Gyanvapi Survey: ज्ञानवापी मस्जिद की दीवार पर बने फूल दीन ए इलाही के प्रतीक, मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव का दावा
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एमएस यासीन का कहना है कि ज्ञानवापी मस्जिद है और मस्जिद ही रहेगी। उनका दावा है कि इसको अकबर ने बनवाया था। दीवार पर बने फूल दीन ए इलाही के प्रतीक हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव और ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाले एमएस यासीन का कहना है कि ज्ञानवापी मस्जिद है और मस्जिद ही रहेगी। कानूनी प्रक्रिया चलती रहेगी। हम रिपोर्ट में देखेंगे कि क्या है। इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए जहां भी उचित होगा, वहां जाएंगे। हम मस्जिद के लिए हमेशा लड़ते रहेंगे। यहां से अपील खारिज होगी तो आगे तक जाएंगे। यह काशी की जामा मस्जिद है। यही कारण है कि यहां मुफ्ती ए शहर नमाज अदा कराते हैं।
1922 में मस्जिद की देखरेख करने के लिए अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी बनाई गई थी। एमएस यासीन का कहना कि 1937 में ही कोर्ट ने मान लिया था कि ज्ञानवापी वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। इतने दिन बाद इसको लेकर एक बार फिर विवाद उचित नहीं है।
शिवलिंग को फव्वारा बताने का कारण बताया
उनका दावा है कि इसको अकबर ने बनवाया था। दीवार पर बने फूल दीन ए इलाही के प्रतीक हैं। यह हिंदू मुस्लिम एकता के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि इसी दीवार का औरंगजेब ने फिर से जीर्णोद्धार कराया था। शिवलिंग के पास मिले फव्वारे पर उनका मानना है कि यह फव्वारा ही है। शिवलिंग में सुराख नहीं होता है। ज्ञानवापी में जो कुआं मिला है, उसकी गहराई उन्होंने 30 से 40 फीट बताई।
उनका कहना कि इस फव्वारे में उसी कुएं से मोटर लगाकर पानी की सप्लाई की जाती है। यासीन का मानना है कि पिछले दो साल पहले जब उन्होंने वहां पर सफाई कराई थी तो वहां पर कुछ नहीं मिला था। सभी मस्जिदों में इसलिए फव्वारे बनाए जाते हैं कि पानी गर्म नहीं हो। आप चाहे दिल्ली चले जाए या देश के किसी अन्य हिस्से में।
मस्जिदों में वजू के लिए बने जगह पर फव्वारे आपको दिख जाएंगे। शृंगार गौरी को लेकर उन्होंने कहा कि वहां जब भी कोई पूजा करना चाहे, कर सकता है। यह मंदिर मस्जिद से दूर है और बैरिकेडिंग से बाहर है। वहां पूजा करने पर मुस्लिम समाज को कोई एतराज नहीं है।
मस्जिद के ठीक पीछे दो कब्रें हैं
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव का कहना कि ज्ञानवापी मस्जिद के ठीक पीछे पश्चिम की ओर दो कब्रें हैं। पहले यहां पर हर साल सालाना उर्स होता था, लेकिन अब उर्स नहीं होता है। यहां पर जब से मस्जिद बनी है तब से नमाज पढ़ी जा रही है। उनका कहना कि मस्जिद में जो भी ईंटें और मैटिरियल लगे हैं, सब इसी जगह के हैं। दूसरे देशों से कुछ नहीं मंगाया गया है। बेवजह लोग इसके बारे में गलत प्रचार कर रहे हैं। लोगों को आपसी सौहार्द के साथ रहना चाहिए।
शिवलिंग को संरक्षित करने के लिए सौंपा ज्ञापन
श्री काशी विश्वनाथ मुक्ति आंदोलन ने ज्ञानवापी परिसर के वजूखाने में मिले शिवलिंग को संरक्षित करने की मांग की है। आंदोलन के अध्यक्ष सुधीर सिंह ने मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपकर सनातनी हिंदुओं की भावनाओं का ख्याल रखते हुए शिवलिंग को संरक्षित करने का अनुरोध किया है।