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Gynavapi Survey: GPR से बिना खोदाई के सच आएगा सामने, IIT कानपुर की टीम तैयार, प्रो. जावेद मलिक करेंगे नेतृत्व
Sat, 05 Aug 2023 01:04 PM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Sat, 05 Aug 2023 01:04 PM IST
सार
वाराणसी में ज्ञानव्यापी परिसर का राज जानने के लिए एएसआई सर्वे कर रही है। परिसर के अंदर मूर्तियों व कृतियों से पता लगाया जा सकेगा कि यह कितनी पुरानी है। एएसआई ने आईआईटी कानपुर के अर्थ साइंस विभाग के वैज्ञानिक प्रो. जावेद मलिक से मदद मांगी थी।
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Prof. Javed N. Malik
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ज्ञानव्यापी के सर्वे की अनुमति कोर्ट से मिल गई है। सर्वे करने वाली आईआईटी कानपुर की टीम को अब सिर्फ एएसआई के बुलावे का इंतजार है। एएसआई की ओर से जानकारी मिलते ही प्रो. जावेद मलिक की अगुवाई वाली टीम वाराणसी पहुंचेगी और सर्वे का काम शुरू करेगी। वैज्ञानिक की टीम जीपीआर तकनीक की मदद से सर्वे करेगी। जिसमें किसी तरह की खुदाई करने की आवश्यकता नहीं होगी। टीम बिना खुदाई किए ही जमीन के अंदर की वस्तुओं की पहचान उजागर कर सकेगी।
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वाराणसी में ज्ञानव्यापी परिसर का राज जानने के लिए एएसआई सर्वे कर रही है। परिसर के अंदर मूर्तियों व कृतियों से पता लगाया जा सकेगा कि यह कितनी पुरानी है। एएसआई ने आईआईटी कानपुर के अर्थ साइंस विभाग के वैज्ञानिक प्रो. जावेद मलिक से मदद मांगी थी। प्रो. मलिक ने अपनी टीम के साथ सर्वे की तैयारी कर ली। जीपीआर तकनीक में प्रयुक्त होने वाले सभी उपकरण भी तैयार कर लिए। तभी हाईकोर्ट ने सर्वे पर रोक लगा दिया। गुरुवार को कोर्ट से सर्वे की अनुमति मिल गई है। एएसआई से बुलावा आते ही टीम वाराणसी को रवाना होगी।
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जीपीआर तकनीक में नहीं होती खुदाई
प्रो. मलिक के मुताबिक जीपीआर (ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार) एक ऐसी तकनीक है, जिसकी मदद से जमीन या ढांचे को बगैर कोई नुकसान पहुंचाएं उसके नीचे दबी वस्तुओं की पहचान की जा सकती है। तकनीक बता देती है कि वस्तु कंक्रीट, धातु, पाइप, केबल या अन्य धातु से बनी है। इस तकनीक में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन की मदद से ऐसे सिग्नल मिलते हैं जिससे जमीन के नीचे वस्तु या ढांचे का आकार भी पता चल जाता है। इससे 2डी व 3डी प्रोफाइल्स तैयार की जाएंगी। इस तकनीक से जमीन के नीचे 8 या 10 मीटर की गहराई तक की वस्तुओं का आकार पता लगाया जा सकता है।