ज्ञानवापी-शृंगार गौरी मामला: वादी पक्ष की चार महिलाओं को मिली कमीशन की कार्यवाही की तस्वीरें-वीडियो, अब चार जुलाई को होगी बहस
सुनवाई के दौरान अदालत में मूल देवता प्राचीन ज्योतिर्लिंग भगवान काशी विश्वेश्वर के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी, विश्व हिंदू महासमिति, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा, निर्मोही अखाड़ा, विश्व हिंदू सेना की ओर से मामले में पक्षकार बनाए जाने का अनुरोध किया गया है। इससे पहले कोतवालपुरा निवासी अधिवक्ता चंद्रशेखर सेठ, पूर्व महंत कुलपति तिवारी, लोहता निवासी बुनकर मुख्तार अहमद अंसारी भी पक्षकार बनने का आवेदन कर चुके हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शृंगार गौरी के नियमित दर्शन पूजन व अन्य विग्रहों के संरक्षण के लिए दायर वाद की पोषणीयता (सुनने योग्य है या नहीं) पर सोमवार को भी मुस्लिम पक्ष की दलीलें जारी रहीं। मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता अभय नाथ यादव ने वर्ष 1937 के दीन मोहम्मद बनाम राज्य सचिव के मुकदमे का फैसला भी अदालत में पढ़ा और बताया कि अदालत ने पूरा परिसर मुस्लिमों को सौंपते हुए यहां नमाज अदा करने का अधिकार दिया था। इस दलील के बीच ही अदालत ने अगली तारीख चार जुलाई तय कर दी। इससे पहले वादी पक्ष की चार महिलाओं को कमीशन की कार्यवाही के वीडियो व तस्वीरें मुहैया कराई गईं। इस बीच, इस मामले में पक्षकार बनने के लिए जिला जज की अदालत में नौ याचिकाएं दी जा चुकी हैं।
जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में सोमवार को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से अधिवक्ता अभय नाथ यादव ने दलीलें शुरू कीं। बताया कि वर्ष 1937 में आए अदालत के आदेश में मुस्लिम पक्ष के गवाहों के बयान को देखा जाए। सीपीसी आदेश 7 रूल 11 के तहत दिए गए 52 बिंदुओं के आवेदन में 39 बिंदुओं तक अपनी दलीलें रखी। मां शृंगार गौरी से संबंधित मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है, के दावे के साथ मुस्लिम पक्ष ने दो घंटे तक अपनी दलीलें अदालत में पेश कीं। चार जुलाई को तय अगली तारीख पर मुस्लिम पक्ष की दलीलें जारी रहेंगी और फिर हिंदू पक्ष की जिरह शुरू होगी।
विश्व वैदिक सनातन संघ की राष्ट्रीय महासचिव किरण सिंह के अंतरिम प्रार्थना पत्र पर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने कोई आदेश नहीं पारित किया है। इस मामले में सुनवाई के लिए आठ जुलाई की तारीख तय की गई है। शृंगार गौरी ज्ञानवापी मामले से संबधित आदि विश्वेश्वर विराजमान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मुकदमे में मुस्लिमों का ज्ञानवापी में प्रवेश प्रतिबंधित करने, हिंदुओं को पूजा पाठ का अधिकार दिए जाने की मांग की गई है।
एसीजेएम पंचम की अदालत ने एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी, अखिलेश सहित सात नामजद व 200 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग को खारिज करने के लिए सोमवार को आवेदन दिया गया। मुस्लिम पक्ष के मौलाना अब्दुल वॉकी और सैयद मोहम्मद यासीन की तरफ से अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी ने वाद को खारिज करने की मांग का आवेदन किया, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। 26 मई को अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने साक्ष्य पेश करने के लिए समय मांगा था और अदालत ने इस पर दो जून की तारीख दी थी।