फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Hanumat Darbar was struck with the saptasur of singing and playing in varanasi

वाराणसी : गायन और वादन के सप्तसुरों से झंकृत हुआ हनुमत दरबार

Fri, 07 May 2021 12:30 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 07 May 2021 12:30 AM IST
सार

पद्मभूषण पं. देबू चौधरी को समर्पित रही छठवीं निशा
संकटमोचन संगीत समारोह में ऑनलाइन हुए आयोजन

विज्ञापन
Hanumat Darbar was struck with the saptasur of singing and playing in varanasi
संकट मोचन संगीत समारोह में कलाकार गायक पंडित नीरज पारिख अहमदाबाद से जुड़े। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी में  संकटमोचन संगीत समारोह की छठवीं निशा सितारवादक पद्मभूषण स्व. पं. देबू चौधरी को समर्पित रही। कार्यक्रम का शुभारंभ पं. देबू चौधरी के पिछले साल संकटमोचन दरबार में दी गई प्रस्तुति के वीडियो रिकॉर्डिंग के प्रदर्शन से हुआ। पं. देबू चौधरी ने 2020 के संकटमोचन संगीत समारोह में पुत्र और पौत्र के साथ पहली बार हनुमत लला के दरबार में हाजिरी लगाई थी। 
विज्ञापन


उन्होंने कहा था कि जीवन में पहला मौका है जब मैं बाबा के दरबार में अपने पुत्र प्रतीक चौधरी और पौत्र अधिराज चौधरी के साथ संगीत की श्रद्धा निवेदित कर रहा हूं। संकट मोचन संगीत समारोह के 97वें संस्करण की प्रथम निशा के आरंभ होने के कुछ ही मिनटों पहले कोरोना संक्रमण के कारण वह जिंदगी की जंग हार गए थे। कार्यक्रम की दूसरी प्रस्तुति में भुवनेश्वर से ऑनलाइन हुए पं. रतिकांत महापात्रा ने अपनी टीम के साथ ओडिसी नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दी। बाली वध के प्रसंग को उनकी टीम ने नृत्य के माध्यम से मंत्रमुग्ध करने वाला प्रदर्शन किया। पारंपरिक ओडिसी की सामूहिक प्रस्तुति से उन्होंने समापन किया। 
विज्ञापन

 

Hanumat Darbar was struck with the saptasur of singing and playing in varanasi
संकट मोचन संगीत समारोह में मुंबई से विख्यात बांसुरी वादक पंडित रूपक कुलकर्णी अपनी हाज़िरी हेतु जुड़ें। उन्होंने राग बागेश्री की अवतारणा की - फोटो : अमर उजाला

तीसरी प्रस्तुति में धारवाड़ से किराना घराने के कलाकार विजय पाटिल ऑनलाइन जुड़े। उन्होंने राग शंकरा में अनहत नाद महिमा बखानी...की मधुर प्रस्तुति ने आभासी दुनिया के श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। आलापचारी और रागदारी से उन्होंने श्रोताओं के अंतर्मन को छूने का सफल प्रयास किया। इसके बाद विजय पाटिल ने बोल बनाव की ठुमरी जाओ सइयां न बोलो मोसे..., रंग रंगीला छैल छबीला श्याम मोरा...और सांवरे आ जइयो जमुना किनारे मोरा गांव....के माध्यम से श्रोताओं की प्रशंसा बटोरी। उनके साथ तबले पर केशव जोशी, तानपुरा पर अशोक पाटिल और हारमोनियम पर वसव राज ने संगत की। 

छठी निशा की चौथी प्रस्तुति में मुंबई से जुड़े युवा कलाकार एस. आकाश की मोहक बांसुरी वादन को श्रोताओं ने खूब पंसद किया। गायिकी अंग के वादन में गुरु पं. जयतीर्थ मेवुंडी का असर श्रोताओं ने भी महसूस किया। इसके पूर्व संगीत समारोह की पांचवीं निशा की चौथी प्रस्तुति में मेवाती घराने के सातवीं पीढ़ी के युवा कलाकार स्वर रतन शर्मा मुंबई से गायन की प्रस्तुति के लिए जुड़े। उन्होंने राग छाया नट में विलंबित एक ताल एवं दु्रत लय तीनताल की बंदिश की प्रस्तुति दी। 
इसके बाद अगली प्रस्तुति बांसुरी वादन की रही। मुंबई से विख्यात बांसुरी वादक पंडित रूपक कुलकर्णी जुड़े। उन्होंने राग बागेश्री की अवतारणा की। इसके बाद अहमदाबाद से गायक पं. नीरज पारिख ऑनलाइन हुए।  पं. जसराज के शिष्य पं. पारिख ने राग बिहाग में विलंबित एकताल एवं मध्य लय तीनताल में जसराज जी की रचना गाकर हनुमत दरबार में हाजिरी लगाई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed