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कुंडों-हेरिटेज स्थलों का काम ठंडे बस्ते में

Fri, 24 Jun 2016 01:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 24 Jun 2016 01:12 AM IST
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 काशी की ऐतिहासिक धरोहरों को संवारने और सहेजने की योजना दो कदम चलकर ठिठक गई है। कुंडों के सौंदर्यीकरण, हेरिटेज जोन की मरम्मत और वहां की सड़कों को बनाने के लिए छह महीने पहले नगर निगम ने 80 करोड़ रुपये की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्र सरकार को भेजी थी। इसके अलावा, कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत कई कंपनियां भी आगे आई थीं लेकिन इतना सबके बाद भी अब तक काम कुछ  नहीं हुआ।
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न तो हेरिटेज जोन की मरम्मत का काम शुरू हो पाया और न ही कुंडों का सौंदर्यीकरण का। जैसे-तैसे सड़कें बनाने का काम शुरू कराया गया तो वह भी कुछ दिनों में ही बंद हो गया। अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि धन और कार्ययोजना दोनों होने के बावजूद आखिरकार इतनी सुस्ती क्यों?
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केंद्र की हेरिटेज सिटी डेवलपमेंट एंड आग्मेंटेशन योजना (हृदय) और कारपोरेट सोशल रेस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत शहर के कुंडों के अलावा हेरिटेज जोन का संरक्षण, टाउनहाल की मरम्मत और 34 सड़कों का निर्माण किया जाना है। सड़कों को छोड़ बाकी कार्यों की शुरुआत ही नहीं हो पाई है। सड़कें बनाने का काम भी महीनों से ठप है। वजह, विभागीय तालमेल का अभाव। जिन सड़कों पर निर्माण कार्य शुरू हुआ, वहां इंटीग्रेटेड पावर डेवलमेंट सिस्टम (आईपीडीएस) के तहत भूमिगत केबिल बिछाने का काम शुरू हो गया। नतीजतन सड़क बनाने का काम रोकना पड़ा।
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 शहर के चार ऐतिहासिक कुंडों को कॉरपोरेट सोशल रेस्पांसिबिलिटी के तहत सहेजा जाना है। इसकी जिम्मेदारी ओएनजीसी को दी गई है। इसमें दुर्गाकुंड, लक्ष्मीकुंड, लाटभैरव और सारंग तालाब शामिल हैं। इन स्थानों पर बिजली-पानी की समुचित सुविधाओं के अलावा पाथवे आदि का निर्माण कराया जाना है। वहीं हृदय के तहत दशाश्वमेध से गोदौलिया और अस्सी से दुर्गाकुंड तक सड़क, पाथवे, एक रंग में शाइनेज, चितरंजन पार्क को संवारने का काम होना है। लेकिन, धन स्वीकृति होने के बाद भी ये कार्य अब तक शुरू नहीं पाए हैं। इन कार्यों पर 3.54 करोड़ खर्च किए जाने हैं। यदि ये कार्य शुरू हो गए होते तो लक्ष्मी कुंड में कम से ऑक्सीजन की कमी से मछलियों के दम तोड़्ने की नौबत नहीं आती।



हृदय के तहत शहर की 38 सड़कों की मरम्मत के साथ ही किनारे पाथवे, इंटर लॉकिंग, नाली, सीवेज, लाइट की व्यवस्था की जानी है। इसमें नगर निगम को 14 सड़कें बनानी हैं। इनमें 10 सड़कों के लिए करीब आठ करोड़ रुपये स्वीकृत है। 24 सड़कें एनबीसीसी को बनानी हैं। इन पर करीब 28 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। धनराशि जारी होने के बावजूद एक-दो सड़कों को छोड़कर बाकी सड़कों पर अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
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