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खर्च सौ लाख, सड़क बची न साख
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
Updated Mon, 21 Mar 2016 01:58 AM IST
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सीवर पाइप लाइन के लिए खुदाई के आठ महीने के बाद बनवाई गई पांडेयपुर चौराहे से हुकुलगंज तक की तीन किलोमीटर लंबी सड़क डेढ़-दो महीने में ही टूटकर बरबाद हो गई। मानक और गुणवत्ता की अनदेखी के साथ तारकोल के खेल ने इस नवनिर्मित सड़क की हालत पुरानी सड़कों से भी बदतर कर दी है।
सड़क के जगह-जगह उखड़ने और धंसने के साथ ही गिट्टियां इधर-उधर बिखर गई हैं। वीडीए ने अवस्थापना निधि से इसका निर्माण कराया था। एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बाद भी सड़क चलने लायक नहीं बची है। इससे वीडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ गए हैं, वहीं गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण सुनिश्चित कराने का दावा करने वाले जनप्रतिनिधियों, उच्चाधिकारियों की साख पर भी आंच आई है।
पांडेयपुर-हुकुलगंज मार्ग पर सीवर पाइप लाइन बिछाने के लिए पिछले साल खुदाई कराई गई थी। सीवर पाइप लाइन का काम पूरा होने के बाद कार्यदायी संस्था सड़क बनवाना भूल गई। खुदाई से खस्ताहाल सड़क पर लोग आठ महीने सांसत झेलते रहे। फिर मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण के निर्देश पर वीडीए ने 15 जनवरी के बाद अवस्थापना निधि से इस मार्ग का निर्माण कराया। पहले की तुलना सड़क की चौड़ाई भी बढ़ाई गई। लगभग तीन किलोमीटर लंबी इस डबल लेन सड़क पर एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं।
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फिर भी महज डेढ़-दो महीने के अंदर ही सड़क चलने योग्य नहीं रह गई है। खस्ताहाल सड़क के किनारे बड़ा ट्राली ट्रांसफार्मर रखे होने से आवागमन में मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इतना ही नहीं, पांडेयपुर चौराहे से पहले ही सड़क बनाकर छोड़ दी गई। चौराहे पर अब भी गड्डा है। दिन-रात धूल उड़ती रहती है। नाली का भी निर्माण भी अधूरा छोड़ दिया गया है। इस बारे में वीडीए के एक्सईएन गोपाल कृष्ण का कहना है कि सड़क खराब होने की शिकायत मिली है, जिस ठेकेदार ने काम कराया है उससे उसी पैसे में दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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सड़क के जगह-जगह उखड़ने और धंसने के साथ ही गिट्टियां इधर-उधर बिखर गई हैं। वीडीए ने अवस्थापना निधि से इसका निर्माण कराया था। एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बाद भी सड़क चलने लायक नहीं बची है। इससे वीडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ गए हैं, वहीं गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण सुनिश्चित कराने का दावा करने वाले जनप्रतिनिधियों, उच्चाधिकारियों की साख पर भी आंच आई है।
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पांडेयपुर-हुकुलगंज मार्ग पर सीवर पाइप लाइन बिछाने के लिए पिछले साल खुदाई कराई गई थी। सीवर पाइप लाइन का काम पूरा होने के बाद कार्यदायी संस्था सड़क बनवाना भूल गई। खुदाई से खस्ताहाल सड़क पर लोग आठ महीने सांसत झेलते रहे। फिर मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण के निर्देश पर वीडीए ने 15 जनवरी के बाद अवस्थापना निधि से इस मार्ग का निर्माण कराया। पहले की तुलना सड़क की चौड़ाई भी बढ़ाई गई। लगभग तीन किलोमीटर लंबी इस डबल लेन सड़क पर एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं।
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फिर भी महज डेढ़-दो महीने के अंदर ही सड़क चलने योग्य नहीं रह गई है। खस्ताहाल सड़क के किनारे बड़ा ट्राली ट्रांसफार्मर रखे होने से आवागमन में मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इतना ही नहीं, पांडेयपुर चौराहे से पहले ही सड़क बनाकर छोड़ दी गई। चौराहे पर अब भी गड्डा है। दिन-रात धूल उड़ती रहती है। नाली का भी निर्माण भी अधूरा छोड़ दिया गया है। इस बारे में वीडीए के एक्सईएन गोपाल कृष्ण का कहना है कि सड़क खराब होने की शिकायत मिली है, जिस ठेकेदार ने काम कराया है उससे उसी पैसे में दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं।