ज्ञानेश कुमार को बताया कठपुतली: बीएचयू में टंगे पोस्टर, एनएसयूआई ने कहा- मोदी और शाह हैं 'ईसी' के कंट्रोलर
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में एनएसयूआई-बीएचयू ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कला संकाय में हुए प्रदर्शन में छात्रों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और जेल भेजने की मांग की। संगठन ने निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े विपक्ष के आरोपों का भी हवाला दिया।
विस्तार
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में एनएसयूआई-बीएचयू इकाई ने शनिवार को प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया गया। दोपहर एक बजे कला संकाय में हुए इस प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और उन्हें जेल भेजने की मांग की।
एनएसयूआई-बीएचयू के पदाधिकारियों ने बताया कि हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। मतदाता सूची से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को लेकर छात्रों के बीच भी गहन चर्चा हो रही है। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का सीधा असर होता है।
इसका प्रभाव लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ-साथ युवाओं की शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसरों पर भी पड़ता है। संगठन ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और भाजपा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ज्ञानेश कुमार के बीच मिलीभगत है।
प्रदर्शन का आधार और संदर्भ
एनएसयूआई ने कहा कि इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में निर्वाचन आयोग के भीतर के कुछ फैसले सामने आए थे। इसमें विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े निर्णयों का उल्लेख किया गया था। निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इन फैसलों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कई गंभीर सवाल उठाए हैं। एनएसयूआई-बीएचयू ने इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर यह प्रदर्शन आयोजित किया। छात्रों ने इन आपत्तियों को गंभीरता से लेने की अपील की।
एनएसयूआई के प्रमुख आरोप
एनएसयूआई ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। उनका कहना है कि इन अनियमितताओं से लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है। युवाओं के भविष्य पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। संगठन ने ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने उनकी गिरफ्तारी की भी मांग दोहराई। उन्होंने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।
निर्वाचन आयोग का जवाब और छात्रों की आगे की योजना
निर्वाचन आयोग ने अपने जवाब में इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से हुए हैं। इसके बावजूद एनएसयूआई-बीएचयू ने अपनी बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुचिता और जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर छात्रों की आवाज आगे भी उठाई जाएगी। संगठन ने भविष्य में भी ऐसे मुद्दों पर प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प लिया।