जिले के सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था इन दिनों बेपटरी हो गई है। यहां एनएचएम के डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ तीन दिन से सेवा नहीं दे रहे हैं। इस वजह से मरीजों के जांच, इलाज के साथ ही बच्चों के टीकाकरण सहित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की व्यवस्था भी प्रभावित हो गई है। शनिवार को भी डॉक्टर, स्टाफ कामकाज छोड़कर सीएमओ कार्यालय पर धरने पर बैठे रहे। इसमें ओपीडी में तो ज्यादा असर नहीं पड़ा लेकिन भर्ती मरीजों के देखभाल संबंधी सेवा ज्यादा प्रभावित हुई है।
एनएचएम के तहत संविदा डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती अस्पताल के साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों पर की गई है। इसमें ज्यादातर लोगों के पास टीकाकरण के साथ ही बच्चों में बीमारियों की पहचान कर उनका निशुल्क इलाज कराने की जिम्मेदारी है। एनएचएम से जुड़े अधिकांश स्वास्थ्य कर्मी(डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ)आरबीएसके यानी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का हिस्सा हैं। समान काम-समान वेतन, नियमितीकरण, कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ की ओर से की जा रही है। इसे लेकर 5 से 7 अक्तूबर तक कालीपट्टी बांधकर काम करने के बाद 8 से 10 अक्तूबर तक कामकाज छोड़ धरना, प्रदर्शन चला। शनिवार को भी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ ने काम नहीं किया। इधर 100 से ज्यादा डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन, एएनएम, स्टाफ नर्स ने सीएमओ कार्यालय पर प्रदर्शन किया। संघ के जिलाध्यक्ष संदीप कुमार सिंह ने कहा कि सीएमओ से मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की गई। 12 अक्तूबर से लखनऊ में प्रदेश के सभी जिलों से संघ से जुड़े लोग हिस्सा लेंगे।