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घटतौली का खुला खेल, कट रही जेब
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 24 Oct 2016 01:37 AM IST
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- फोटो : demopic
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यूं तो घटतौली आम दिनों में भी होती है लेकिन त्योहारी सीजन में काफी हद तक बढ़ जाती है। दीपावली को लेकर खरीदारी के लिए बाजार अभी से पट गए हैं। खरीदारों की भीड़ रोज उमड़ रही है। ऐसे में ठेले-खोमचे, परचून, गल्ला दूकानदारों से लेकर पेट्रोल पंप तक उपभोक्ता घटतौली का शिकार हो रहे हैं। उधर विभाग शांत बैठा है। पिछली बार छापेमारी की कार्रवाई सितंबर में ही गई थी। अब जब बाजार खरीदारों से पटा पड़ा है तो विभाग खामोश बैठा हुआ है। इधर उपभोक्ताओं की जेब कट रही है।
आंख के सामने ही दूकानदार कम तौल कर सामान दे देता है और उपभोक्ता चाहकर भी विरोध नहीं कर पाता। क्योंकि ज्यादातर दूकानों और एजेंसियों का यही हाल है। सब्जी लेने जाइए तो घिसे बाट और ईंट पत्थर से तौल, दूध और गल्ला मंडी में भी टूटेफूटे और टेढ़े मापकों से तौल, तराजू भी ऐसे इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनका बैलेंस बिगड़ा होता है। पेट्रोल पंप पर भी उपभोक्ताओं घटतौली का शिकार होते हैं। उपभोक्ताओं की शिकायत पर पंपों पर मापक पात्र रखा होता है, लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता। इस बारे में उपभोक्ता भी जागरूक नहीं हैं। पेट्रोलपंप की मशीन में सेटिंग कर या इलेक्ट्रानिक चिप के जरिए चूना लगाया जा रहा है। मशीन में सेटिंग कर प्रति लीटर 25 से 100 ग्राम तक तेल कम दिया जाता है। चिप के इस्तेमाल से मशीनें मीटर रीडिंग तो सही बताती हैं लेकिन हर सौ रुपये में से 15 रुपये का तेल चुरा लेती हैं।
सीधे 50, 100, 150, 200 आदि फीड कराकर पेट्रोल, डीजल लेने के बजाए कुछ कम या अधिक रुपये में लें। पेट्रोल कम मिलने का अंदेशा होने पर मापक पात्र का करें इस्तेमाल। पंपों में शून्य मीटर की रीडिंग अवश्य देख लें। ईंट-पत्थर या बिना मुहर वाले बाट का करें विरोध। प्रतिष्ठान में बाट-माप का सर्टिफिकेट डिस्प्ले है या नहीं, यह भी देखें।
आंख के सामने ही दूकानदार कम तौल कर सामान दे देता है और उपभोक्ता चाहकर भी विरोध नहीं कर पाता। क्योंकि ज्यादातर दूकानों और एजेंसियों का यही हाल है। सब्जी लेने जाइए तो घिसे बाट और ईंट पत्थर से तौल, दूध और गल्ला मंडी में भी टूटेफूटे और टेढ़े मापकों से तौल, तराजू भी ऐसे इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनका बैलेंस बिगड़ा होता है। पेट्रोल पंप पर भी उपभोक्ताओं घटतौली का शिकार होते हैं। उपभोक्ताओं की शिकायत पर पंपों पर मापक पात्र रखा होता है, लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता। इस बारे में उपभोक्ता भी जागरूक नहीं हैं। पेट्रोलपंप की मशीन में सेटिंग कर या इलेक्ट्रानिक चिप के जरिए चूना लगाया जा रहा है। मशीन में सेटिंग कर प्रति लीटर 25 से 100 ग्राम तक तेल कम दिया जाता है। चिप के इस्तेमाल से मशीनें मीटर रीडिंग तो सही बताती हैं लेकिन हर सौ रुपये में से 15 रुपये का तेल चुरा लेती हैं।
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सीधे 50, 100, 150, 200 आदि फीड कराकर पेट्रोल, डीजल लेने के बजाए कुछ कम या अधिक रुपये में लें। पेट्रोल कम मिलने का अंदेशा होने पर मापक पात्र का करें इस्तेमाल। पंपों में शून्य मीटर की रीडिंग अवश्य देख लें। ईंट-पत्थर या बिना मुहर वाले बाट का करें विरोध। प्रतिष्ठान में बाट-माप का सर्टिफिकेट डिस्प्ले है या नहीं, यह भी देखें।
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