राग से होंगे रोग मुक्त, संगीत में शामिल हर राग का पड़ता है अलग-अलग प्रभाव
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गीत-संगीत ऐसी विधा है, जिससे दिल को चैन, मन को सुकून और तनाव से मुक्ति मिल सकती है। विचार और भावनाओं की उठापटक से शरीर में पैदा होने वाली विकृतियों को दूर करने में संगीत की भूमिका अहम है। इसे देखना हो तो छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ साल्हेवारा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आना होगा, जहां संगीत से मरीजों का इलाज किया जा रहा है। अस्पताल में उच्च रक्तचाप, अवसाद, तनाव का इलाज संगीत थिरैपी से किया जाता है।
संगीत विशेषज्ञों के मुताबिक राग भैरवी, राग ललित, राग जौनपुरी का सीधा संबंध स्वास्थ्य से है। मानसिक बीमारी में दवाओं से ज्यादा प्रभाव संगीत का पड़ता है। दर्द दूर करने में म्यूजिक थैरेपी खासी असरकारी है।
संगीत में हर राग का अपना अलग महत्व है। सुबह के समय राग भैरवी, दोपहर में तोड़ी और शाम को जय-जयवंती राग अलग-अलग प्रभाव बनाती है और मानसिक विकृतियों को दूर करती है। संगीत की भाषा में कहा जाए तो मनुष्य के अंदर एक नहीं बल्कि दो ब्रेन होते हैं। एक तो सर्वविदित है और दूसरा पेट है। दोनों ब्रेन संगीत में एक-दूसरे को सिग्नल देते हैं।
संगीत से रक्तचाप, दिल की बीमारियों में राहत, थकान और तनाव में राहत के साथ-साथ एकाग्रता भी बढ़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह उठकर भजन और कर्णप्रिय संगीत सुनने से दिनचर्या की शुरुआत अच्छी होती है। मन में प्रसन्नता आती है और अवसाद से राहत मिलती है। यदि रात को नींद न आए तो सुमधुर संगीत को सुनने से अच्छी नींद आती है। इसे हर किसी ने कभी न कभी जरूर अनुभव किया होगा।
तबला बादक पंडित राजेश मिश्र का कहना है कि शास्त्रीय संगीत स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है। गीत-संगीत वह दवा जिसका कोई मोल नहीं है। तनाव से मुक्ति के लिए आदमी संगीत का ही सहारा लेता है।
वहीं डॉ. अमर अनुपम कहते हैं कि संगीत आत्मीयता का एहसास कराता है। इसके श्रवण मात्र से तनाव और मानसिक विकार दूर होते हैं। इसके लय और ताल लोगों को अंदर से आह्लादित करते हैं।