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देश के पूर्व हॉकी खिलाड़ी की पत्नी लौटाएंगी सभी अवार्ड, प्रशासन को दिया दो दिन का वक्त

Wed, 18 Jul 2018 10:34 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Wed, 18 Jul 2018 10:34 AM IST
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Hockey player mohammad shahid wife gave two days to district administration
परवीन - फोटो : अमर उजाला
भारतीय हॉकी को नए मुकाम पर पहुंचाने वाले पद्मश्री मोहम्मद शाहिद के मेडल वापस करने संबंधी पत्नी परवीन के ऐलान की जानकारी होते ही शासन, प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में मंगलवार को उनसे मिलने के लिए मकबूल आलम रोड स्थित आवास पर बनारस के डीएम सुरेंद्र सिंह पहुंचे।
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परवीन ने जिला प्रशासन को कार्यवाही के लिये दो दिन का वक्त दिया है। उन्होंने कहा कि दो दिन का समय है, अगर हमारी मांगों पर जिला प्रशासन कोई ठोस कदम नही उठाती है तो वह 21 जुलाई को दिल्ली जाकर मेडल वापसी को मजबूर होंगी।
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पढ़ें: सरकारी उपेक्षा से नाराज हैं पूर्व हॉकी कप्तान पद्मश्री मो. शाहिद की पत्नी, लौटाएंगी सभी सम्मान
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परवीन ने सरकारी उपेक्षा के विरोध में पति को मिले सभी मेडल वापस करने का फैसला सोमवार को किया था। 20 जुलाई को मो. शाहिद की पुण्यतिथि पर परवीन दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मेडल और अन्य पुरस्कार लौटाने की बात कही थी।

मंगलवार को मीडिया के माध्यम से जब शासन, प्रशासन को इसकी जानकारी हुई तो पूछताछ शुरू हुई। डीएम ने पहले फोन पर और फिर  मो. शाहिद के घर पहुंचकर ओलंपियन की पत्नी से मुलाकात की। डीएम ने फिलहाल इस मामले से अनभिज्ञता जताई और हर संभव कार्यवाही का आश्वासन दिया। 

अभी तक कोई सुनवाई नहीं 

Hockey player mohammad shahid wife gave two days to district administration
हॉकी खिलाड़ी की पत्नी ने सरकारी उपेक्षा के विरोध में लिया फैसला - फोटो : अमर उजाला
डीएम के जाने पर परवीन ने बताया कि जिलाधिकारी ने दो दिन के भीतर बताने को कहा है कि वह क्या कार्यवाही कर पाएंगे। हॉकी खिलाड़ी की पत्नी ने बताया कि दो साल पहले जब पति का इंतकाल हुआ तो पीएम से लेकर तमाम मंत्री व जनप्रतिनिधियों ने शोक संवेदना व्यक्त की। उस दौरान कई वायदे किये गये।

कहा गया कि बनारस में उनके नाम से एकेडमी, स्टेडियम और ऑल इंडिया टूर्नामेंट का आयोजन होगा। साथ ही परिवार की आर्थिक मजबूती के लिये गैस एजेंसी या पेट्रोल पंप का भी आश्वासन दिया गया। अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे मजबूर होकर उन्होंने यह फैसला लिया है।

उन्होंने कहा कि मोहम्मद शाहिद देश और खेल के लिये जिये। कड़ी मेहनत के बाद उन्हें यह मेडल मिला। सरकारी उपेक्षा के चलते वह ऐसा करने को मजबूर हुए।

उन्होंने बताया कि अभी पेंशन मिल रही है। उनके बाद परिवार की कौन सुनेगा। आर्थिक आधार भी जरूरी है। उन्होंने पति के नाम से एकेडमी चलाने के लिये सरकार से मदद मांगी है। 

पीएम से मिलने के लिये दो बार किया पत्राचार

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ओलंपियन मो. शाहिद - फोटो : file photo
ओलंपियन मो. शाहिद के परिवार ने प्रधानमंत्री से मिलने के लिये दो बार पत्राचार किया और कई बार जनप्रतिनिधियों के दरवाजे खटखटाए। बावजूद इसके उनकी कोई सुनवाई नही हुई।

उन्होंने पीएमओ और प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय को पत्र लिखा। हर बार आश्वासन मिलता कि इस बार आपका नाम पीएम से मिलने वालों की लिस्ट में है पर हर बार यह कोरा आश्वासन ही निकला। इतना ही नही उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों व हॉकी संघ के पदाधिकारियों के दरवाजे भी खटखटाए पर कोई सुनवाई नही हुई।

मोहम्मद शाहिद के बेटे राष्ट्रीय निशानेबाज मोहम्मद शैफ ने डीएम को बताया कि वह रायफल क्लब में वह प्रैक्टिस करते हैं। इस पर जिलाधिकारी ने जानकारी दि कि क्लब को हाईटेक बनाया जा रहा है। इसको इलेक्ट्रॉनिक शूटिंग रेंज में बदला जा रहा है। इसका लाभ सभी खिलाडि़यों को मिलेगा।

वहीं मोहम्मद शाहिद के जन्मदिन पर पिछले साल परिवार ने एक बार खुद के खर्चे पर हॉकी का टूर्नामेंट कराया। उस वक्त यह भरोसा दिलाया गया था कि जो भी खर्च आएगा उसको सरकार वहन करेगी। आज तक वह पैसे नही मिले।

1980-81 में मिला था अर्जुन पुरस्कार

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मोहम्मद शाहिद - फोटो : file photo
मोहम्मद शाहिद का जन्म 14 अप्रैल, 1960 को बनारस में हुआ था।  शाहिद 1980 में मास्को में हुए ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे।

इसके अलावा वह 1982 के एशियन गेम्स में रजत पदक और 1986 के एशियाड खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा भी रहे। उन्हें 1980-81 में अर्जुन पुरस्कार और 1986 में पद्मश्री से सम्मानित किया था।  
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