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बीएचयू में बोले राज्यसभा के उपसभापति, कालेधन के खिलाफ ठोस नीति बनाने की जरूरत
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 05 Sep 2018 10:09 AM IST
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बीएचयू में बोलते राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह
- फोटो : amar ujala
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बीएचयू के अर्थशास्त्र विभाग में मंगलवार को आयोजित विशेष व्याख्यान में वक्ताओं ने अर्थव्यवस्था के समसामयिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बतौर मुख्य वक्ता विभाग के पुरातन छात्र और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि वर्तमान में आर्थिक-सामाजिक चुनौतियां बहुत हैं। इस तरह की चुनौतियों पर शोध करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि कालेधन के खिलाफ नीति बनानी होगी, भले ही इसका परिणाम राजनीतिक रूप से हानिकारक हो। अर्थशास्त्र विभाग के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत ‘भारतीय अर्थव्यवस्था के समसामयिक मुद्दे’ विषयक व्याख्यान में उन्होंने कहा कि अगर चुनौतियों पर शोध कर उसका सही निष्कर्ष निकाला जाए तो विकास के मार्ग में कोई अवरोध आएगा ही नहीं।
आर्थिक चिंतन को भारतीय मनीसा के उस चिंतन से जोड़ना होगा जो अति उपभोक्तावाद के विपरीत उत्पादन को सीमित करे और पर्यावरण का संरक्षण कर सके साथ ही समतामूलक विवरण सुनिश्चित करे।
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उन्होंने आर्थिक विकास के लिए सभी को नियमानुसार कर का भुगतान करने का आह्वान किया। उन्होंने जीएसटी को आर्थिक एकीकरण के महत्वपूर्ण साधन के रूप में बताया जो पूरे देश में एक समान कर की व्यवस्था करता है। इस दौरान उन्होंने गुरुओं को स्मृति चिह्न, अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. हरिकेश सिंह ने आर्थिक विकास के मुद्दे पर खुलकर चर्चा की।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने इस आयोजन की सराहना करते हुए अर्थशास्त्र विषय पढ़ने की रुचि रखने वालों के लिए स्नातक में इस विषय की बाध्यता को खत्म करने का सुझाव दिया। कहा कि इससे अधिक से अधिक लोगों को आर्थिक नीतियों के बारे में जानकारी हो सकेगी।
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उन्होंने कहा कि कालेधन के खिलाफ नीति बनानी होगी, भले ही इसका परिणाम राजनीतिक रूप से हानिकारक हो। अर्थशास्त्र विभाग के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत ‘भारतीय अर्थव्यवस्था के समसामयिक मुद्दे’ विषयक व्याख्यान में उन्होंने कहा कि अगर चुनौतियों पर शोध कर उसका सही निष्कर्ष निकाला जाए तो विकास के मार्ग में कोई अवरोध आएगा ही नहीं।
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आर्थिक चिंतन को भारतीय मनीसा के उस चिंतन से जोड़ना होगा जो अति उपभोक्तावाद के विपरीत उत्पादन को सीमित करे और पर्यावरण का संरक्षण कर सके साथ ही समतामूलक विवरण सुनिश्चित करे।
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उन्होंने आर्थिक विकास के लिए सभी को नियमानुसार कर का भुगतान करने का आह्वान किया। उन्होंने जीएसटी को आर्थिक एकीकरण के महत्वपूर्ण साधन के रूप में बताया जो पूरे देश में एक समान कर की व्यवस्था करता है। इस दौरान उन्होंने गुरुओं को स्मृति चिह्न, अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. हरिकेश सिंह ने आर्थिक विकास के मुद्दे पर खुलकर चर्चा की।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने इस आयोजन की सराहना करते हुए अर्थशास्त्र विषय पढ़ने की रुचि रखने वालों के लिए स्नातक में इस विषय की बाध्यता को खत्म करने का सुझाव दिया। कहा कि इससे अधिक से अधिक लोगों को आर्थिक नीतियों के बारे में जानकारी हो सकेगी।