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दिनोंदिन जहरीली होती जा रही पवित्र नगरी काशी की हवा, किसी को कोई फिक्र नहीं

Sun, 17 Dec 2017 03:20 PM IST
amarujala.com- Written by: अजीत कुमार सिंह
amarujala.com- Written by: अजीत कुमार सिंह Updated Sun, 17 Dec 2017 03:20 PM IST
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holy city varanasi air pollution is going toxic day by day
काशी को निगलता धुआं और सो रहे हुक्मरां - फोटो : अमर उजाला
लोगों  ने कभी सोचा भी न होगा कि हवा में बढ़ते प्रदूषण के चलते स्कूलों की छुट्टी तक करनी पड़ेगी पर दिल्ली में ऐसा हुआ। मासूमों और बुजुर्गों का सांस लेना तक दुश्वार हो गया। बनारस में भी हालात इससे कम नहीं। हाल ही में कई दिनों तक जहरीली धुंध की चादर ने शहर को अपनी आगोश में ले रखा था और हम बेबस देखते रहे।
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यहां बढ़ते प्रदूषण के लिए जिम्मेदार तमाम अन्य कारक तो हैं ही, वाहनों का भी कम हाथ नहीं। हालात दिनोंदिन बिगड़ते जा रहे हैं और सड़कों पर वाहनों की भीड़ बढ़ती जा रही है। बावजूद इसके वाहनों के धुएं से होने वाले प्रदूषण की किसी को फिक्र तक नहीं।
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न हम संजीदा हैं न वे जिन पर वाहनों से निकलते विषैले धुएं पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी है। आखिर कैसे बदलेगी ये सूरत.. कैसे शहर की जहरीली होती आबो-हवा को बचाया जाए...।  अगर हम अपनी भावी पीढ़ी को स्वस्थ-खुशहाल देखना चाहते हैं तो शहर के जिम्मेदार प्रबुद्धों को इस दिशा में गंभीरता से सोचना ही होगा।
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वाराणसी जिले भर में दौड़ रहे तकरीबन तीन लाख वाहन जहरीला धुआं उगल रहे हैं। ये ऐसे वाहन हैं जिनके पास प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाणपत्र नहीं है। इन वाहनों से निकलने वाला धुआं हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रहा है।

संभागीय परिवहन कार्यालय में 9 लाख 52 हजार 846 वाहन पंजीकृत हैं। इनमें तीन लाख से अधिक वाहन ऐसे हैं जिनके पास प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाणपत्र नहीं है। पंजीकृत वाहनों में 65 हजार 810 व्यावसायिक हैं। 

नियमत: इन सभी वाहनों को हर छह महीने बाद प्रदूषण नियंत्रण जांच केंद्र से प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र लेना चाहिए। पर न कोई जांच कराता है और न जिम्मेदारों को जांच करने की फिक्र है। वाहनों के धुएं से होने वाले प्रदूषण की जांच के लिए जिले में कुल नौ जांच केंद्र खोले गए हैं।
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काशी को निगलता धुआं और सो रहे हुक्मरां

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वाहनों के धुएं से होने वाले प्रदूषण की किसी को फिक्र तक नहीं - फोटो : अमर उजाला

इन केंद्रों से मिले इनपुट के मुताबिक जिले की सड़कों पर दौड़ रहे 50 फीसदी से ज्यादा वाहन प्रदूषण की जांच कराए बगैर ही शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें से करीब एक लाख वाहन तो ऐसे हैं जिन्होंने एक बार के बाद दोबारा प्रदूषण की जांच कराई ही नहीं। विडंबना यह कि इन वाहन स्वामियों को परिवहन विभाग की ओर से कोई नोटिस तक जारी नहीं किया गया।

शहर की आबो-हवा में जहर घोलने वाले इन वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग और यातायात पुलिस कार्रवाई करने तक की जहमत नहीं उठाते। वाहनों की चेकिंग तो की जाती है लेकिन प्रदूषण की जांच नहीं की जाती।

दिल्ली से लेकर वाराणसी तक लोग प्रदूषण की गंभीर समस्या से घिरे हुए हैं लेकिन इसकी रोकथाम के कोई ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं। एआरटीओ प्रशासन अमित राजन राय ने कहा कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण की जांच के लिए केंद्र खोले गए हैं। बगैर प्रदूषण की जांच कराए चलने वाले वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

40 हजार से ज्यादा वाहन रोजाना शहर से गुजरते हैं 
आंकड़ों के मुताबिक करीब 40 हजार वाहन ऐसे हैं जो शहर के अंदर से या फिर जिले की सीमा से होकर गुजरते हैं। इनमें दस हजार से ज्यादा ट्रक हैं। इन वाहनों से भी काफी प्रदूषण होता है। इन वाहनों के पास प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र होता है या नहीं इस बारे में पता नहीं चल पाता। बड़े वाहन रात में नो इंट्री खुलने पर शहर के अंदर से गुजरते हैं। रात में इन वाहनों की कोई जांच नहीं होती है। 

पेट्रोल चालित वाहनों से ज्यादा प्रदूषण
परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पेट्रोल से चलने वाले वाहनों से ज्यादा प्रदूषण होता है। पेट्रोल वाहनों के धुएं में कार्बन डाई ऑक्साइड तीन प्रतिशत से कम होना चाहिए। डीजल वाहनों में कार्बन डाई ऑक्साइड 65 प्रतिशत के नीचे होना चाहिए। सभी वाहनों की जांच 4/5 गैस एनालाइजर मशीन से होती है।

जेब गरम करने का जरिया बनी जांच

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वाराणसी की सड़कों पर सांस लेना तक दुश्वार, मास्क बनी मजबूरी - फोटो : अमर उजाला
अमूमन परिवहन विभाग और यातायात पुलिस वाहनों से होने वाले प्रदूषण की जांच ही नहीं करते। अगर कभी जांच का ख्याल आ भी गया तो उस दिन ये जांच महज जेब गरम करने का जरिया बनकर रह जाती है।

यूं तो प्रदूषण नियंत्रण का प्रपत्र न होने पर परिवहन विभाग और यातायात पुलिस वाहन स्वामी से एक हजार रुपये जुर्माना वसूल सकती है। लेकिन होता यह है कि भले ही गाड़ी जहरीला धुआं उगल रही हो, जहां ‘लेन-देन’ हुआ सारी खामियां खूबियों में बदल जाती हैं। इसीलिए वाहन स्वामियों को भी एक हजार रुपये जुर्माने का कोई डर नहीं। 

इन नौ केंद्रों पर करा सकते हैं वाहनों के प्रदूषण की जांच
परिवहन विभाग ने जिले में नौ केंद्रों को प्रदूषण की जांच का लाइसेंस जारी किया है। इनमें मे. योर लाइफ सेफ एंड केयरिंग सोसाइटी भीटी बाईपास, मो. हसीब सिराजुद्दीन आटो वर्क्स कैंट, सेंच्युरी फ्यूल अकथा, चेतना वेलफेयर सोसाइटी सेंट्रल जेल रोड, ऑटो केयर सोसइटी नदेसर, सांई समाज कल्याण सेवा समिति टकटकपुर, ऑटो केयर सोसाइटी न्यू कालोनी लच्छीपुरा, बाबा पर्यावरण संस्थान गिलट बाजार, नारायण सेवा समिति वरुणा पुल शामिल हैं।

आंकड़े एक नजर में 

9,52,846 वाहन परिवहन कार्यालय में हैं पंजीकृत
65,810 वाहन हैं व्यावसायिक
80,874 वाहन हैं चार पहिया
18,779 वाहन हैं तीन पहिया
7,77,794 वाहन हैं दो पहिया
2.70 लाख वाहन हैं डीजल चालित
6.30 लाख वाहन हैं पेट्रोल चालित
40 हजार बाहरी वाहन रोजाना शहर से होकर गुजरते हैं 
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