ज्ञानवापी सर्वे के लिए मिली और मोहलत: अदालत में एएसआई ने क्या दलील दी? तीसरी बार बढ़ाई गई समयसीमा
ज्ञानवापी परिसर के सर्वे और उसकी रिपोर्ट जमा करने के लिए एएसआई को जिला जज की अदालत ने चार सप्ताह का समय दे दिया है। एएसआई को पहले छह अक्तूबर तक रिपोर्ट देनी थी।
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वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने गुरुवार को ज्ञानवापी में सर्वे के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को चार सप्ताह का समय और दे दिया। यह अवधि सात अक्तूबर से प्रभावी होगी। अदालत ने कहा कि एएसआई के अधिवक्ता ने बारिश से सर्वे के प्रभावित होने का तर्क दिया है। इससे अदालत भी सहमत है। यह तीसरा मौका है, जब सर्वे की समयसीमा बढ़ाई गई।
अदालत ने एएसआई की इस दलील पर भी सहमति जताई कि तहखानों से मलबा और कचरा हटाने में समय लगेगा, क्योंकि प्रक्रिया धीमी है। एएसआई को यह सुनिश्चित करना है कि सर्वे के दौरान ज्ञानवापी की मौजूदा संरचना को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। इसलिए एएसआई को सर्वे रिपोर्ट पेश करने के लिए चार हफ्ते का और समय दिया जाता है। यह अवधि तीन नवंबर को पूरी होगी।
दरअसल, जिला जज की अदालत ने एएसआई को सर्वे कर रिपोर्ट पेश करने के लिए छह अक्तूबर तक का समय दिया था। इससे पहले ही एएसआई ने चार अक्तूबर को अर्जी देकर चार और सप्ताह का समय मांगा। एएसआई की अर्जी पर मसाजिद कमेटी ने गुरुवार को मौखिक आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद जिला जज की अदालत ने आदेश दिया है।
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ज्ञानवापी में बहुत सारा कचरा, मिट्टी और ईंट-पत्थर
एएसआई की ओर से भारत सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल अमित कुमार श्रीवास्तव व उनके सहयोगी शंभू शरण सिंह ने दलील दी कि ज्ञानवापी में सर्वे और जांच के दौरान यह पाया गया कि बहुत सारा कचरा, मिट्टी, ईंट-पत्थर सहित अन्य प्रकार की सामग्रियां मौजूदा संरचना के चारों तरफ और तहखाने में फेंकी हुई हैं। अदालत ने सभी तहखानों की जमीन के नीचे सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है, इसलिए यह आवश्यक है कि मौजूदा ढांचे को कोई नुकसान पहुंचाए बिना मिट्टी और मलबे को हटाया जाए।
मलबे को बहुत सावधानी से और व्यवस्थित रूप से हटाया जा रहा है, जो एक धीमी प्रक्रिया है। अदालत के निर्देशानुसार सर्वे के लिए तहखानों की जमीन और मौजूदा संरचना की संरचनात्मक विशेषताओं को साफ करने से पहले कुछ और समय लगने वाला है। रुक-रुक कर हो रही बारिश से भी काम प्रभावित और धीमा हो गया है, जिसके कारण वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग मुश्किल हो गया है।
मसाजिद कमेटी बोला- अपना समय बर्बाद कर रहा एएसआई
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने एएसआई की अर्जी पर मौखिक आपत्ति दर्ज कराई। अधिवक्ता मुमताज अहमद ने कहा कि अदालत ने जैसा निर्देश दिया था, एएसआई की ओर से वैसा सर्वे कार्य नहीं किया जा रहा है। तहखानों से मलबा हटाने का निर्देश नहीं दिया गया था। एएसआई अपना समय बर्बाद कर रहा है। समय को चार सप्ताह से अधिक नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।