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फसाद की असली जड़ मानद सदस्य
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 19 Sep 2016 02:04 AM IST
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बनारस क्लब के प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव के झगड़े की असली जड़ कुछ मानद सदस्य हैं। क्लब के मानद सदस्य बड़े ओहदे वाले हैं और प्रशासनिक व्यवस्था में इनका दखल रहता है। 1416 सदस्य वाले इस क्लब में सदस्यों का ऐसा गुट भी है, जिनकी इन ‘आला अफसरों’ से गहरी छनती है। कारण जो भी हो। वहीं, दूसरा खेमा क्लब में प्रशासनिक अधिकारियों के अनावश्यक हस्तक्षेप और दखलंदाजी के खिलाफ आवाज उठाता रहा है। यही वजह है कि क्लब का चुनाव दो धड़ों में बंट गया है।
बनारस क्लब में मचे घमासान की वजह मानद सदस्यों द्वारा सुविधाओं का बेजा उपभोग और मनमाने तरीके से दबाव डालकर एक शख्स को सदस्यता दिलाना भी है। इसकी वजह से क्लब के सामान्य सदस्योें का एक खेमा नाराज है और बैठकों में कई बार आवाज बुलंद कर चुका है। बताया जाता है कि बीते समय में जिले में तैनात रहे एक ‘आला अफसर’ ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर एक ऐसे व्यक्ति को सदस्य बनवा दिया, जो इसके लिए अर्ह नहीं था। उक्त ‘आला अफसर’ के स्थानांतरित होते ही उस शख्स ने उनकी जगह आए नए अधिकारी से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की लेकिन जब सफलता नहीं मिली तो वह उनके ऊपर के अधिकारी के यहां पैठ बनाकर अपना उल्लू सीधा करने लगा। सूबे के आला अफसरों और मंत्रियों से करीबी का दावा करने वाला यह शख्स जिले के पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को सब्जबाग दिखाता है। उसकी खासियत है कि वह क्लब के कुछ सामान्य सदस्यों और अफसरों के बीच ‘सेतु’ का काम करता है।
चिकित्सकों की अंदरूनी कलह भी क्लब में घमासान की वजह- क्लब में चुनाव के पहले मचे घमासान की एक वजह प्रांतीय चिकित्सा सेवा (पीएमएस) और आईएमए की राजनीति से जुड़े चिकित्सकों की अंदरूनी कलह भी है। क्लब के जिस सदस्य और पूर्व पदाधिकारी के खिलाफ शुक्रवार को कार्रवाई हुई वह और उनकी पत्नी दोनों सरकारी चिकित्सक हैं। साथ ही, उक्त पदाधिकारी का चिकित्सकोें की संगठनात्मक राजनीति में भी खासा दखल है। चिकित्सा क्षेत्र के संगठनों की राजनीति के जानकारों का कहना है कि इसीलिए अवसर मिलते ही बनारस क्लब के पूर्व पदाधिकारी चिकित्सक की जड़ें क्लब के साथ ही पीएमएस और आईएमए में भी कमजोर करने की पुरजोर कोशिश की गई।
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बनारस क्लब में मचे घमासान की वजह मानद सदस्यों द्वारा सुविधाओं का बेजा उपभोग और मनमाने तरीके से दबाव डालकर एक शख्स को सदस्यता दिलाना भी है। इसकी वजह से क्लब के सामान्य सदस्योें का एक खेमा नाराज है और बैठकों में कई बार आवाज बुलंद कर चुका है। बताया जाता है कि बीते समय में जिले में तैनात रहे एक ‘आला अफसर’ ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर एक ऐसे व्यक्ति को सदस्य बनवा दिया, जो इसके लिए अर्ह नहीं था। उक्त ‘आला अफसर’ के स्थानांतरित होते ही उस शख्स ने उनकी जगह आए नए अधिकारी से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की लेकिन जब सफलता नहीं मिली तो वह उनके ऊपर के अधिकारी के यहां पैठ बनाकर अपना उल्लू सीधा करने लगा। सूबे के आला अफसरों और मंत्रियों से करीबी का दावा करने वाला यह शख्स जिले के पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को सब्जबाग दिखाता है। उसकी खासियत है कि वह क्लब के कुछ सामान्य सदस्यों और अफसरों के बीच ‘सेतु’ का काम करता है।
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चिकित्सकों की अंदरूनी कलह भी क्लब में घमासान की वजह- क्लब में चुनाव के पहले मचे घमासान की एक वजह प्रांतीय चिकित्सा सेवा (पीएमएस) और आईएमए की राजनीति से जुड़े चिकित्सकों की अंदरूनी कलह भी है। क्लब के जिस सदस्य और पूर्व पदाधिकारी के खिलाफ शुक्रवार को कार्रवाई हुई वह और उनकी पत्नी दोनों सरकारी चिकित्सक हैं। साथ ही, उक्त पदाधिकारी का चिकित्सकोें की संगठनात्मक राजनीति में भी खासा दखल है। चिकित्सा क्षेत्र के संगठनों की राजनीति के जानकारों का कहना है कि इसीलिए अवसर मिलते ही बनारस क्लब के पूर्व पदाधिकारी चिकित्सक की जड़ें क्लब के साथ ही पीएमएस और आईएमए में भी कमजोर करने की पुरजोर कोशिश की गई।
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