आईआईटी बीएचयू का 10वां दीक्षांत समारोह: 58 मेधावियों में बंटे 84 मेडल, 1610 को मिली उपाधियां, इसरो के चेयरमैन ने किया संबोधित
आईआईटी बीएचयू के मेधावियों के लिए रविवार का दिन बहुत ही खास रहा। संस्थान के शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों के बीच स्वतंत्रता भवन में आयोजित दसवें दीक्षांत समारोह में उनके चेहरे दमक रहे थे।
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आईआईटी बीएचयू के 10वें दीक्षांत समारोह में रविवार को 58 मेधावियों को कुल 84 स्वर्ण पदक दिया गया। इसमें इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र कुशल टिबड़ेवाल को सर्वाधिक सात मेडल और चार पुरस्कार मिला। इसके अलावा बीटेक स्तर पर शैक्षणिक क्षेत्र में संस्थान स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेसीडेंट्स स्वर्ण पदक से भी सम्मानित किया गया। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के आरएडीएस अभिजित को पांच मेडल और तीन पुरस्कार मिला।
आईआईटी बीएचयू के मेधावियों के लिए रविवार का दिन बहुत ही खास रहा। संस्थान के शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों के बीच स्वतंत्रता भवन में आयोजित दसवें दीक्षांत समारोह में उनके चेहरे दमक रहे थे। ऐसा हो भी क्यों नहीं, उन्होंने जो सपना था, वह सच हुआ। जैसे ही समारोह में मंच पर बुलाकर उन्हें पदक दिया गया, सब खिलखिला उठे। उनका कहना था कि इस तरह के सम्मान से उनको आगे की पढ़ाई के साथ ही जीवन में सफलता हासिल करने में आत्मबल मिलेगा।
नौ पूर्व छात्रों को मिला पूर्व छात्र पुरस्कार
दीक्षांत समारोह में संस्थान की ओर से नौ पूर्व छात्रों को पूर्व छात्र पुरस्कार 2021-22 से नवाजा गया। इसमें 1989 बैच के निकेश अरोड़ा, 1980 के छात्र जयचौधरी, 1977 के पवन जैन, 1981 से इंदू भूषण के साथ ही 1992 के प्रो. कुणाल करन, 1968 और 1970 के पूर्व छात्र प्रो. बनमाली एस रावत को पुरस्कार दिया गया। इसके साथ ही 1987 बैच के छात्र डॉ. आनंद एस मुर्थी और 1980 के कैलाश कैलाश को भी पूर्व छात्र पुरस्कार दिया गया। समारोह में पवन कुमार जैन, डॉ. इंदु भूषण एवं आनंद एस. मूर्थी ने मंच पर अपना पुरस्कार ग्रहण किया।
इसरो के चेयरमैन बोले- सफलता के लिए प्रतिबद्धता, सीखने की क्षमता बहुत जरूरी
बतौर मुख्य अतिथि इसरो के चेयरमैन सोमनाथ एस ने मेधावियों को पदक देकर उन्हें जीवन में आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित किया। कहा कि सफलता के लिए प्रतिबद्धता, सीखने की क्षमता बहुत जरूरी है। अगर इन पर ध्यान दिया जाए तो आगे की राह आसान होती जाती है।
बीएचयू के स्वतंत्रता भवन सभागार में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि ने कहा कि कोई भी डिग्री,मेडल, पुरस्कार। यह आसानी से नहीं मिलता है। इसके लिए लगातार प्रयास, समय की प्रतिबद्धता का होना जरूरी है। सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ते रहने के लिए जुनून प्रतिबद्धता, उत्कृष्टता, दृढ़ संकल्प, सीखने की क्षमता, विनम्रता, ईमानदारी और अखंडता होनी चाहिए।
इसरो चेयरमैन ने कहा कि हर इंजीनियर एक पेशेवर है और रचनात्मक होने की उम्मीद है। संभावनाएं बहुत अधिक हैं। वर्तमान समय में चुनौतियां बहुत हैं, ऐसे में युवा इंजीनियरों की अधिक आवश्यकता है। इस दिशा में काम करने की जरूरत है। समारोह में संस्थान में सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन और संगठनात्मक व नेतृत्व क्षमता प्रदर्शित करने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग के छात्र पुलकित गुप्ता, डाइरेक्टर्स स्वर्ण पदक से विभूषित किया गया।कुल 1610 लोगों को उपाधियां भी मिली।
टॉप 10 मेधावी
कुशल टिबड़ेवाल इलेक्ट्रिकल इंजी. सात मेडल, चार पुरस्कार
प्रणव दलाल कंप्यूटर साइंस एंड इंजी. सात मेडल, एक पुरस्कार
आरएडीएस अभिजीत इलेक्ट्रानिक्स इंजी. पांच मेडल, तीन पुरस्कार
अमितेश पंडा केमिकल इंजी. पांच मेडल, दो पुरस्कार
समर्थ चौधरी मैकेनिकल इंजी चार मेडल, एक पुरस्कार
अनुश्री शेखावत फार्मास्यूटिकल्स इंजी. चार मेडल, एक पुरस्कार
पुरु दूबे सिविल इंजी. दो मेडल, दो पुरस्कार
अनीश अमरेंद्र नामजोशी मेटर्लिजकल इंजी. तीन मेडल, एक पुरस्कार
हर्ष बालदी सिरामिक इंजी. दो मेडल
जान्हवी गुप्ता कंप्यूटर साइंस एंड इंजी. एक मेडल, एक पुरस्कार
अनीश के नाम रहा आदित्य कुमार अवस्थी अवार्ड
बीटेक में टॉप करने वाले मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग के छात्र अनीश अमरेंद्र नामजोशी को दीक्षांत समारोह में पहली बार शुरू हुए आदित्य कुमार अवस्थी एनडाउनमेंट अवार्ड से नवाजा गया। यूपी के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी के पिता आदित्य कुमार अवस्थी के नाम पर शुरू इस अवार्ड के तहत अनीश को एक लाख रुपये भी मिला है।
मंच पर अवार्ड लेने के बाद अनीश ने समारोह में मौजूद अवनीश अवस्थी, लोकगायिका मालिनी अवस्थी का आशीर्वाद लिया। इस दौरान उषा अवस्थी, मनाली अवस्थी, जूही अवस्थी सहित परिवार के अन्य लोग मौजूद रहे। इस अवार्ड की घोषणा पिछले दिनों ही हुई थी।