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निर्भया के दादा-दादी बोले- कलेजे को ठंडक मिली, गांव वालों ने कहा- कोर्ट ने सही निर्णय दिया

Sat, 06 May 2017 07:01 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया Updated Sat, 06 May 2017 07:01 PM IST
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grand father of nirbhya salute supreme court for gangrape judgment
सु्प्रीम कोर्ट - फोटो : SELF
बहुचर्चित निर्भया कांड के चार आरोपियों को फांसी की सजा बरकरार रखने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निर्भया के बलिया स्थित गांव के लोगों ने खुशी जताई है। इस गांव में निर्भया को लोग बिटिया कहते हैं। बिटिया के दादा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।
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उनका कहना था कि अब उनके कलेजे को कुछ ठंडक मिली है। इस कांड के दरिंदों को मौत से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए थी। 95 वर्षीया दादी ने अपनी पोती की शहादत को आनेवाले समय के लिए एक उदाहरण बताया। कोर्ट का फैसला आने के बाद इस ग्राम सभा की महिलाओं ने मंदिरों में पूजा अर्चना की। बिटिया के गांव के लोगों ने खुशी जताई है। लोगों का कहना था कि मामले में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय काबिले तारीफ है। ऐसे बहशी आरोपियों को यही सजा मिलनी चाहिए। 
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उधर, जिले के लोगों में भी निर्भया प्रकरण में फांसी की सजा मिलने से खुशी का माहौल रहा। निर्भया प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय ने चार आरोपियों के खिलाफ निचली अदालतों द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है।
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उन्हें इस जघन्य अपराध का दोषी बताते हुए फांसी की सजा को सही माना है। निर्भया  के चाचा एवं अन्य सदस्यों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है। उसमें कहीं से भी कोई त्रुटि नहीं है। इस फैसले पीड़ित परिवार को देर से ही सही वाजिब न्याय मिला है।

कहा कि इससे बिटिया के आत्मा को शांति तो मिलेगी ही। बिटिया के गांव में इस फैसले को लेकर पूरे दिन चचाएं होती रही। कोई इसे देर से आया फैसला बता रहा था तो कोई इस सही ठहराने में जुटा हुआ था। लोगों का कहना था कि फैसला आने से इस तरह का अपराध को अंजाम देने से भी लोग डरेंगे।

वहीं दूसरी ओेर जिले के लोगों ने भी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को सराहा है। समाजिक कार्यकर्ता रिपुंजय रमण पाठक रानू कहा कि इससे पीड़ित परिवार को भी काफी राहत मिलेगी। वहीं समाज में भी अपराध रोकने के लिए संदेश जाएगा।

ग्राम प्रधान सविता देवी का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि इस देश में न्याय अभी भी जिंदा है और अपराधी कितना ही शातिर या बलवान क्यों न हो अगर वह कोई अपराध करता है तो उसे उचित दंड भी मिलेगा।

बता दें कि यह घटना 16 दिसम्बर 2012 की है जब चलती बस में निर्भया के साथ गैंगरेप कर सड़क पर फेंक दिया गया था। 

बलिया के लोगों ने फैसले को बताया ऐतिहासिक

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supreme court
16 दिसम्बर 2012 को जिले की बेटी के साथ दिल्ली में हुई गैंगरेप कांड पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषियों पर फांसी की सजा बरकरार रखने पर जनपदवासियों में खुशी का लहर दौड़ गई। जनपदवासियों ने एक स्वर से सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की प्रशंसा करते हुए पीड़ित के साथ न्याय करना बताया। 

छात्रनेता समाजसेवी रिपुंजय रमण पाठक रानू ने देश की जनता व मीडिया को धन्यवाद देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हैवानियत की सारी हदे पार करने वाले आरोपियों को फांसी की सजा बरकरार रख ऐतिहासिक फैसला किया है।  जिस प्रकार उस कठिन समय में छात्रा के साथ हिंसा और गैंगरेप के खिलाफ पूरा देश सहित जनपदवासियों ने सड़क पर उतर कर विरोध जताया था। आज उसका असली न्याय मिल गया है।

ये फैसला सिर्फ निर्भया का फैसला नहीं है, बल्कि उन पीड़ित युवती व महिलाओं सहित हम सभी के लिए है। आमजन को न्यायालय पर पूरा विश्वास था। जिसका नतीजा आज देखने को मिला है। इस ऐतिहासिक फैसले की जितनी भी निंदा की जाय कम है।
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