Gyanvapi: अविमुक्तेश्वरानंद मामले में सुनवाई टली, वहीं दूसरे केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?
अविमुक्तेश्वरानंद मामले में सुनवाई टल गई है। कोर्ट ने अगली तारीख 18 नवंबर नियत कर दी है। पीठासीन अधिकारी सिविल जज सीनियर डिविजन कुमुदलता त्रिपाठी के अवकाश पर रहने के कारण सुनवाई टली।
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विस्तार
वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े तीन मामलों पर आज कोर्ट में सुनवाई होनी है। जिसमें अविमुक्तेश्वरानंद मामले में सुनवाई टल गई है।
सिविल जज सीनियर डिविजन कुमुद लता त्रिपाठी की अदालत में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द की तरफ से दाखिल वाद की सुनवाई एक बार फिर टल गई जिसमें ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की आकृति की पूजा पाठ रागभोग आरती करने की अनुमति मांगी गई है। कोर्ट के पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण अब अगली सुनवाई के लिए 18 नवम्बर की तिथि नियत की गई है।
बता दें की शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य रहे और अब उनकी मृत्यु के बाद शंकराचार्य का पद सम्हाल रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व रामसजीवन ने वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार त्रिपाठी,रमेश उपाध्याय चंद्रशेखर सेठ के माध्यम से अदालत में वाद दाखिल किया है जिसमे शृंगार गौरी प्रकरण में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के आदेश पर हुए कोर्ट कमीशन की कार्यवाही में मिले शिवलिंग की आकृति का विधिवत रागभोग,पूजन व आरती जिला प्रशासन की ओर से विधिवत करना चाहिए था,लेकिन अभी तक प्रशासन ने ऐसा नहीं किया है। न किसी अन्य सनातनी धर्म से जुड़े व्यक्ति को इसके लिए नियुक्त किया। उन्होंने बताया कि कानूनन देवता की परस्थिति एक जीवित बच्चे के समान होती है। जिसे अन्न-जल आदि नहीं देना संविधान की धारा अनुच्छेद-21 के तहत दैहिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार का उल्लंघन है।
वहीं दूसरी तरफ मुख्तार अहमद की तरफ से ज्ञानवापी मामले में दाखिल वाद में वादी मुख्तार की तरफ से दिए गये ज्ञानवापी के सर्वे के मामले में विपक्षी से आपत्ति मांगी गई है और सुनवाई की तारीख 8 दिसम्बर नियत कर दी गई। यह मामला सिविल जज फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट सीनियर डिवीजन महेंद्र पाण्डेय की अदालत में लंबित है जिसमें उर्स करने और हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने की मांग की गई है।
हाईकोर्ट ने क्या तारीख दी ?
ज्ञानवापी परिसर का सर्वेक्षण आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से कराए जाने के मामले पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमें केर्ट ने अगली तारीख 28 नवंबर की दी है।
ये हैं तीन मामले
1- ज्ञानवापी-मां श्रृंगार गौरी केस की सुनवाई
ज्ञानवापी-मां श्रृंगार गौरी केस की सुनवाई 2 नवंबर को वाराणसी जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में हुई। इस दौरान ज्ञानवापी परिसर में तहखाने को तोड़कर और मलबे को हटाकर कमीशन की कार्रवाई आगे बढ़ाने की मांग पर सुनवाई हुई। मामले में मुस्लिम पक्ष यानि अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से आपत्ति दाखिल की गई। हिंदू पक्ष की ओर से प्रति आपत्ति दाखिल करने के लिए अदालत ने 11 नवंबर यानि आज की तिथि तय की थी।
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि वादी पक्ष ने 82 ग के तहत कमीशन की कार्यवाही आगे बढ़ाने की बात अदालत में कही है। उस पर प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने अपनी अपत्ति कोर्ट में दाखिल कर दी है। जिस पर अदालत ने वादी पक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए 11 नवंबर की तारीख मुकर्रर की थी।
2- कथित शिवलिंग की पूजा-पाठ का अधिकार
ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की आकृति की पूजा, पाठ, राग भोग, आरती करने को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से दाखिल अर्जी पर आज सुनवाई होगी। उनका कहना है कि कानूनन देवता की परिस्थिति एक जीवित बच्चे के समान होती है, जिसे अन्न-जल आदि नहीं देना संविधान की धारा अनुच्छेद-21 के तहत दैहिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार का उल्लंघन है। ऐसे में पूजा-पाठ की अनुमति दी जाए।
3- ज्ञानवापी में मिले 'शिवलिंग' के संरक्षण पर आज सुप्रीम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मिले 'शिवलिंग' के संरक्षण की अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई करेगी। मामले पर विचार के लिए एक पीठ का भी गठन किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग को संरक्षित करने की समयसीमा 12 नवंबर से बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई होगी।
हिंदू पक्ष की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन ने गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने शिवलिंग की सुरक्षा के मामले पर आज दोपहर तीन बजे सुनवाई तय की है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले आदेश में वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि मस्जिद के अंदर जिस स्थान पर 'शिवलिंग' मिला है, उसे सुरक्षित रखा जाए।