Gyanvapi: सुप्रीम मुहर से विवाद के निपटारे की राह आसान, पहली बार तीन अदालतों से ज्ञानवापी के ASI सर्वे पर आदेश
Gyanvapi Masjid Survey: पहले जिला अदालत ने ज्ञानवापी परिसर के एएसआई सर्वे का आदेश दिया। मामला हाईकोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा, लेकिन जिला अदालत के आदेश पर रोक से इन्कार कर दिया गया। अब सर्वे की सभी बधाएं दूर हो गई हैं।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से ज्ञानवापी के सर्वे पर सुप्रीम मुहर से विवाद के निपटारे की राह आसान हो गई है। यह पहला मौका है, जब सर्वे पर तीन अदालतों का रुख एक जैसा रहा है। पहले जिला अदालत ने ज्ञानवापी परिसर के एएसआई सर्वे का आदेश दिया। मामला हाईकोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा, लेकिन जिला अदालत के आदेश पर रोक से इन्कार कर दिया गया। अब सर्वे की सभी बधाएं दूर हो गई हैं। इससे पहले दो बार सर्वे के आदेश हुए थे। इन मामलों में हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है।
एएसआई की टीम चार सप्ताह में सर्वे करके रिपोर्ट जिला जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत को सौंप देगी। अदालत साक्ष्यों का अध्ययन करेगी, फिर अंतिम फैसला सुनाएगी। बीएचयू के इतिहासकार व पुरातत्वविद डॉ अशोक कुमार सिंह का कहना है कि अब विवाद का निपटारा हो जाएगा। यह विवाद 1669 से चल रहा है।
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हिंदू और मुस्लिम पक्ष के दावे
हिंदू पक्ष का दावा है कि औरंगजेब ने 354 वर्ष पहले ज्ञानवापी मंदिर का स्वरूप बदला था। मंदिर के ही ढांचे काे मस्जिद का रूप दे दिया था। वहीं, मुस्लिम पक्ष 600 वर्षों से नमाज अदा करने का दावा कर रहा है। एएसआई सर्वे से सब कुछ साफ हो जाएगा। पता चल जाएगा कि किसके दावे में दम है। एएसआई की रिपोर्ट पर सवाल नहीं उठाए जा सकते हैं। अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि का विवाद भी सर्वे से निपटा था। सुप्रीम कोर्ट की सांविधानिक पीठ ने सर्वे के तथ्यों को ध्यान में रखकर फैसला सुनाया था।
आदेश-1: जिला अदालत के फैसले पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी के प्रार्थना पत्र पर पहली बार सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट आशुतोष तिवारी की अदालत ने आठ अप्रैल 2021 को ज्ञानवापी में रडार तकनीक से एएसआई को सर्वे का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ अपील किए जाने पर सितंबर 2021 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सर्वे पर रोक लगा दी थी। फिलहाल, मुकदमा अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। कभी भी आदेश आ सकता है।
आदेश-2: हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम रोक
12 मई 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर में मिली शिवलिंग जैसी आकृति की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक पद्धति से सर्वे का आदेश दिया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर 19 मई को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। यह मामला अब भी सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। जिला जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने सील वजूखाने को छोड़कर ज्ञानवापी परिसर के सर्वे के आदेश दिए हैं। सील वजूखाना क्षेत्र में ही शिवलिंग जैसी आकृति मिली थी।
आदेश-3: पहली बार तीनों अदालतों का रुख एक जैसा
21 जुलाई 2023 को जिला अदालत डॉ अजय कृष्ण विश्ववेश की अदालत ने ज्ञानवापी परिसर स्थित सील वजूखाना को छोड़कर शेष अन्य हिस्से के सर्वे का आदेश एएसआई को दिया था। 24 जुलाई को एएसआई ने सर्वे का काम शुरू किया तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश से उस पर 26 मई की शाम पांच बजे तक रोक लगा दी गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। 25, 26 और 27 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
27 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सर्वे के काम पर लगी रोक जारी रखते हुए आदेश सुनाने के लिए तीन अगस्त की तिथि तय कर दी। तीन अगस्त को हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि न्याय के हित में ज्ञानवापी में वैज्ञानिक सर्वेक्षण जरूरी है। हाईकोर्ट के इस आदेश को मसाजिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। शुक्रवार (चार अगस्त) को सुप्रीम कोर्ट ने भी सर्वे पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया।