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ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मूल वाद की सुनवाई टली: सभी 7 मामलों की सुनवाई 12 व अखिलेश-ओवैसी मामले की सुनवाई 20 को

Sun, 09 Jul 2023 07:08 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Sun, 09 Jul 2023 07:08 AM IST
सार

Gyanvapi Case: वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी-शृंगार गौरी के मूल वाद के साथ सात अन्य मामलों की एक साथ सुनवाई टल गई। मामले पर अदालत ने 12 जुलाई की अगली तारीख दी है। 

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Gyanvapi Case: Hearing of seven cases adjourned along with Gyanvapi-Shringar Gauri original suit, now date of
ज्ञानवापी परिसर। - फोटो : social media

विस्तार

श्रृंगार गौरी मूल वाद समेत ज्ञानवापी के सभी सातों मामलों की सुनवाई शुक्रवार को टल गई। जिला जज की कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 12 जुलाई नियत की है। वहीं, इस मामले में श्रृंगार गौरी मूल वाद की वादिनी राखी सिंह और जितेंद्र सिंह विसेन की तरफ से दाखिल लार्ड विश्वेश्वर के वाद मित्र की ओर से भदरी नरेश राजा उदय प्रताप सिंह (राजा भैया के पिता) को दी गई पावर ऑफ अटॉर्नी दाखिल की गई।

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जिला जज के अवकाश पर रहने के कारण पत्रावली प्रभारी जिला जज एडीजे प्रथम संजीव सिन्हा की अदालत में पेश की गई। जहां पर सुनवाई के लिए 12 जुलाई की तिथि नियत कर दी गई। इस दौरान विश्व वैदिक सनातन संघ के जितेंद्र सिंह विसेन व अजित सिंह, शैलेन्द्र पांडेय कवि, प्रवीण सिंह रघुवंशी और मानबहादुर सिंह, अनुपम द्विवेदी, अनूप सिंह,आशीष सिंह, धिरेंद्र प्रताप सिंह समेत 68 अधिवक्ताओं का पैनल भी मौजूद रहा। 
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राजा उदय प्रताप सिंह ने कहा कि पैरवी की प्रेरणा कहां से मिली तब कहा कि ऊपर वाले से प्रेरणा मिली,जब पूछा गया कि उनके इस निर्णय की जानकारी बेटे राजा भैया को है तब उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी देने कि क्या जरूरत है यह मेरा खुद का निर्णय है। उन्हें चैनलों के जरिये खुद पता चल गया होगा, कहा कि वह मजबूती से नियमित पैरवी करेंगे।
अगर जेल भी जाना पड़ेगा तब भी पीछे नहीं हटेंगे। राजा उदय प्रताप सिंह को अधिवक्ता अनूप सिंह ने वकीलों की तरफ से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया, राजा को देखने के लिए काफ़ी संख्या में वकील और समर्थक कचहरी परिसर में जुटे रहे। बता दे कि श्रृंगार गौरी मूल वाद की 4 महिलाओ रेखा पाठक, मंजू व्यास, सीता शाहू व लक्ष्मी देवी ने ज्ञानवापी से जुड़े एक ही प्रकृति के 7 मामलों को एक साथ सुनवाई किये जाने का अनुरोध किया था। जिसे जिला जज ने स्वीकार करते हुए सभी मामलो को शृंगार गौरी मूल वाद में समाहित करते हुए सुनवाई का आदेश दिया था। जिसपर शुक्रवार को अगली सुनवाई होनी थी लेकिन जिला जज के नहीं रहने के कारण अगली तारीख पड़ गई यह भी बता दे। इसी श्रृंगार गौरी मूल वाद में सर्वे के आदेश के बाद सर्वे के दौरान कथित शिवलिंग वजू स्थल के पास मिलने का दावा किया गया था जिसे सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर उस स्थान को सील कर दिया गया है।

Gyanvapi Case: Hearing of seven cases adjourned along with Gyanvapi-Shringar Gauri original suit, now date of
अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी - फोटो : अमर उजाला

अधिवक्ताओं की टीम रखेगी केंद्र सरकार का पक्ष
वहीं, ज्ञानवापी-मां श्रृंगार गौरी प्रकरण में चार अधिवक्ताओं की टीम केंद्र सरकार का पक्ष रखेगी। इसके लिए भारत सरकार की ओर से अदालत में अधिवक्ता अमित कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में अधिवक्ता राहुल मिश्रा, रजनीश अग्रवाल व शंभू शरण सिंह ने जिला जज की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। केंद्र सरकार के अधिवक्ताओं ने अदालत से वाद-पत्र व अंतरिम निषेधाज्ञा और उससे संबंधित सबूत की कॉपी वादी से दिलाने की मांग की है। 


अखिलेश और ओवैसी मामले की सुनवाई अब 20 को
ज्ञानवापी के वजूखाने में गंदगी करने और नेताओं की बयानबाजी को लेकर निचली अदालत के आदेश के खिलाफ लंबित पुनरीक्षण याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई नहीं हो सकी। अपर जिला जज (नवम) की अदालत में लंबित इस मामले में पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई टल गई और 20 जुलाई की तिथि मुकर्रर कर दी गई।

अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव व एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा दिए गए बयान को हेट स्पीच की श्रेणी में मानते हुए एसीजेएम पंचम (एमपी-एमएलए) की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। आरोप लगाया था कि इन नेताओं ने अमर्यादित व गैर कानूनी बयान देकर हिंदू समाज के प्रति घृणा फैलाने का आपराधिक कृत्य किया है।

अदालत ने 14 फरवरी 2023 को हरिशंकर पांडेय की इस प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ चार मार्च को हरिशंकर पांडेय ने जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी। इस याचिका की अपर जिला जज (नवम) की अदालत में सुनवाई चल रही है।

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