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कोई भी हिंदू अब बन सकता है पुजारी, राम मंत्र लेने के साथ ही रखना होगा इस बात का ध्यान
Tue, 05 Mar 2019 11:31 AM IST
Sayali Maurya
आलोक कुमार त्रिपाठी,अमर उजाला,वाराणसी
आलोक कुमार त्रिपाठी,अमर उजाला,वाराणसी
Published by: Sayali Maurya
Updated Tue, 05 Mar 2019 11:31 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
संत कबीर, संत रैदास और संत तुलसीदास ने काशी से छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार कर देश और समाज को नई दृष्टि दी थी। अब इसे आगे बढ़ाते हुए सभी जाति के लोगों को पुजारी बनाने की पहल शुरू की गई है।
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पातालपुरी मठ में महाशिवरात्रि से जातिगत भेदभाव मिटाने और सनातन संस्कृति की जड़ें मजबूत करने के लिए वैदिक विद्वानों द्वारा धर्माधिकारी बनने का प्रशिक्षण शुरू हो गया है। राम नाम मंत्र की दीक्षा के साथ महाशिवरात्रि पर विशेष संयोग में 60 लोगों ने प्रशिक्षण का संकल्प लिया। इसमें चंदौली, घोरावल, भदोही, गोरखपुर तथा वाराणसी के आसपास के लोग शामिल हुए। दीक्षा व पूजन के उपरांत इन सभी लोगों के प्रशिक्षण की शुरूआत हो गई।
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पातालपुरी मठ के महंत स्वामी बालक दास ने बताया कि राम मंत्र देकर सनातन धर्म को सशक्त करने और जातीय भेदभाव मिटाने के लिए महाशिवरात्रि पर इस अभियान की शुरूआत हो चुकी है। अभी तक डेढ़ सौ से ज्यादा आवेदन मिले हैं। यह अभियान पूरे देश में चलाने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश के बाद, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में इसी तरह का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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यह प्रशिक्षण तीन महीने तक दिया जाएगा। इसके तहत धर्माधिकारी का प्रशिक्षण लेने वालों को राम स्तुति, श्रीकृष्ण स्तुति, हनुमान चालीसा पाठ, पूजा विधि का प्रशिक्षण वैदिक विद्वानों द्वारा दिया जाएगा। धर्माधिकारी बनने के लिए आवेदन करने वालों के सामने यह शर्त रखी गई है कि वह सनातन धर्म का पालन करेंगे। मांस-मदिरा से दूर रहने के साथ ही स्वच्छता पर भी ध्यान देंगे।
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ऐसे करना होगा सनातन धर्म का पालन
धर्माधिकारी बनने के लिए सनातन धर्म का पालन आवश्यक होगा। इच्छुक व्यक्ति को मांस-मदिरा से दूर रहने के साथ ही स्वच्छता पर भी ध्यान देना होगा। प्रशिक्षण के उपरांत धर्माधिकारी अपनी जमीन पर मंदिर का निर्माण कराएगा। इसी मंदिर में उसको पुजारी नियुक्त किया जाएगा। आने वाले दिनों में मंदिर की आय के हिसाब से पुजारियों को वेतन भी दिया जाएगा।