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गुप्त नवरात्रि आज से शुरू: नवदुर्गा नहीं 10 महाविद्याओं की होगी पूजा, गृहस्थ साधकों को सिद्धि प्राप्त करना आसान

Wed, 02 Feb 2022 11:13 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Wed, 02 Feb 2022 11:13 AM IST
सार

गुप्त नवरात्रि का आरंभ बुधवार से हो गया है। देवी भागवत के अनुसार जो साधक 10 महाविद्याओं में से किसी भी महाविद्या की साधना करना चाहते हैं, वह इस गुप्त नवरात्रि में अनुष्ठान करें तो उनकी मनोकामना पूरी होगी।

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Gupt Navratri 2022 start from today not Navdurga 10 Mahavidyas will be worshipped
गुप्त नवरात्रि - फोटो : self

विस्तार

गुप्त नवरात्रि का आरंभ बुधवार से हो गया है।  गुप्त नवरात्रि साधकों के लिए खास होगा। ज्योतिष के अनुसार ऐसे में ग्रह-नक्षत्रों के संयोग से साधना करने वाले गृहस्थ साधकों को सिद्धि प्राप्त करना आसान होगा। गुप्त नवरात्रि दो से शुरू होकर 10 फरवरी तक रहेगी।

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गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कठोर नियमों के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।
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इस नवरात्रि में साधक गुप्त शक्तियों की साधना करते हैं। देवी भागवत के अनुसार जो साधक 10 महाविद्याओं में से किसी भी महाविद्या की साधना करना चाहते हैं, वह इस गुप्त नवरात्रि में अनुष्ठान करें तो उनकी मनोकामना पूरी होगी।

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गुप्त नवरात्रि में क्या करें, क्या ना करें

ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि नौ दिन व्रत रखने वाले साधकों को काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए। नमक और अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। दिन में सोना नहीं चाहिए। किसी को भी अपशब्द नहीं बोलना चाहिए। साधक को माता की दोनों समय आरती करनी चाहिए। इन दिनों में दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष लाभदायी होता है।

नौ दिन के उपवास का है विधान

गुप्त नवरात्रि में नौ दिनों तक उपवास रखने का विधान बताया गया है। इस नवरात्रि में माता की आराधना रात के समय की जाती है। इन नौ दिनों के लिए कलश की स्थापना की जा सकती है। अगर कलश की स्थापना की है तो दोनों समय मंत्र जाप, दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए।

नवरात्रि में रात्रिकालीन अनुष्ठान

माघ और आषाढ़ महीने में पडऩे वाली गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं का पूजन और साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में रात्रिकालीन साधना होती है। देवी शास्त्रों की मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्या के पूजन से मनोकामना पूर्ण होती है। गुप्त नवरात्रि में, प्रत्यक्ष नवरात्रि जैसा ही साधना, पूजा पाठ करने का नियम है। पहले दिन कलश स्थापना व आखिरी दिन विसर्जन के बाद पारण होता है।

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