Gyanvapi Case: 33 साल पुराने केस में आठ माह पहले दी गई थी अर्जी, वाद मित्र ने ASI सर्वे को लेकर दी थी ये दलील
ज्ञानवापी के 33 साल पुराने केस में आठ माह पहले अदालत में अतिरिक्त सर्वे की मांग की अर्जी दी गई थी। लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र की दलील थी कि एएसआई का सर्वे आधा-अधूरा है, इसलिए विस्तृत सर्वेक्षण हो।
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ज्ञानवापी के पूरे परिसर की एएसआई से अतिरिक्त सर्वे की मांग की अर्जी सात फरवरी 2024 को सिविल जज सीनियर डिवीजन/ फास्ट ट्रैक की अदालत में दी गई थी। यह अर्जी ज्ञानवापी से संबंधित वर्ष 1991 में पहली बार दाखिल प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के मुकदमे के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने अदालत में पूरे परिसर के अतिरिक्त सर्वे के लिए दलील भी पेश की थी। दरअसल, यह मामला 33 वर्ष पुराना था। मामले की सुनवाई लंबे समय तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में चली थी। बाद में हाईकोर्ट ने निचली अदालत को फैसला लेने का आदेश दिया था।
विजय शंकर रस्तोगी का कहना था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि मां शृंगार गौरी के केस में ज्ञानवापी के संबंध में अदालत में दाखिल रिपोर्ट से अलग जो भी सर्वे एएसआई से वाद मित्र कराना चाहते हैं, उसके लिए अलग से आवेदन दे सकते हैं। इसी आदेश के क्रम में अदालत एएसआई से ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) और जियो-रेडियोलॉजी सिस्टम द्वारा पुरातत्व विज्ञान के अनुसार ज्ञानवापी में व्यापक स्तर पर अतिरिक्त सर्वे का आदेश दे।
ज्ञानवापी की आराजी नंबर 9130 का सर्वे किया गया है। आराजी नंबर 9131 व 9132 की क्या स्थिति है, इसका भी सर्वे करके एएसआई रिपोर्ट दे। इन सभी आराजी पर मालिकाना हक लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ का है। पूर्व में अधिवक्ता आयुक्त के सर्वे में ज्ञानवापी स्थित कथित वजूखाना में जो शिवलिंग मिला है, उसकी भी स्थिति एएसआई स्पष्ट करे कि आखिरकार वह क्या है।
एएसआई ने ही हलफनामा दिया था कि खोदाई नहीं होगी
अपनी आपत्ति के समर्थन में मुस्लिम पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली के अतिरिक्त महानिदेशक आलोक त्रिपाठी द्वारा दिए गए हलफनामे की प्रति भी दाखिल की थी। हलफनामे में कहा गया था कि सर्वेक्षण और अध्ययन के दौरान कोई ड्रिलिंग, कटिंग और ईंट-पत्थर को हटाने का काम नहीं किया जाएगा।
पूरा सर्वेक्षण जीपीआर सर्वे, जीपीएस सर्वे और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करके गैर-विनाशकारी विधि से किया जाएगा। यदि आगे उत्खनन की आवश्यकता हुई तो न्यायालय की अनुमति ली जाएगी।
जुलाई 2023 में सर्वे का आदेश, जनवरी 2024 रिपोर्ट सार्वजनिक हुई
रिपोर्ट के आधार पर हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा था कि ज्ञानवापी स्थित आदि विश्वेश्वर का प्राचीन मंदिर दो सितंबर 1669 को ध्वस्त किया गया था। हालांकि जिला अदालत में अभी तक एएसआई की रिपोर्ट को लेकर बहस नहीं शुरू हो सकी है। इसलिए हिंदू पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की गई है कि ज्ञानवापी से संबंधित सभी मामलों की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट करे।
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