फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Gyanvapi 33 year old case application demanding additional ASI survey given in court eight months ago

Gyanvapi Case: 33 साल पुराने केस में आठ माह पहले दी गई थी अर्जी, वाद मित्र ने ASI सर्वे को लेकर दी थी ये दलील

Sat, 26 Oct 2024 10:11 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sat, 26 Oct 2024 10:11 AM IST
सार

ज्ञानवापी के 33 साल पुराने केस में आठ माह पहले अदालत में अतिरिक्त सर्वे की मांग की अर्जी दी गई थी। लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र की दलील थी कि एएसआई का सर्वे आधा-अधूरा है, इसलिए विस्तृत सर्वेक्षण हो। 

विज्ञापन
Gyanvapi 33 year old case  application demanding additional ASI survey given in court eight months ago
Gyanvapi Case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी के पूरे परिसर की एएसआई से अतिरिक्त सर्वे की मांग की अर्जी सात फरवरी 2024 को सिविल जज सीनियर डिवीजन/ फास्ट ट्रैक की अदालत में दी गई थी। यह अर्जी ज्ञानवापी से संबंधित वर्ष 1991 में पहली बार दाखिल प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के मुकदमे के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने अदालत में पूरे परिसर के अतिरिक्त सर्वे के लिए दलील भी पेश की थी। दरअसल, यह मामला 33 वर्ष पुराना था। मामले की सुनवाई लंबे समय तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में चली थी। बाद में हाईकोर्ट ने निचली अदालत को फैसला लेने का आदेश दिया था।

विज्ञापन


विजय शंकर रस्तोगी का कहना था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि मां शृंगार गौरी के केस में ज्ञानवापी के संबंध में अदालत में दाखिल रिपोर्ट से अलग जो भी सर्वे एएसआई से वाद मित्र कराना चाहते हैं, उसके लिए अलग से आवेदन दे सकते हैं। इसी आदेश के क्रम में अदालत एएसआई से ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) और जियो-रेडियोलॉजी सिस्टम द्वारा पुरातत्व विज्ञान के अनुसार ज्ञानवापी में व्यापक स्तर पर अतिरिक्त सर्वे का आदेश दे।
विज्ञापन



विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने कहा था कि एएसआई द्वारा ज्ञानवापी में किया गया सर्वे आधा-अधूरा है। विवादित ढांचे को नुकसान पहुंचाए बगैर उसके केंद्रीय कक्ष के नीचे नवनिर्मित ईंट की दीवारों को हटाकर यह पता लगाया जाना जरूरी है कि वहां की वास्तविकता क्या है। विवादित ढांचे के बंद तहखानों की वास्तविक स्थिति क्या है। इसे स्पष्ट करने के लिए चार गुणे चार वर्ग फीट का गड्ढा खोद कर या सुरंग बनाकर एएसआई जीपीआर तकनीक से सर्वे कर सकता है।

ज्ञानवापी की आराजी नंबर 9130 का सर्वे किया गया है। आराजी नंबर 9131 व 9132 की क्या स्थिति है, इसका भी सर्वे करके एएसआई रिपोर्ट दे। इन सभी आराजी पर मालिकाना हक लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ का है। पूर्व में अधिवक्ता आयुक्त के सर्वे में ज्ञानवापी स्थित कथित वजूखाना में जो शिवलिंग मिला है, उसकी भी स्थिति एएसआई स्पष्ट करे कि आखिरकार वह क्या है।

एएसआई ने ही हलफनामा दिया था कि खोदाई नहीं होगी

प्रतिवादी मुस्लिम पक्ष की ओर से कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय में देश के सॉलिसिटर जनरल और एएसआई द्वारा पूर्व में आश्वासन दिया गया था कि ज्ञानवापी में खोदाई नहीं की जाएगी। इसलिए ईंटों-दीवारों को हटाने के लिए वादी द्वारा निर्देश मांगना सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय इलाहाबाद को दिए गए आश्वासन का सीधा उल्लंघन होगा।

अपनी आपत्ति के समर्थन में मुस्लिम पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली के अतिरिक्त महानिदेशक आलोक त्रिपाठी द्वारा दिए गए हलफनामे की प्रति भी दाखिल की थी। हलफनामे में कहा गया था कि सर्वेक्षण और अध्ययन के दौरान कोई ड्रिलिंग, कटिंग और ईंट-पत्थर को हटाने का काम नहीं किया जाएगा।

पूरा सर्वेक्षण जीपीआर सर्वे, जीपीएस सर्वे और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करके गैर-विनाशकारी विधि से किया जाएगा। यदि आगे उत्खनन की आवश्यकता हुई तो न्यायालय की अनुमति ली जाएगी।

जुलाई 2023 में सर्वे का आदेश, जनवरी 2024 रिपोर्ट सार्वजनिक हुई

मां शृंगार गौरी केस की सुनवाई करते हुए जिला जज की अदालत ने 21 जुलाई 2023 को एएसआई को ज्ञानवापी में सर्वे का आदेश दिया था। एएसआई ने जुलाई, अगस्त, सितंबर, अक्तूबर और नवंबर महीने में ज्ञानवापी में सर्वे किया था। 18 दिसंबर 2023 को अदालत में एएसआई ने सर्वे रिपोर्ट दाखिल की। 839 पेज की सर्वे रिपोर्ट 25 जनवरी 2024 को सार्वजनिक हुई थी। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार ज्ञानवापी में 32 जगह मंदिर से संबंधित प्रमाण मिले हैं।

रिपोर्ट के आधार पर हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा था कि ज्ञानवापी स्थित आदि विश्वेश्वर का प्राचीन मंदिर दो सितंबर 1669 को ध्वस्त किया गया था। हालांकि जिला अदालत में अभी तक एएसआई की रिपोर्ट को लेकर बहस नहीं शुरू हो सकी है। इसलिए हिंदू पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की गई है कि ज्ञानवापी से संबंधित सभी मामलों की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट करे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed