दादा तीन दिन से नहीं कर रहे पोते के शव का अंतिम संस्कार, क्या है कारण
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बीते सोमवार को घाघरा में डूब कर मरे पांच किशोरों में पांचवे किशोर संदीप उर्फ लालू की लाश भी नदी में उतराई हुई बरामद हो गई है। इस बीच तीन किशोरों के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है, जबकि एक को माता-पिता के इंतजार में रोक कर रखा गया है। इस बीच दरवाजे पर रखा बेटे का शव माता-पिता के इंतजार में है तो रास्ते में बार-बार होश खो रही मां के कारण 2100 किलोमीटर की यात्रा और लंबी होती जा रही है।
लॉकडाउन में बंगलुरू में फंसे माता-पिता को जब बेटे के घाघरा में डूबने से मौत की जानकारी हुई तो उन्होंने तुरंत कार बुक की और बलिया के लिए निकल पड़े। अब रास्ता में मां की तबीयत बार-बार खराब होने के कारण उनकी यात्रा और लंबी होती जा रही है। सोमवार को चली इनकी कार बुधवार को सुबह जौनपुर तक पहुंची थी।
पश्चिम बंगाल में फंसे एक पिता को लाख प्रयास के बाद भी आने की अनुमति नहीं मिली। हालांकि वह भी कोलकाता से साइकिल से ही चल पड़ा था, लेकिन उसे रास्ते में ही रोक लिया गया। उधर, सूरत गुजरात में फंसे एक किशोर के पिता भी कार से रवाना हो रहे थे, लेकिन प्रशासन ने यह कहते हुए रोक दिया कि आज बलिया के लिए ट्रेन रवाना होने वाली है, उसी से चले जाएं, क्योंकि उससे भी समय उतना ही लगेगा।
टोला फकरु राय के डेरा निवासी पांच किशोरों की सरयू नदी में बीते सोमवार को स्नान करते वक्त डूबने से मौत हो गई। डूबे किशोरों में से विकास कुमार यादव के पिता सन्तोष यादव ने सूचना पाते ही बंगलुरू प्रशासन से गांव जाने की अनुमति मांगी। अनुमति मिलने के बाद उन्होंने कार बुक की और पत्नी बिंदु देवी व दूसरे बेटे आकाश को लेकर बलिया के लिए रवाना हो गए।
हालांकि विकास की मां को यह नहीं बताया गया है कि उसके बेटे की मौत हो गई है, लेकिन इसके बावजूद उसे बेटे के साथ किसी अनहोनी का आभास हो गया है। इसकी वजह से वह रास्ते में बार-बार अचेत हो रही है, जिसके कारण उनकी यात्रा और लंबी होती जा रही है।
बुधवार को सुबह दस बजे तक उनकी कार जौनपुर तक पहुंची थी और उम्मीद जताई जा रही है कि शाम तक ये लोग गांव पहुंच जाएंगे। उधर, गांव के लोग विकास के दादा जयकिशुन यादव पर शव के अंतिम संस्कार के लिए दबाव डाल रहे हैं। हालांकि वे तैयार नहीं हो रहे और पोते का शव रख, बेटे-बहू का इंतजार कर रहे हैं।
अप्पू यादव के पिता कलकत्ता के गौरीपुर बाजार में लेबर का कार्य कर रहे थे। घटना की जानकारी के बाद वे किसी भी परिस्थिति में बेटे का अंतिम दर्शन करना चाह रहे थे। पहले आने में पैसा बाधक बन रहा था तो वे साईकिल लेकर निकल गए, लेकिन रास्ते में प्रशासन ने रोक लिया। यहां से भी लोग उन्हें पैसा भेजने को तैयार थे, प्रशासन से ये अपील की गई कि उन्हें किसी भी वाहन से भेज दिया जाए, लेकिन उन्हें आने की अनुमति नहीं दी गई।
लालू यादव के पिता जयप्रकाश यादव सूरत (गुजरात) में कार्य करते हैं। बेटे की मौत की जानकारी के बाद वे प्रशासन के पास वाहन पास की अनुमति के लिए पहुंचे। उन्हें अनुमति तो मिली है, लेकिन अपने वाहन से रवाना होने की नहीं। वहां के प्रशासन ने उन्हें बताया है कि बुधवार की शाम को पांच बजे सूरत से बलिया के लिए ट्रेन रवाना हो रही है। उन्हें भी उसी में सवार कर भेज दिया जाएगा। प्रशासन ने कहा है कि उन्हें जितना समय अपने वाहन से जाने में लगेगा, उतने ही समय में ट्रेन भी बलिया पहुंचा देगी।