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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Gyanvapi Survey 24 cases and three surveys in 33 years, ASI gave report for first time in history

Gyanvapi Survey: 33 साल...24 मुकदमे और तीन बार सर्वे, जानें ज्ञानवापी मामले में कब क्या हुआ

Sat, 27 Jan 2024 02:09 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 27 Jan 2024 02:09 PM IST
सार

Gyanvapi Survey: ज्ञानवापी से जुड़े 24 मुकदमे कोर्ट में अभी विचाराधीन हैं। 33 साल से लड़ाई जारी है। तीन बार अधिवक्ता आयुक्त ने सर्वे भी किया। इस मामले में पहली बार एएसआई की सर्वे रिपोर्ट अदालत में दाखिल हुई।

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Gyanvapi Survey 24 cases and three surveys in 33 years, ASI gave report for first time in history
Gyanvapi case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिला और सत्र न्यायालय में ज्ञानवापी से जुड़े 24 मुकदमे विचाराधीन हैं। 33 साल से अदालती लड़ाई जारी है। मगर, बृहस्पतिवार को अब तक के इतिहास में पहली बार एएसआई ने ज्ञानवापी में सर्वे करके रिपोर्ट दी है।
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इससे पहले भी जिला व सत्र न्यायालय की अदालत से एएसआई सर्वे के आदेश हुए थे, मगर उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश के चलते प्रक्रिया ही नहीं शुरू हो पाई थी। हालांकि श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन की मांग वाली याचिका में अधिवक्ता आयुक्त की सर्वे रिपोर्ट को आधार पर मानकर जिला जज की अदालत ने एएसआई सर्वे कराया। 
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अधिवक्ता आयुक्त तीन बार सर्वे कर चुके हैं। ज्ञानवापी परिसर में सबसे पहला सर्वे 28 वर्ष पहले सिविल जज की अदालत में दर्ज एसिएंट आइडल स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर व अन्य के वाद में हुआ था।
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उस वक्त विशेष अधिवक्ता आयुक्त राजेजश्वर प्रसाद सिंह ने भी हिंदू मंदिरों के भग्नावशेष मिलने का दावा किया था। इसके बाद राखी सिंह सिंह बनाम सरकार के वाद में सिविल जज सीनियर डिवीजन के आदेश पर पहले छह और सात मई 2022 को अधिवक्ता आयुक्त ने सर्वे किया। 
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इसके बाद तत्कालीन अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्र के साथ विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह ने 16 मई 2022 को सर्वे किया। तीनों ही अधिवक्ता आयुक्त की रिपोर्ट हिंदू मंदिर के ढांचे को समर्थन करने वाली थी। 

 

एएसआई की सर्वे रिपोर्ट ने 28 साल में हुए तीन कोर्ट कमीशन की रिपोर्ट को भी पुष्ट कर दिया है। वाराणसी की जिला और सत्र न्यायालय की अलग-अलग अदालतों में ज्ञानवापी से जुड़े 24 मुकदमों की सुनवाई हो रही है। 

 

सबसे पहले वर्ष 1991 में दाखिल प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वनाथ बनाम अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी और अन्य के नाम से है। अभी हाल में दिसंबर 2023 में कानपुर की आकांक्षा सहित अन्य चार अन्य ने एक और मामला दाखिल किया है।


 

अहम मुकदमे
साल 2021 में ज्ञानवापी को लेकर साध्वी पूर्णाबा देवी, सत्यम त्रिपाठी, मां श्रृंगार गौरी, नंदी महराज, मां गंगा और लार्ड श्री आदि विश्वेश्वर के छह अन्य मुकदमे भी दाखिल किए। इसी वर्ष राखी सिंह सहित पांच महिलाओं ने श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन का मुकदमा किया।

 

साल 2022 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, विश्व हिन्दू महासभा, आदि विश्वेश्वर विराजमान, मुख्तार अहमद, अविमुक्तेश्वरानंद, प्रभु नारायण, विवेक सोनी, लार्ड ज्योतिर्लिंग, सुधा और मसाजिद कमेटी ने 10 मुकदमे किए।

वर्ष 2023 में लार्ड आदि विश्वेश्वर, शैलेंद्र पाठक, देवेंद्र पाठक, मुख्तार, आई आदि विश्वेश्वर और श्री नंदीजी महजराज विराजमान की ओर से छह मुकदमे दाखिल हुए।
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