आईआईटी दीक्षांत: करोड़ों के पैकेज वाले 72 मेधावियों को 123 पदक, 1995 को मिलीं छह तरह की उपाधियां
IIT BHU 14th Convocation: आईआईटी बीएचयू के 14वें दीक्षांत समारोह में इंजीनियर और व्यवसायी बन चुके 62 मेधावियों को 123 पदक और 1995 को छह तरह की उपाधियां मिलीं।
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आईआईटी बीएचयू के 14वें दीक्षांत समारोह में 62 मेधावियों को कुल 123 पदक (स्वर्ण और रजत) और पुरस्कार दिए गए। इनमें से करीब 50 मेधावी तो अब लाखों-करोड़ों के व्यवसायी या वर्किंग इंजीनियर बन चुके हैं। स्वतंत्रता भवन के मंच पर केमिकल इंजीनियरिंग सहित सभी 21 ब्रांच की टॉपर अनन्या सिंह को प्रेसिडेंट मेडल सहित सबसे ज्यादा 14 पदकों के साथ ही 17 पुरस्कार मिले। कुल 123 पदक देने में तो 28 मिनट लगे। वहीं अनन्या के मेडल की गिनती दो मिनट तक चलती ही रही। जबकि बाकियों में सिर्फ 10 से 15 सेकंड का समय ही लग रहा था।
14 पदकों के साथ जब अनन्या मंच से उतरीं तो भी लोगों की तालियां नहीं रुकीं। एक के बाद एक कुल 62 टेक्नोसेवी को इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन मेडल पहनाते रहे। वहीं निदेशक प्रो. अमित पात्रा और कुलसचिव सुमित कुमार बिस्वास ने सभी को उपाधि देकर तस्वीरें खिचवाईं।
इस दौरान दूसरा बड़ा उत्साह दिखा जब गणितीय विज्ञान विभाग के आईडीडी छात्र आदित्य कुलकर्णी और सिविल अभियंत्रण विभाग के बीटेक छात्र सुयश विजय को डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। बृहस्पतिवार को पूरे दिन उत्तीर्ण 1995 छात्र-छात्राओं को बीटेक-एमटेक सहित कुल 6 तरह की उपाधियां दी गईं।
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देश भर की कई मल्टी नेशनल कंपनियों में टेक्निकल हेड और इंजीनियर के तौर पर कार्यरत हैं। 100 से ज्यादा छात्रों के माता-पिता और पूरा परिवार भी आ गया था। स्वतंत्रता भवन सभागार में पहले तो एनाउंस हुआ कि आप लोग बाहर एलईडी के पास लगी कुर्सियों के पास बैठे, लेकिन बाद में उन्हें सभागार की बालकनी पर स्थान दे दिया गया। मेडल और उपाधि पाने के बाद मेधावियों ने सभागार के बाहर माता-पिता के साथ अपनी तस्वीरें खिंचवाईं।
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3 गरीब छात्रों को मिले 30 हजार
संस्थान में तीन गरीब छात्रों मेटलर्जी ब्रांच के कंबम हरीदेव, शशांक गौड़ और पीयूष रंजन को 10-10 हजार रुपये दिए गए। इनके परिवार की आय 5 लाख रुपये से कम होने के चलते इनका चयन किया गया था। साहिल को यूपी के पूर्व मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी के पिता के नाम पर आदित्य अवस्थी इंडोमेंट अवॉर्ड के तहत एक लाख रुपये दिए गए।
1 साल में 31 शिक्षकों की नियुक्ति, 330 करोड़ के 590 प्रोजेक्ट जारी
एक साल में 31 से ज्यादा नए शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। नई शिक्षा नीति के तहत स्नातक कोर्स के नए सिलेबस को इस साल जुलाई में लागू कर दिया गया। जुलाई के बाद प्रवेश लेने वालों के लिए मल्टी एग्जिट पॉइंट लागू किया गया। एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट सिस्टम को लागू किया गया। पीएचडी छात्र अपने डॉक्टरेट कार्यक्रम के दौरान विदेशी कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए 2 लाख तक का अनुदान प्राप्त कर सकते हैं। संस्थान में 330 करोड़ से ज्यादा के 590 प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। इस साल पहला एलुमनी चुनाव कराया गया। कुल 550 पुरा छात्र संस्थान से जुड़ चुके हैं। वहीं वैज्ञानिक खोजों और विकास के लिए एक साल में कुल 23 समझौते किए गए।
इतनी उपाधियां मिलीं
- बीटेक - 1090
- आईडीडी- 363
- एमटेक/एमफार्म - 282
- पीएचडी - 196
- एमएससी - 48
