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कुत्ते की तरह भौंकने वाला छात्र हुआ ठीक: एंटीबॉडी की होगी जांच, इंजेक्शन के 7 डोज लगे थे; खत्म हुआ इंफेक्शन

Sun, 23 Aug 2026 01:05 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर।
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 23 Aug 2026 01:05 AM IST
सार

दिसंबर 2025 में कुत्ते के काटने के बाद रैबिज से संक्रमित हुआ छात्र अब स्वस्थ हो गया है। मार्च 2026 में उसमें बीमारी के लक्षण दिखे और वह कुत्ते की तरह भौंकने लगा था। जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अरुण वर्मा ने बताया कि रैबिज का असर मस्तिष्क तक पहुंचने के बाद बचना मुश्किल होता है। अब एंटीबॉडी की जांच होगी।

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Student who was barking like a dog recovers; antibody test to be conducted.
पिता भाईलाल के साथ करन। - फोटो : संवाद

विस्तार

कछवां के जागीपुर वार्ड में मार्च में कुत्ते की तरह भौंकने वाला छात्र करन अब ठीक हो गया है। वह सामान्य बच्चों की तरह स्कूल जा रहा है। परिजनों का दावा है कि बीएचयू से जवाब मिलने के बाद वे उसे वाराणसी के हरहुआ सीएचसी ले गए, जहां उसे इंजेक्शन के सात डोज लगाए गए। इसके बाद वह ठीक हो गया। जिले के डॉक्टर के मुताबिक ब्रेन में रैबिज पहुंचने के बाद बचना मुश्किल है, लेकिन करन कैसे बचा, यह जांच का विषय है।

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मार्च में जागीपुर वार्ड निवासी भाईलाल का 17 वर्षीय पुत्र करन अचानक कुत्ते की तरह भौंकने लगा। इसके बाद उसे उपचार के लिए मंडलीय अस्पताल लाया गया। वहां से उसे बीएचयू भेजा गया। वहां डॉक्टर ने घर ले जाने के लिए कहा। परिजन उसे घर न ले जाकर ननिहाल वाराणसी के हरहुआ लेकर गए। वहां सीएचसी में इलाज कराया।
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जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अरुण वर्मा ने बताया कि कुत्ते की तरह भौंकने वाले छात्र का पता चलने पर जांच कराई गई थी। उसे बीएचयू भेजा गया था। जांच-पड़ताल में शरीर पर कुत्ते के काटने के निशान नहीं मिले थे। कछवां सीएचसी में रैबिज का इंजेक्शन लगवाने की बात की जांच करने पर पता चला कि सीएचसी कछवां में कोई इंजेक्शन नहीं लगवाया गया था।

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पूछताछ में उस समय किसी घर के सदस्य ने कहा था कि फेल होने के चलते इस तरह का नाटक कर रहा है। इसके बाद उसे इलाज के लिए बीएचयू भेजा गया था। वहां से उसे घर ले जाकर सुरक्षित रखने को कहा गया था, क्योंकि रैबिज का असर ब्रेन में पहुंचने के बाद बचना मुश्किल है। हाइड्रोफोबिया का असर दिखा था।

हाइड्रोफोबिया में पानी से डर लगता है। अब अगर सात डोज लगाने से बचने का दावा किया जा रहा है तो पूरा प्रकरण जांच का विषय है। इसमें कई बातें हो सकती हैं। पहला, रैबिज का ब्रेन में पहुंचने पर बचना मुश्किल है। दूसरा, यह हो सकता है कि जिस कुत्ते ने काटा हो, उसे रैबिज का इंजेक्शन लगा हो, इसलिए असर देर से हुआ।

चार की जगह सात इंजेक्शन कैसे लगे
डॉ. अरुण वर्मा ने कहा कि रैबिज के चार इंजेक्शन लगते हैं, ऐसे में सात कैसे लग गए, यह भी जांच का विषय है। एंटीबॉडी की जांच कराने पर पता चलेगा कि क्या हुआ। करन का फॉलोअप उनके द्वारा किया जा रहा था। अब कुत्ते ने काटा या नहीं काटा, काटने के बाद रैबिज का इंजेक्शन लगा तो क्या असर हुआ, यह सब जांच का विषय है। उसकी रैबिज एंटीबॉडी टेस्ट कराया जाएगा। इससे यह पता चलेगा कि शरीर में रैबिज वायरस के खिलाफ पर्याप्त प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया बनी है या नहीं।

हरहुआ सीएचसी के डॉक्टर ने बताया, सर्विलांस के जरिये आइसोलेट करने का मिला था निर्देश
करन के पिता भाईलाल ने बताया कि बीएचयू से ट्रॉमा सेंटर और फिर कबीरचौरा अस्पताल गए। कबीरचौरा में पानी डालने पर वह कांपने लगा। जीभ निकालने लगा। बताया गया कि चार-पांच दिन का मेहमान है। उसे कोठरी में बंद कर दो। तब ससुराल से फोन इलाज कराने को कहा। वहां एक व्यक्ति से बात की तो उसने कहा कि छह महीने नहीं बीते हैं, चार महीने बीता है, रैबिज का इंजेक्शन लगवाओ।

20 दिसंबर को कुत्ते ने काटा था
करन ने बताया कि वह आठ दिसंबर को मामा के निधन पर हरहुआ स्थित अपने ननिहाल गया था। वहां 20 दिसंबर 2025 को तेरहवीं के भोज में कुत्ते ने काटा था। 13 मार्च 2026 को उसकी तबीयत खराब हुई।

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