आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से राज्यपाल ने किया संवाद, बोलीं- प्रधानमंत्री देश की चिंता करते हैं, काशी से है लगाव
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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने तीन दिवसीय दौरे के दूसरे दिन सेवापुरी विकास खंड के सभागार में आंगनवाड़ी कार्यकत्री, सुपरवाइजर, पोषण संगिनी किशोरियों, कुपोषित बच्चों की माताओं से सीधा संवाद किया। आंगनवाड़ी कार्यकत्री दोस्त की तरह किशोरियों व गर्भवती/धात्री महिलाओं से व्यवहार करें और उनकी समस्याओं की विस्तार से पूछताछ कर उसके निदान की व्यवस्था करें।
उन्होंने कहा कि जहां सुझाव के बाद डॉक्टर से मिलाने, दवाई दिलाने, पुलिस सहायता कार्य हो उसे पूरा कराएं। आंगनवाड़ी में गरीब परिवार के बच्चे आते हैं, उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा व संस्कारवान बनाना है, यही उद्देश्य है। भोजपुरी गर्भवती महिलाएं जो समस्या बताएं उसका रजिस्टर बना लें। निस्तारण होने की जानकारी लाभार्थी से लें। उन्होंने सुपरवाइजरों से पूछा कि एक दिन में क्या-क्या काम करती हैं, कितना समय आंगनवाड़ी केंद्र पर देती हैं। स्वयं कार्य को देखें, केवल रजिस्टर पर दर्ज आंकड़ों तक सीमित नहीं रहे।
राज्यपाल ने कहा कि महिला एवं बाल विकास में काम करने वाली महिलाएं, जिनके लिए कार्य करना है, वह महिलाएं और बच्चे हैं। सौभाग्य की बात है कि ऐसी विभाग में गरीब परिवार की महिलाओं के लिए कार्य करने का मौका मिला है। इसकी गहराइयों में जाकर पूरा पता लगाकर निदान करें। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों की कार्य संपादन में कोई दिक्कत हो तो उसे उच्चाधिकारियों के संज्ञान में बेझिझक लाएं, तभी उसका निराकरण के उपाय निकलेंगे।
जहां नीतिगत निर्णय लेना होगा, वहां नीतियां बनाकर व्यवस्था होंगी। उन्होंने अपने 20 वर्ष में महिला एवं बाल विकास व शिक्षा में गुजरात सरकार में किए गए कार्यों के अनुभवों से काशी सहित पूरे उत्तर प्रदेश में महिला एवं बाल कल्याण को जमीनी स्तर पर गहराई से प्रभावकारी सुधार के संदेश दिए। पोस्टिक आहार को बच्चे के स्वाद के भी अनुरूप बनाएं। चाय की प्रबृत्ति नहीं डालें। दूध पीने के प्रति रुझान बढ़ाएं। यह सब शुरुआत से ही करें।
बनारस की आंगनबाड़ी में अच्छा काम हो रहा है। आज 21वीं सदी के बच्चों का आईक्यू तेज है, उनमें ग्रेप्स पावर अच्छी है। बच्चों को सिखाते समय बीच-बीच में शब्दों व गिनती आदि को पूछो। आंगनवाड़ी केंद्रों एवं प्राइमरी विद्यालयों में शिक्षा की एकरूपता के लिए केंद्र व स्कूल खुलने के समय से ही उस वर्ष के किसी माह पैदा होने वाले बच्चों का दाखिला लें, ताकि सभी पूरा कोर्स पढ़ सकें। उन्होंने बच्चों को सिखाने के कुछ टिप्स भी बताएं।