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अमर उजाला अभियान: वाराणसी को कैसे मिले सीवर लाइन समस्या से निजात? आईआईटी बीएचयू के प्रोफेसर ने बताया उपाय

Wed, 09 Jun 2021 12:35 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Wed, 09 Jun 2021 12:35 PM IST
सार

कभी दुनिया भर में बेहतर सीवर लाइन व्यवस्था के लिए जाना जाने वाला शहर वाराणसी बीते कई वर्षों से बदाहल है। शहर के कई मुहल्लों में सीवर ओवरफ्लो होना आम बात है।  सीवर को दुरस्त करने के लिए काम होता है तो यातायात व्यवस्था पर असर पड़ता है। 

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How Varanasi get rid of sewer line problems Associate Professor of IIT BHU told service corridor is only solution
सर्विस कॉरिडोर बने तो दूर होगी सीवर समस्या - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी में सर्विस कॉरिडोर होता तो बार-बार खोदाई से खराब हो रही सीवर व्यवस्था से निजात मिल जाती। आईआईटी बीएचयू के एसोसिएट प्रो. बृंद कुमार ने बताया कि सर्विस कॉरिडोर के कई फायदे हैं। बनारस में कई जगह सड़क के बीच से सीवर और पानी सहित अन्य पाइप लाइनें गुजरती हैं, जबकि बड़े शहरों में सड़क के दोनों ओर फुटपाथ के नीचे सर्विस कॉरिडोर बनाए गए हैं।

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इन्हीं से सीवर, पानी सहित अन्य लाइनें निकाली जाती हैं। इससे वहां सड़कें बार-बार खोदने की समस्या नहीं होती है। इससे रोड कटिंग का पैसा बचता है और यातायात पर भी असर नहीं पड़ता।  उन्होंने बताया कि सर्विस कॉरिडोर में बीच-बीच में इंस्पेक्शन होल होने चाहिए, ताकि खराबी आने पर इनके जरिए अंदर जाकर मरम्मत कराई जा सके। सड़क के दोनों ओर एक टनल बनाई जाती है।
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इसमें सीवर, बिजली, पानी, टेलीफोन की लाइनें डालने के लिए जगह दी जाती है। इसकी एवज में जिस विभाग की सड़क होती है, वह किराया वसूलता है। लाइनों में खराबी आने पर सड़क की खोदाई किए बिना मरम्मत हो जाती है। इस संबंध में शासन प्रशासन से वार्ता हो चुकी है, लेकिन पुराना शहर होने के नाते इसे यहां बनाने में काफी दिक्कतें हैं।
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जल निगम ks मुख्य अभियंता एके पुरवार ने कहा कि अक्सर सीवर पाइप लाइनों को दूसरी कार्यदायी एजेंसियां तोड़ देती हैं। जिसके चलते बार-बार इनकी मरम्मत करनी पड़ी है। बनारस में सर्विस कारिडोर नहीं होने से समस्या है। पुराने शहर में सर्विस कॉरिडोर संभव नहीं है। 

बड़े शहरों में नहीं होती सड़कों की बार बार खोदाई

मुंबई, दिल्ली सहित कई बड़े शहरों में सर्विस कॉरिडोर हैं। इसके चलते यहां सड़कों की खोदाई नहीं करनी पड़ती है। वहां सड़क किनारे नाली बनी है। नाली के बाद सर्विस कॉरिडोर है। इस कॉरिडोर के ऊपर पैदल चलने वालों के लिए पाथवे बना है। कभी कोई खराबी आने पर सड़क की खोदाई नहीं करनी पड़ती है। बस बीच-बीच में बने टनल के ढक्कन को उठाकर नीचे कार्यदायी एजेंसी काम करती है। 

खोदाई से टूटीं सीवर पाइप लाइनें तो मचा हड़कंप
मलदहिया में बिजली विभाग ने सीवर पाइप लाइन तोड़कर उसमें तार डाल दिया। जब सीवर ओवरफ्लो हुआ तब हड़कंप मचा। आनन-फानन में बिजली के तार को वहां से हटाया गया। इसके बाद सीवर लाइन को दुरुस्त कराया गया। पिछले दिनों कबीरचौरा में जब पाइप टूटी तो नए सिरे से मंथन हुआ। 

खोदाई से रास्ता बंद, शाही नाले का हो रहा काम

अंग्रेजों के जमाने में बने शाही नाले की क्षमता 80 एमएलडी की है। इसके लिए दीनापुर में एसटीपी लगी है। लेकिन शहरों में बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर वर्तमान में 130 एमएलडी मलजल का फ्लो रोजाना हो रहा है। इससे कबीरचौरा सहित जलालीपुरा, शैलपुत्री, मछोदरी, गोलगड्डा आदि इलाके में सीवर ओवरफ्लो की समस्या वर्ष भर बनी रहती है। इससे निजात दिलाने के लिए कबीरचौरा तिराहे से चौकाघाट तक पाइप लाइन का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए 10 करोड़ 62 लाख रुपये से काम हो रहा है।

जल निगम की गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई कार्यदायी संस्था है। इस कार्य के लिए पिपलानी कटरा तिराहे से लेकर लहुराबीर चौराहे से पहले एक लेन को बंद कर दिया गया है। लहुराबीर चौराहे से होकर पहले ही एक लेन को बंद कर वाहनों को रामकटोरा की ओर भेजा जा रहा है। कबीरचौरा तिराहे पर स्थित जिला महिला अस्पताल से शाही नाले के मेन लाइन को डायवर्ट कर पिपलानी कटरा से होते हुए रामकटोरा, नाटीइमली होते हुए चौकाघाट पंपिंग स्टेशन तक जोड़ा जाएगा। करीब 800 मीटर की इस सीवर लाइन कार्य को जून 2021 तक पूरा करना है।

सर्विस कॉरिडोर बनाने में अड़चनें

- जगह की कमी 
- नीचे पुरानी कई पाइपें हैं जो क्षतिग्रस्त हो सकती हैं
- इसके लिए बड़े बजट की आवश्यकता 
- पूरे सीवर लाइन को डायवर्ट करना बड़ी चुनौती 
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