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बांग्लादेशियों के बाद अफगानियों के लिए पनाहगाह बन रहा पूर्वांचल!
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वाराणसी। लघु भारत के तौर पर बसे बनारस और आसपास के अन्य जिले बांग्लादेशियों के बाद अफगानियों के लिए भी पनाहगाह बन रहे हैं। शुक्रवार को अफगानिस्तान निवासी इबादतउल्लाह उर्फ आबिद को हिरासत में लिए जाने के बाद इस बात की खासी चर्चा सुरक्षा एजेंसियों के बीच रही। आशंका जताई गई है कि अफगानिस्तान निवासी अन्य लोग भी बांग्लादेशियों की तरह ही बनारस और आसपास के अन्य जिलों में शरण लिए होंगे। इसके मद्देनजर पूर्वांचल के 10 जिलों की स्थानीय अभिसूचना इकाई और पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए संदिग्ध प्रतीत होने वाले लोगों का सत्यापन गोपनीय तरीके से करने की ताकीद की गई है।
पूर्वांचल की मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए लोग आसानी से घुलमिल जाते हैं। इसके बाद फर्जी तरीके से आधार कार्ड, मार्कशीट और मतदाता परिचय पत्र बनाने वाले गिरोह की मदद से खुद के भारतीय दस्तावेज तैयार करा लेते हैं। भारतीय दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बनवा कर यह यूरोपीय और अमेरिकी देशों की ओर रुख कर लेते हैं। इनमें से कई आगे चल कर मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकी गतिविधियों में भी संलिप्त हो जाते हैं। हालांकि अफगानिस्तान निवासी युवक भारतीय पासपोर्ट बनवा कर क्या करता और कहां जाता, इसकी तह तक जाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं। अफगानी युवक हिंदी और अंग्रेजी भाषा की जानकारी न होने का हवाला दे रहा था। इस वजह से अफगानी भाषा के जानकार की मदद से उससे आधी रात भी पूछताछ जारी रही।
सवा साल पहले वोटर आईडी और मार्कशीट के साथ पकड़े गए थे पांच बांग्लादेशी
वाराणसी। पूर्वांचल में फर्जी भारतीय दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बनवा कर दक्षिण एशियाई देशों के लोगों को विदेश भेजने के प्रयास की यह पहली घटना नहीं है। वाराणसी और आसपास के पूर्वांचल के अन्य जिलों में फर्जी आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र और यूपी बोर्ड की हाईस्कूल की मार्कशीट बनाने का काम धड़ल्ले से होता है। 10 नवंबर 2018 को चंदौली के दुलहीपुर से पांच बांग्लादेशी फर्जी भारतीय मतदाता परिचय पत्र और मार्कशीट के साथ गिरफ्तार किए गए थे। पांचों बांग्लादेशियों को भारतीय दस्तावेजों की मदद से खाड़ी देशों में भेजने की तैयारी थी। इसी तरह से सात दिसंबर 2019 को फर्जी मार्कशीट और आधार कार्ड जैसे अन्य दस्तावेजों के सहारे पुलिस और एलआईयू की मिलीभगत से पासपोर्ट बनवाने वाले गिरोह का मऊ जिले में भंडाफोड़ हुआ था। इस प्रकरण में मऊ जिले के कोपागंज थाने के उर्दू विवेचक, होमगार्ड और एलआईयू के दो हेड कांस्टेबलों की संलिप्तता उजागर हुई थी। आरोपियों ने पूछताछ में बताया था कि पासपोर्ट बनाने का काम करने वाले एजेंट्स की मदद से उन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार कराए थे। बीती 19 जनवरी को चंदौली के पड़ाव से गिरफ्तार आईएसआई एजेंट राशिद अहमद भी बनारस के लंका थाने से तथ्यों को छुपाकर अपना पासपोर्ट बनवाया था।
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प्रधानमंत्री के आगमन से पहले हुई घटना से सुरक्षा एजेंसियां चौकस
नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के बीच आगामी 16 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शहर आएंगे। उनके आगमन से पहले आईएसआई एजेंट राशिद अहमद की गिरफ्तारी और फिर अफगानी नागरिक को हिरासत में लिए जाने की घटना को शीर्ष सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने गंभीरता से लिया है। इसके मद्देनजर प्रधानमंत्री के पूर्व के दौरों की अपेक्षा इस बार सुरक्षा व्यवस्था और तगड़ी रहेगी।
मौके से भागा युवक और दोस्त उगलेंगे राज
अफगानिस्तान निवासी युवक के साथ पासपोर्ट कार्यालय में एक अन्य युवक भी गया था। अफगानिस्तान निवासी युवक को घिरता देख वह मौके से भाग निकला। पुलिस टीमें उसकी तलाश कर रही हैं। बताया जा रहा है कि वह फर्जी तरीके से पासपोर्ट बनवाने वाला एजेंट होगा। वहीं, अफगानी युवक के आजमगढ़ के फूलपुर निवासी दोस्त की तलाश में पुलिस की एक टीम रवाना की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों युवक पकड़े जाएंगे तो इस प्रकरण से जुड़े महत्वपूर्ण राज उजागर होंगे।
वीडियो कैमरे के सामने दर्ज हुआ बयान
अफगानी युवक से वीडियो कैमरे के सामने पूछताछ कर उसका बयान दर्ज किया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने उससे पूछा कि 11 जनवरी को जबसे वह भारत आया है, तबसे कहां गया और किससे मिला। उसके संबंध में पता लगाने के लिए नई दिल्ली स्थित अफगानिस्तान के दूतावास से भी संपर्क साधा गया है।
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पूर्वांचल की मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए लोग आसानी से घुलमिल जाते हैं। इसके बाद फर्जी तरीके से आधार कार्ड, मार्कशीट और मतदाता परिचय पत्र बनाने वाले गिरोह की मदद से खुद के भारतीय दस्तावेज तैयार करा लेते हैं। भारतीय दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बनवा कर यह यूरोपीय और अमेरिकी देशों की ओर रुख कर लेते हैं। इनमें से कई आगे चल कर मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकी गतिविधियों में भी संलिप्त हो जाते हैं। हालांकि अफगानिस्तान निवासी युवक भारतीय पासपोर्ट बनवा कर क्या करता और कहां जाता, इसकी तह तक जाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं। अफगानी युवक हिंदी और अंग्रेजी भाषा की जानकारी न होने का हवाला दे रहा था। इस वजह से अफगानी भाषा के जानकार की मदद से उससे आधी रात भी पूछताछ जारी रही।
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सवा साल पहले वोटर आईडी और मार्कशीट के साथ पकड़े गए थे पांच बांग्लादेशी
वाराणसी। पूर्वांचल में फर्जी भारतीय दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बनवा कर दक्षिण एशियाई देशों के लोगों को विदेश भेजने के प्रयास की यह पहली घटना नहीं है। वाराणसी और आसपास के पूर्वांचल के अन्य जिलों में फर्जी आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र और यूपी बोर्ड की हाईस्कूल की मार्कशीट बनाने का काम धड़ल्ले से होता है। 10 नवंबर 2018 को चंदौली के दुलहीपुर से पांच बांग्लादेशी फर्जी भारतीय मतदाता परिचय पत्र और मार्कशीट के साथ गिरफ्तार किए गए थे। पांचों बांग्लादेशियों को भारतीय दस्तावेजों की मदद से खाड़ी देशों में भेजने की तैयारी थी। इसी तरह से सात दिसंबर 2019 को फर्जी मार्कशीट और आधार कार्ड जैसे अन्य दस्तावेजों के सहारे पुलिस और एलआईयू की मिलीभगत से पासपोर्ट बनवाने वाले गिरोह का मऊ जिले में भंडाफोड़ हुआ था। इस प्रकरण में मऊ जिले के कोपागंज थाने के उर्दू विवेचक, होमगार्ड और एलआईयू के दो हेड कांस्टेबलों की संलिप्तता उजागर हुई थी। आरोपियों ने पूछताछ में बताया था कि पासपोर्ट बनाने का काम करने वाले एजेंट्स की मदद से उन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार कराए थे। बीती 19 जनवरी को चंदौली के पड़ाव से गिरफ्तार आईएसआई एजेंट राशिद अहमद भी बनारस के लंका थाने से तथ्यों को छुपाकर अपना पासपोर्ट बनवाया था।
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प्रधानमंत्री के आगमन से पहले हुई घटना से सुरक्षा एजेंसियां चौकस
नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के बीच आगामी 16 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शहर आएंगे। उनके आगमन से पहले आईएसआई एजेंट राशिद अहमद की गिरफ्तारी और फिर अफगानी नागरिक को हिरासत में लिए जाने की घटना को शीर्ष सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने गंभीरता से लिया है। इसके मद्देनजर प्रधानमंत्री के पूर्व के दौरों की अपेक्षा इस बार सुरक्षा व्यवस्था और तगड़ी रहेगी।
मौके से भागा युवक और दोस्त उगलेंगे राज
अफगानिस्तान निवासी युवक के साथ पासपोर्ट कार्यालय में एक अन्य युवक भी गया था। अफगानिस्तान निवासी युवक को घिरता देख वह मौके से भाग निकला। पुलिस टीमें उसकी तलाश कर रही हैं। बताया जा रहा है कि वह फर्जी तरीके से पासपोर्ट बनवाने वाला एजेंट होगा। वहीं, अफगानी युवक के आजमगढ़ के फूलपुर निवासी दोस्त की तलाश में पुलिस की एक टीम रवाना की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों युवक पकड़े जाएंगे तो इस प्रकरण से जुड़े महत्वपूर्ण राज उजागर होंगे।
वीडियो कैमरे के सामने दर्ज हुआ बयान
अफगानी युवक से वीडियो कैमरे के सामने पूछताछ कर उसका बयान दर्ज किया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने उससे पूछा कि 11 जनवरी को जबसे वह भारत आया है, तबसे कहां गया और किससे मिला। उसके संबंध में पता लगाने के लिए नई दिल्ली स्थित अफगानिस्तान के दूतावास से भी संपर्क साधा गया है।