- बी.आर्क - 16
2025 के टॉप-10 मेडलिस्ट
- केमिकल इंजीनियरिंग की अनन्या सिंह - 14
- इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के सिद्धार्थ वर्साय - 5
- मैकेनिकल इंजीनियरिंग के नागेंद्र द्वारकानाथ - 4
- मैकेनिकल इंजीनियरिंग के कपिल सोनी - 4
- मेटलर्जिकल के साहिल छाबड़ा - 3
- माइनिंग इंजीनियरिंग के साहिल शर्मा - 3
- इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के मेहूल साहू - 3
- इंडस्ट्रियल केमेस्ट्री की मुस्कान रावत - 2
- सिरेमिक के अभियान कुमार - 2
आईआईटी बीएचयू में मेधावियों से बातचीत
आईआईटी बीएचयू के मैथमेटिकल एंड कंप्यूटिंग साइंसेज ब्रांच टॉपर रहे आदित्य कुलकर्णी को डायरेक्टर्स मेडल मिला। आदित्य का सपना सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में बेहतर काम करने का है। अमर उजाला से बातचीत में कहा कि इस समय क्लाउड स्टोरेज प्लेटफॉर्म बनाने वाली टीम के साथ काम कर रहा हूं। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया में क्लाउड स्टोरेज सिस्टम के लिए संस्थान से ही 51 लाख के पैकेज पर कैंपस प्लेसमेंट हुआ था। पुणे निवासी आदित्य कुलकर्णी ने आईडीडी (इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री) में सबसे बेहतर स्कोर पर उपलब्धि हासिल की। बातचीत में आदित्य ने कहा कि आईआईटी में रहने के दौरान काशी के मंदिर, घाट और यहां की जीवनशैली से बहुत कुछ सीखने को मिला। पिता गजानन कुलकर्णी पुणे में टाटा में डिवीजनल मैनेजर और मां अंजलि कुलकर्णी गृहिणी है। तर्क करने और कुछ नया करने की जिज्ञासा ने ही आगे बढ़ने की राह आसान की। गंगा आरती ने जीवन की अराजकता के बीच शांति और विश्वास करना सिखाया। आने वाले समय में शहर के आध्यात्म और आधुनिकता में मदद करूंगा।
स्टार्टअप के सहारे रोजगार देने वाला बनूंगा-सुयश विजय
दीक्षांत समारोह में डायरेक्टर्स मेडल पाने वाले सिविल इंजीनियरिंग के टॉपर सुयश विजय का कहना है कि वह आगे चलकर स्टार्टअप के सहारे रोजगार देने वाला बनना चाहते हैं। आईआईटी बीएचयू से बीटेक कर जर्मनी की ट्रैफिक इंजीनियरिंग पर 90 दिनों की इंटर्नशिप कर चुके सुयश विजय का कहना है कि स्टार्टअप के माध्यम से बड़ा बिजनेस सेटअप करना है। इससे नौकरियों की संभावनाएं बढ़ेंगी। जर्मनी में इंटर्नशिप के दौरान वहां की ट्रैफिक इंजीनियरिंग ने भारत में काम करने के नए पैंतरे सुझाए। कहा कि पिता सुरेश विजय रिटायर्ड सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर और मां रिटायर्ड शिक्षिका हैं। सुयश ने कहा कि प्राचीन नगरी काशी को कभी भूला नहीं जा सकता है। आज जब पढ़ाई पूरी हो गई तो ऐसा लगता है कि काशी विश्वनाथ की शयन आरती, अस्सी घाट की गंगा आरती, गंगा किनारे शाम गुजारना सब कुछ पीछे छूट गया।
आईआईटी में दीक्षांत समारोह में पदक पाने का सपना जो देखा था, वह पूरा हुआ। इस तरह की उपलब्धि से आगे के जीवन में नई जिम्मेदारियों से काम करने की प्रेरणा मिली है। संस्थान में रहकर धैर्य, अनुशासन के साथ काम करते रहने की सीख मिली है, यह अहम है। -डी नागेंद्र द्वारकानाथ, एमटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग
खनन अभियांत्रिकी के क्षेत्र में ही आगे काम करना है। इसी वजह से इंट्रीग्रेटेड ड्यूअल डिग्री (बीटेक-एमटेक) हासिल की है। जिस संस्थान से पढ़ाई की है, वहां गुरुओं, विद्यार्थियों के बीच में पदक पाना बड़ी उपलब्धि है। -श्रेया, आईडीडी
सिविल इंजीनियरिंग से बीटेक करने के बाद आगे चलकर साॅफ्टवेयर इंजीनियर बनना है। इस क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के माध्यम से बहुत कुछ नया करने का दायरा बढ़ता जा रहा है। पदक पाने के बाद अब नई ऊर्जा के साथ काम करना है। -सार्थक आनंद, बीटेक सिविल इंजीनियरिंग