नशे का साम्राज्य: ऑनलाइन डार्क वेब से पूर्वांचल में पहुंचा ग्रीन गोल्ड गांजा, इसके सबसे बड़े खरीदार विदेशी
Varanasi News: ऑनलाइन डार्क वेब से ग्रीन गोल्ड गांजा पूर्वांचल में पहुंच गया है। इसके सबसे बड़े खरीदार विदेशी हैं। बड़े होटलों में विदेशियों को ऑन डिमांड पैडलर की मदद से गांजा की खपत की जा रही है।
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ग्रीन गोल्ड नाम से पहचान रखने वाली हाइड्रोपोनिक गांजा की सप्लाई के लिए तस्कर बड़े शहरों के बाद पूर्वांचल को भी निशाना बना रहे हैं। तस्कर अब पूर्वांचल में पर्यटन और व्यापार के बड़े केंद्र वाराणसी के साथ ही अन्य बड़े महानगरों तक पहुंच बना रहे हैं। रेव पार्टियों, बड़े होटलों में विदेशियों को ऑन डिमांड पैडलर की मदद से थाईलैंड से मंगाए हाइड्रोपोनिक गांजा की खपत की जा रही है।
बाबतपुर एयरपोर्ट पर 10 मार्च को पकड़ा गया थाईलैंड का गांजा भी पूर्वांचल में ही खपना था। जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 25 करोड़ रुपये थी। आठ महीने पहले भुवनेश्वर बीजू पटनायक एयरपोर्ट पर पकड़ा गया हाइड्रोपोनिक गांजा भी थाईलैंड से आया था। दोनों मामलों में तस्कर गुजरात के थे। एनसीबी, एएनटीएफ और एसटीएफ जांच कर रही है।
जांच में सामने आया कि ग्रीन गोल्ड हाइड्रोपोनिक गांजे की तस्करी का ट्रांजिट प्वाइंट कोलकाता और ओडिसा है। जो थाईलैंड के रास्ते हवाई मार्ग से पहुंच रहा है। इसके बाद ही अन्य शहरों के लिए ऑन कॉल डिमांड कूरिअर समेत अन्य माध्यमों से भेजा जा रहा है।
इस ब्रीड की मांग खासकर रेव पाटियों, हाईफाई क्लब और विदेशी पर्यटकों के बीच में है। खासकर वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज, लखनऊ में इसकी अधिक मांग है। बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, जयपुर, बंगलूरू में डार्क वेब नेटवर्क के जरिये खरीद के कुछ मामले पकड़ में आए थे। छोटे शहरों में खुले में बिकने वाला गांजा ओडिसा और बंगाल का है।
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ओडिशा, कोलकाता और वाराणसी में बरामदगी
पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड समेत छत्तीसगढ़ में हाइड्रोपोनिक गांजे की सप्लाई का ट्रांजिट पॉइंट ओडिशा और कोलकाता रहा है। बीते दिनों वाराणसी एयरपोर्ट पर बरामद गांजे ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। जांच टीम अब इस दिशा में नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है। साथ ही एक साल के अंदर देश में पकड़े गए तस्करों के संपर्क को भी खंगालने में जुट गई है।
पानी में घुले खास पोषक तत्वों के सहारे होता है तैयार
हाइड्रोपोनिक खेती से उगाया जाने वाला गांजा होता है। पौधों को मिट्टी में नहीं उगाया जाता। पानी में घुले खास पोषक तत्वों के सहारे तैयार किया जाता है। पौधों की जड़ों को पानी, पोषण मिलता है। इस तकनीक से कमरे में भी खेती की जाती है। इस तरह से तैयार गांजे में नशीला तत्व सामान्य गांजे की तुलना में ज्यादा होता है। इसी कारण यह महंगा बिकता है।
क्या बोले अधिकारी
मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह के बारे में तफ्तीश जारी है। अब तक पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इस तस्करी के बड़े नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में अहम जानकारी मिली है। -राजकुमार त्रिपाठी, उपाधीक्षक एएनटीएफ