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बिना दबाव और कोच की रणनीति से खेले तो पदक मिलना तय

Tue, 20 Jul 2021 01:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jul 2021 01:27 AM IST
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If you play without pressure and coach's strategy, then you are sure to get a medal.
बनारस जैसे छोटे से शहर निकलकर पहली बार अटलांटा ओलंपिक में चयनित होने पर खुशी से आंखें भर आई थीं। 1996 में ओलंपिक खेलने अटलांटा पहुंचा तो उस दौर के बडे़-बड़े खिलाड़ियों को देखकर हैरान रह गया। बाबा विश्वनाथ को याद कर मैदान में उतर गया। दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम से आ रहा जीतेगा इंडिया का शोर रोमांचित कर रहा था। मगर दर्शकों की उम्मीदों के चलते टीम पर काफी दबाव था। भारतीय ध्वजवाहक और कप्तान परगट सिंह की कप्तानी में हॉकी टीम का आगाज अर्जेंटीना से हार के साथ हुआ लेकिन, अमेरिका और फिर स्पेन को कोच की रणनीति से खेलते हुुए मात दी। इन दो जीतों से टीम अति उत्साह में आ गई, लेकिन लय में होने का फायदा इतना मिला कि जर्मनी, पाकिस्तान और अगले दौर के पहले मैच में दक्षिण कोरिया को बराबरी पर रोक पाए। इसके बाद ब्रिटेन से हम तीन के मुकाबले चार गोल से हार गए और भारतीय टीम टूर्नामेंट में आठवें स्थान पर पहुंच गई। इसकी वजह सिर्फ एक थी कि हम कोच की रणनीति के मुताबिक नहीं खेल पाए। ओलंपिक में जो पहली बार खेलता है वह थोड़ा नर्वस जरूर होता है। यही मेरे साथ हुआ। अर्जेंटीना का वो मैच आज भी मेरे दिलोदिमाग में बैठा है। एक बार तो कोच ने मुझे बाहर बैठा दिया था। उस वक्त अगर हमने कोच की रणनीति के मुताबिक खेला होता तो शायद इतिहास कुछ और होता। टोक्यो ओलंपिक में प्रतिभाग करने जा चुकी टीम को सलाह है कि खिलाड़ी एकाग्र होकर कोच की रणनीति, स्किल, स्ट्रेटजी और स्टेमिना की कसौटी पर खरा उतरे। इससे जीत के साथ 40 साल के पदक की कमी भी पूरी होगी। -जैसा कि अटलांटा ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे राहुल सिंह ने हमें बताया।
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गेम चेंजर साबित हो सकते हैं ललित
पूर्व ओलंपियन और मुंबई के कस्टम विभाग में सहायक कमिश्नर राहुल सिंह ने बताया कि भारतीय हॉकी टीम काफी मजबूत है। कप्तान मनप्रीत के साथ बिरेंद्र, अमित, रोहिदास, सुरेंद्र और विवेक मिडफिल्डर के तौर पर हैं। ललित एक बेहतरीन फारवर्ड हैं, जिनके पास अंतरराष्ट्रीय मैचों का काफी अनुभव भी है। वे टोक्यो ओलंपिक में गेम चेंजर साबित हो सकते हैं।
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