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Gyanvapi case: बहस के बीच हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं में विवाद, अंजुमन इंतजामिया के शमीम अहमद ने कह दी बड़ी बात

Tue, 23 Aug 2022 05:58 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Tue, 23 Aug 2022 05:58 PM IST
सार

ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी वाद की पोषणीयता पर कोर्ट में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से बहस हुई। इस बीच हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओ में ही विवाद हो गया जो वरिष्ठ अधिवक्ताओं के हस्तक्षेप से शांत हुआ।

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Gyanvapi case Anjumans debate is on hearing will be held tomorrow
ज्ञानवापी मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी वाद की पोषणीयता पर कोर्ट में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से अधूरी जवाबी बहस मंगलवार को भी जारी रही, जो बुधवार को सुबह साढ़े ग्यारह बजे शुरू होगी। इस बीच बहस के समय को लेकर हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओ में ही विवाद हो गया जो वरिष्ठ अधिवक्ताओं के हस्तक्षेप से शांत हुआ।
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अंजुमन के मुख्य अधिवक्ता शमीम अहमद ने 25 फरवरी 1944 के शासनादेश का हवाला देते हुए कहा कि तत्कालीन वक्फ कमिश्नर द्वारा प्रदेश सरकार को भेजी गई रिपोर्ट के बाद आलमगीर बादशाह द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद को सम्पत्ति समर्पित की थी। इसको प्रदेश शासन ने गजट में प्रकाशित किया था। जिससे साबित होता है कि ज्ञानवापी पुरानी मस्जिद है। इस बाबत 1291 फसली वर्ष  यानि 1883-84 के खसरा खतौनी में दर्ज इंद्राज जिसमें आलमगीर बादशाह द्वारा वक्फ को समर्पित संपत्ति के जिक्र होने का साक्ष्य दाखिल किया गया।
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ज्ञानवापी परिसर के बाहर का नजारा - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 1995 के वक्फ एक्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि प्रश्नगत वाद जो ज्ञानवापी से संबंधित है। वक्फ संपत्ति होने के कारण सिविल न्यायालय को यह वाद सुनने का अधिकार नहीं है। वहीं दूसरे अधिवक्ता रईस अहमद ने स्पष्ट किया कि वक्फ एक्ट प्रावधानों के तहत ज्ञानवापी वक्फ की है, ऐसे में प्रॉपर्टी वक्फ की होने के कारण वाद चल ही नहीं सकता।

इसके समर्थन में 1995,1960,1936 का सेंट्रल वक्फ एक्ट का हवाला दिया गया, साथ ही समर्थन में अन्य सबूत व साक्ष्य दाखिल किए गए। अधूरी बहस के बीच कोर्ट में 4 महिला वादियों की तरफ से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट जाने का हवाला दिया। हवाला देते हुए अदालत से सुनवाई का समय दो बजे के बजाय पहले ही सुनवाई किये जाने का अनुरोध किया।

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ज्ञानवापी - फोटो : अमर उजाला
लेकिन इसका एक अन्य महिला वादी के अधिवक्ता ने विरोध किया और जमकर तकरार हुई जिससे कोर्ट की मर्यादा को भी ठेस लगी। अंततः बीच बचाव और वरिष्ठ वकीलों के हस्तक्षेप पर अदालत ने सुनवाई का समय परिवर्तित करते हुए साढ़े ग्यारह बजे सुबह रख दिया।

बुधवार को सुनवाई शुरू होते ही अंजुमन इंतजमिया अधूरी बहस आधे एक घण्टे में पूरा कर लेगा। तब हिंदू पक्ष की तरफ से हरिशंकर जैन जबाबी बहस की  प्रति उत्तर बहस करेंगे। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु जैन ने बताया कि अंजुमन की दलील के मुताबिक संपत्ति वक्फ की है। जिसका वाद वक्फ टिब्यूनल में चलना चाहिए। इस बाबत जो गजट 1944 का दाखिल किया गया वह आलमगीर मस्जिद के बाबत है।
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ज्ञानवापी मस्जिद - फोटो : अमर उजाला
उससे ज्ञानवापी से कोई मतलब नहीं है वैसे भी अवैध संपत्ति अल्लाह को कुबूल नहीं होती। अंजुमन की तरफ से नियुक्त अधिवक्ता योगेन्द्र सिंह उर्फ मधू बाबू कोर्ट में मंगलवार को भी नहीं पहुंचे जबकि रईस अहमद,मुमताज अहमद,मिराजुद्दीन सिद्दकी व एजाज अहमद मौजूद रहे। वहीं महिला वादियों की तरफ से हरिशंकर जैन व विष्णु जैन के अलावा सुभाष नन्दन चतुर्वेदी,सुधीर त्रिपाठी,मानबहादुर सिंह,अनुपम द्विवेदी डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पाण्डेय समेत वादिनीगण व पैरोकार कोर्ट में मौजूद रहे।
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