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Varanasi News: ज्ञानवापी उर्स मामले में निगरानी अर्जी पर सुनवाई टली, अब सुनवाई 25 फरवरी को
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वाराणसी। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अनिल कुमार शुक्ला की अदालत में सोमवार को ज्ञानवापी परिसर में उर्स करने और मजार पर चादर चढ़ाने के मामले में दाखिल निगरानी अर्जी पर सुनवाई नहीं हो सकी। अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 फरवरी की तिथि तय की है।
यह निगरानी अर्जी मुख्तार अहमद द्वारा सत्र न्यायालय में दाखिल की गई है। मुख्तार ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कुछ हिंदू पक्षकारों को वाद में तृतीय पक्षकार बनाए जाने की अनुमति दी गई थी। बताया गया कि फरवरी माह में सिविल जज सीनियर डिवीजन (फास्ट ट्रैक कोर्ट) की अदालत ने मुख्तार अहमद के उस वाद में, जिसमें ज्ञानवापी परिसर में उर्स करने तथा कथित अदृश्य मजार पर चादर चढ़ाने की अनुमति मांगी गई थी, हिंदू पक्ष के कुछ लोगों को पक्षकार बनाने का आवेदन स्वीकार कर लिया था। इसी आदेश के खिलाफ मुख्तार ने निगरानी अर्जी दाखिल की थी।
सुनवाई के दौरान निगरानी कर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि निचली अदालत ने इस मामले में सरसरी तरीके से आदेश पारित किया है। जिन लोगों को पक्षकार बनाया गया है, उनका इस वाद से कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता है और न ही उनके पक्ष में कोई दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं। वहीं, मुख्तार अहमद की ओर से कहा गया कि वे ज्ञानवापी परिसर में स्थित तीन दृश्य मजारों तथा एक अदृश्य मजार पर पूर्व से ही चादर चढ़ाते आ रहे हैं, फातिहा पढ़ते हैं और हर वर्ष उर्स का आयोजन करते रहे हैं। ब्यूरो
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यह निगरानी अर्जी मुख्तार अहमद द्वारा सत्र न्यायालय में दाखिल की गई है। मुख्तार ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कुछ हिंदू पक्षकारों को वाद में तृतीय पक्षकार बनाए जाने की अनुमति दी गई थी। बताया गया कि फरवरी माह में सिविल जज सीनियर डिवीजन (फास्ट ट्रैक कोर्ट) की अदालत ने मुख्तार अहमद के उस वाद में, जिसमें ज्ञानवापी परिसर में उर्स करने तथा कथित अदृश्य मजार पर चादर चढ़ाने की अनुमति मांगी गई थी, हिंदू पक्ष के कुछ लोगों को पक्षकार बनाने का आवेदन स्वीकार कर लिया था। इसी आदेश के खिलाफ मुख्तार ने निगरानी अर्जी दाखिल की थी।
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सुनवाई के दौरान निगरानी कर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि निचली अदालत ने इस मामले में सरसरी तरीके से आदेश पारित किया है। जिन लोगों को पक्षकार बनाया गया है, उनका इस वाद से कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता है और न ही उनके पक्ष में कोई दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं। वहीं, मुख्तार अहमद की ओर से कहा गया कि वे ज्ञानवापी परिसर में स्थित तीन दृश्य मजारों तथा एक अदृश्य मजार पर पूर्व से ही चादर चढ़ाते आ रहे हैं, फातिहा पढ़ते हैं और हर वर्ष उर्स का आयोजन करते रहे हैं। ब्यूरो
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