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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Hindu side divided in Gyanvapi-Shringar Gauri case complaint on Vishwa Vedic Sanatan Sangh chief

Varanasi: ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में हिंदू पक्ष बंटा, विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख सहित दो पर परिवाद

Sat, 11 Feb 2023 01:13 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 11 Feb 2023 01:13 PM IST
सार

ज्ञानवापी-मां श्रृंगार गौरी केस की पांच वादिनी महिलाएं दो धड़े में बंटीं हैं।  एक धड़े में रेखा पाठक, मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी और सीता साहू हैं। दूसरे धड़े में राखी सिंह हैं। राखी सिंह के पैरोकार जितेंद्र सिंह विसेन हैं। 

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Hindu side divided in Gyanvapi-Shringar Gauri case complaint on Vishwa Vedic Sanatan Sangh chief
विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह विसेन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी कुमार की अदालत ने मां श्रृंगार गौरी केस के पैरोकार और विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह विसेन समेत दो के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही परिवादी चार महिलाओं का बयान दर्ज करने के लिए तीन मार्च की तिथि तय की है। अदालत ने पिछले दिनों आदेश के लिए पत्रावली सुरक्षित रख ली थी। 

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ज्ञानवापी-मां श्रृंगार गौरी केस की पांच वादिनी महिलाएं दो धड़े में बंटीं हैं।  एक धड़े में रेखा पाठक, मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी और सीता साहू हैं। दूसरे धड़े में राखी सिंह हैं। राखी सिंह के पैरोकार जितेंद्र सिंह विसेन हैं। रेखा पाठक, मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी और सीता साहू ने जितेंद्र सिंह विसेन के खिलाफ प्रार्थना पत्र दाखिल किया।

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महिला वादियों को धमकाने का आरोप

चारों महिलाओं का आरोप है कि मां श्रृंगार गौरी मुकदमे की पावर ऑफ अटार्नी मुख्यमंत्री को सौंपने के लिए जितेंद्र सिंह विसेन ने उन्हें धमकाया। मुकदमे की सुनवाई के लिए जाने के दौरान कचहरी परिसर में उनके साथ गालीगलौज की गई।

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पढ़ें: सोहन लाल आर्य ने जितेंद्र विसेन पर दर्ज कराया मुकदमा, ज्ञानवापी प्रकरण के हिंदू पक्षकार आमने-सामने

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रार्थना पत्र देने वाली चारों महिलाओं को घटना की पूरी जानकारी है। चारों महिलाएं कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुत कर उसे साबित कर सकती हैं।

इस मामले में कोई ऐसा तथ्य नहीं है जिसकी विवेचना पुलिस से कराने की आवश्यकता हो। ऐसे में चारों महिलाओं के प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज किया जाता है।

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