{"_id":"66b8b9840dd2652d01015c98","slug":"hockey-player-jagriti-yadav-selected-in-mp-state-women-hockey-academy-of-excellence-gwalior-2024-08-11","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"संघर्षों को पार कर हासिल किया मुकाम: घर-घर पहुंचाती थीं मां के सिले कपड़े, एमपी एकेडमी में हुआ इस बेटी का चयन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संघर्षों को पार कर हासिल किया मुकाम: घर-घर पहुंचाती थीं मां के सिले कपड़े, एमपी एकेडमी में हुआ इस बेटी का चयन
Sun, 11 Aug 2024 06:45 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Sun, 11 Aug 2024 06:45 PM IST
सार
काशी की बेटी हॉकी खिलाड़ी जागृति यादव का चयन एमपी एकेडमी में हुआ है।जागृति ने संघर्षों को पार कर यह मुकाम हासिल किया है।
विज्ञापन
हॉकी खिलाड़ी जागृति यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मीरापुर बसही की हॉकी खिलाड़ी जागृति यादव का चयन ग्वालियर के एमपी स्टेट महिला हॉकी एकेडमी ऑफ एक्सीलेंस में हुआ है। जागृति ने यह मुकाम काफी संघर्ष के बाद हासिल की है। 2021 से हॉकी खेल रही जागृति ने हॉकी खेलने के लिए मां के साथ सिलाई में हाथ बंटाया। लोगों के कपड़े घर पहुंचाने का काम किया। पैसे जोड़कर हॉकी किट खरीदी। अब हॉकी के राष्ट्रीय की एकेडमी में चयनित हुईं।
विज्ञापन
हॉकी कोच शशिकांत सिंह ने बताया कि जागृति से उनकी मुलाकात रानी मुरार इंटर कॉलेज के खेल मैदान पर हुई। इसके बाद उन्होंने उसे ट्रेंड किया। चार महीने के अभ्यास के बाद जागृति सब जूनियर टीम में खेलने लगी। एक साल में तीन प्रादेशिक और एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। 13 से अधिक मुकाबले में आठ स्वर्ण पदक वह जीत चुकी हैं। इसके बाद एकेडमी के लिए ट्रायल दिया और चयनित हुईं।
विज्ञापन
जागृति की मां प्रमिला देवी ने बताया कि उनकी कमाई का मुख्य जरिया सिलाई है। घर चलाने के साथ बेटी के लिए किट खरीदना बड़ा काम था। इसके लिए अतिरिक्त घंटे काम करना पड़ता था। एमपी एकेडमी में चयनित होने पर कॉलेज के प्रधानाचार्य रमेश सिंह, सतीश नारायण सिंह, धीरेंद्र सिंह, अभिनव राय, सौरभ सिंह ने खुशी का इजहार किया।
यूपी कॉलेज से शुरू किया हॉकी का सफर
हॉकी कोच शशिकांत सिंह ने बताया कि जागृति ने यूपी कॉलेज से पढ़ाई की है। नौवीं में कई बार घरेलू मैदान पर बालक और बालिका वर्ग में मैच होते थे। जागृति तीन से चार गोल अकेले कर जाती थीं। स्कूल खत्म होने के बाद भी मैदान पर घंटों अभ्यास करती थीं। शाम को बीना नागा मैदान पर हॉकी खेलती थीं। हॉकी के प्रति जुनून से ही वह कामयाब हुई हैं।
यूपी कॉलेज से शुरू किया हॉकी का सफर
हॉकी कोच शशिकांत सिंह ने बताया कि जागृति ने यूपी कॉलेज से पढ़ाई की है। नौवीं में कई बार घरेलू मैदान पर बालक और बालिका वर्ग में मैच होते थे। जागृति तीन से चार गोल अकेले कर जाती थीं। स्कूल खत्म होने के बाद भी मैदान पर घंटों अभ्यास करती थीं। शाम को बीना नागा मैदान पर हॉकी खेलती थीं। हॉकी के प्रति जुनून से ही वह कामयाब हुई हैं।