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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Gyanvapi Case Hindu side splits before hearing in Shringar Gauri case, demand for carbon dating of Shivling

Gyanvapi Case: मामले में सुनवाई से पहले ही हिंदू पक्ष दो फाड़, शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग का विरोध

Mon, 26 Sep 2022 04:42 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 26 Sep 2022 04:42 PM IST
सार

 हिंदू पक्ष की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु जैन ने ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे के दौरान मिले कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने की मांग की है। इस पर  वादिनी राखी सिंह के पैरोकार ने आपत्ति जताई है।

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Gyanvapi Case Hindu side splits before hearing in Shringar Gauri case, demand for carbon dating of Shivling
अदालत परिसर से बाहर आते जितेंद्र सिंह बिसेन और उनकी पत्नी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन व अन्य विग्रहों के संरक्षण का मुकदमा सुनवाई योग्य करार दिए जाने के बाद अब इस मामले की सुनवाई जिला जज की अदालत में 29 सितंबर को होनी है। पिछली सुनवाई सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु जैन ने ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे के दौरान मिले कथित शिवलिंग की भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के एक्सपर्ट से कार्बन डेटिंग कराने का अनुरोध किया।

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उनके इस अनुरोध पर पांच वादी महिलाओं में से एक महिला याचिकाकर्ता राखी सिंह के पैरोकार  विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख ने अलग रुख अख्तियार किया है। वादिनी राखी सिंह के पैरोकार और विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह विसेन ने इस पर आपत्ति जताई है।
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विसेन का कहना है कि वह आदि विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग की कार्बन डेटिंग नहीं होने देंगे। कहा कि कार्बन डेटिंग करवाना मतलब शिवलिंग के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न खड़ा करना है।  चार महिलाओं ने जो मांग की है, उस पर कोर्ट ने 29 सितंबर को सुनवाई की तिथि नियत की है। 

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हिंदुओं की आस्था से 353 साल से जुड़ा है विश्वेश्वर मंदिर

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत कुलपति तिवारी के अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि विश्वेश्वर मंदिर का मुद्दा वह स्याह पन्ना है जो हिंदुओं की आस्था से 353 साल से जुड़ा है। हाल के दिनों में सर्वे हुए और जो चीजें सामने आईं जिससे समस्त हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों में उम्मीद की किरण दिखाई दी। रविवार को पराड़कर भवन में प्रेेसवार्ता के दौरान शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि यह मंदिर बस एक मंदिर नहीं, बल्कि ऐसा शास्त्रों पर आधारित मंदिर है जिसका विज्ञान के विविध आयामों से संबंध है।

सुनवाई पर रोक वाली याचिका पर विचार नहीं करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ज्ञानवापी मस्जिद मामले की सुनवाई पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। अदालत ने कहा, याचिकाकर्ता हाईकोर्ट जा सकते हैं। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा, हम इस जनहित याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते। इस मामले में सुनवाई चल रही है।  दरअसल, ज्ञानवापी मामले में वकील एमएम कश्यप ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि 1993, 1995 और 1997 में सुप्रीम कोर्ट ने काशी और मथुरा को लेकर तीन आदेश दिए थे।

इन आदेशों में दोनों जगह पर मौजूद वर्तमान मंदिर और मस्जिद की यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा गया था। याचिका में कहा गया था कि अब वाराणसी में जो कुछ भी हो रहा है, वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है। याचिकाकर्ता का कहना था कि 90 के दशक में यह तीनों आदेश अयोध्या मामले में पक्षकार रहे असलम भूरे की याचिका में आए थे। याचिकाकर्ता ने तब अयोध्या की तरह काशी, मथुरा में भी धर्मस्थलों को नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका जताई थी।

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