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Guru Tegh Bahadur: गुरु वंदगी को उमड़ी संगत, शबद कीर्तन से भक्त निहाल; प्रकाशोत्सव पर टेका मत्था
Mon, 29 Apr 2024 10:10 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Mon, 29 Apr 2024 10:10 PM IST
सार
Guru Tegh Bahadur: दीवान सजा, जिसमें हजूरी रागी जत्था सतविन्दर सिंह एवं नरिन्दर सिंह, रकम सिंह ने गुरुवाणी कीर्तन कर संगत को निहाल किया।
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गुरु तेग बहादुर महाराज का 403वां प्रकाशोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सिक्ख पंथ के नौवें पातशाह हिन्द गुरु तेग बहादुर महाराज का 403वां प्रकाशोत्सव सोमवार को नीचीबाग गुरुद्वारे में श्रद्धा व भक्तिभाव से मनाया गया। संगत ने गुरु वंदगी की और मत्था टेका। गुरुद्वारे में मौजूद उनके चोले, जूते व हुकुमनामा आदि का दर्शन किया। रागी जत्था ने सबद कीर्तन से संगत को निहाल किया।
गुरुद्वारे में सुबह से ही साध संगत के आने का सिलसिला शुरू हो गया। उन्होंने मत्था टेका और अरदास किया।
उन्होंने अटूट लंगर छका। गुरुद्वारे के मुख्य ग्रन्थी जगतार सिंह ने अरदास किया। उन्होंने कहा कि नीचीबाग में ही गुरु तेग बहादुर महाराज सात माह 13 दिनों माह तक रहकर तप किया और गुरुनानक देव की वाणी का प्रचार किया। संगत ने गुरुबाग गुरुद्वारे में भी मत्था टेका।
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गुरुद्वारे में सुबह से ही साध संगत के आने का सिलसिला शुरू हो गया। उन्होंने मत्था टेका और अरदास किया।
उन्होंने अटूट लंगर छका। गुरुद्वारे के मुख्य ग्रन्थी जगतार सिंह ने अरदास किया। उन्होंने कहा कि नीचीबाग में ही गुरु तेग बहादुर महाराज सात माह 13 दिनों माह तक रहकर तप किया और गुरुनानक देव की वाणी का प्रचार किया। संगत ने गुरुबाग गुरुद्वारे में भी मत्था टेका।
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