कारों के बीज रोपे जा रहे हैं। उन्हें सोलह संस्कार, पूजन विधियां सिखाई जा रही हैं। साथ ही देवों की गाथा और कहानियाें के जरिये उन्हें संस्कारवान बनाने की पहल की जा रही है। उन्हें सृष्टि के मूल आधार यानी पृथ्वी, हवा, जल और अग्नि के महत्व भी बताए जा रहे हैं। और ये नेक काम कर रहे हैं आईआईटी बीएचयू और खड़गपुर के पुरातन छात्र।

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बच्चों पर पाश्चात्य संस्कृतियों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। इसको देखते हुए दुर्गाकुंड स्थित इस्काॅन मंदिर में संस्कृति और संस्कार शिविर लगाया गया है। इस शिविर में संस्कारों की नर्सरी तैयारी की जा रही है। इसमें 100 से अधिक बच्चे शामिल हैं। उन्हें पारिवारिक और सामाजिक शिष्टाचार के साथ सनातनी परंपराओं की शिक्षा दी जा रही है। 
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मंदिर के व्यवस्थापक प्रभारी मुरारी गुप्त दास ने बताया कि संस्कारों से जुड़ी हर तरह की शिक्षा बच्चों को दी जा रही है। एक सप्ताह के शिविर में उनको खेल-खेल में धर्म, संस्कृति और संस्कारों के बारे में बताया जा रहा है। आरती, पूजा, श्लोक, कीर्तन, मंत्र-जप का अभ्यास कराया जाता है। पौराणिक कहानियां सुनाई जा रही हैं। मोबाइल से दूरी बनाने के साथ ही योगा, मेडिटेशन भी कराया जा रहा है।
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सुनें इनकी
हमें इस शिविर में हमारी संस्कृति और सभ्यता के बारे में जानकारी मिल रही है। ऐसे शिविर और लगने चाहिए। अभी तक हम श्लोक, तुलसी आरती, पूजा आदि के बारे में जान चुके हैं। - वृद्धि और राघव, महमूरगंज


ये दे रहे हैं प्रशिक्षण
खड़पुर आईआईटी के अच्युत मोहन दास, बीएचयू आईआईटी के एल्युमनाई रामकेशव दास के अलावा साक्षी मुरारी दास, रसिक गोविंद दास, रामप्यारे दास, मिली डिडवानिया बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।

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